Nalanda News। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (बीमिम्स), पावापुरी को बड़ी सफलता मिली है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल के तहत संस्थान को लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर के रूप में अधिसूचित किया गया है। इससे नालंदा सहित नवादा, शेखपुरा और आसपास के जिलों के सड़क हादसों में घायल लोगों को बेहतर आपात चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद है।
विशेष रूप से एनएच-20 पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से जख्मी लोगों के लिए यह सुविधा काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। समय पर इलाज मिलने से घायलों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
सर्जरी से आईसीयू तक इलाज की व्यवस्था
लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर के तहत गंभीर रूप से घायल मरीजों के तत्काल उपचार, जरूरी जांच, आपातकालीन सर्जरी और गहन चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रावधान है। इसके लिए इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञों, जनरल सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञों की सेवाएं महत्वपूर्ण होंगी। सड़क हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे यानी गोल्डन आवर में समुचित इलाज मिलने से मरीज की जान बचाने में काफी मदद मिल सकती है।
सिर में गंभीर चोट या न्यूरोसर्जरी जैसी विशेष चिकित्सा की आवश्यकता होने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने अथवा मरीज को उच्चस्तरीय चिकित्सा केंद्र में रेफर करने की व्यवस्था रहेगी।

बिहार के 32 मेडिकल कॉलेज अधिसूचित
जारी जानकारी के अनुसार, बिहार के 16 सरकारी और 16 निजी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को ट्रॉमा सेंटर के रूप में अधिसूचित किया गया है। इनमें एम्स पटना को लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर का दर्जा दिया गया है, जबकि बीमिम्स पावापुरी समेत अन्य 31 मेडिकल कॉलेजों को लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर के रूप में शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मियों, जीवनरक्षक उपकरणों और जरूरी दवाओं की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा और उनकी जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
