पटना। राजधानी पटना में CNG से चलने वाले वाहनों की सवारी अब थोड़ी और महंगी पड़ने वाली है। CNG की कीमत में एक रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। अब लोगों को CNG के लिए 94 रुपये प्रति किलो चुकाने होंगे, जबकि अब तक इसकी कीमत 93 रुपये प्रति किलो थी। नई दर मंगलवार सुबह से लागू होगी।
कीमत में बढ़ोतरी भले ही सिर्फ एक रुपये की है, लेकिन रोजाना CNG से लंबी दूरी तय करने वाले ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन चालकों के लिए महीने के हिसाब से इसका असर दिखाई देगा। वहीं, आम यात्रियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बढ़ी हुई लागत का असर ऑटो और कैब के किराये पर पड़ता है या नहीं।
एक रुपये का हिसाब महीने में कितना?
CNG की कीमत बढ़ने का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनकी गाड़ी रोज चलती है। निजी कार चलाने वाला व्यक्ति हो या दिनभर सड़क पर रहने वाला ऑटो-टैक्सी चालक, खपत जितनी ज्यादा होगी, अतिरिक्त खर्च भी उतना ही बढ़ेगा।
मसलन, कोई CNG वाहन रोज 8 किलो गैस इस्तेमाल करता है तो एक रुपये की बढ़ोतरी से उसका खर्च करीब 8 रुपये प्रतिदिन बढ़ेगा। 26 दिन वाहन चलाने पर यह अंतर लगभग 208 रुपये बैठता है।
अगर रोजाना खपत 12 किलो है तो अतिरिक्त खर्च 12 रुपये प्रतिदिन और 26 दिनों में करीब 312 रुपये हो जाएगा।
यानी कीमत में बढ़ोतरी छोटी जरूर है, लेकिन नियमित रूप से वाहन चलाने वालों के लिए यह धीरे-धीरे मासिक खर्च में जुड़ती जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल—ऑटो और कैब का किराया बढ़ेगा?
CNG महंगी होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा सार्वजनिक परिवहन के किराये को लेकर होगी।
पटना में बड़ी संख्या में ऑटो और अन्य व्यावसायिक वाहन CNG पर चलते हैं। ऐसे में ईंधन की लागत बढ़ने का असर वाहन चालकों के दैनिक खर्च पर पड़ना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि चालक इस अतिरिक्त लागत को खुद वहन करते हैं या यात्रियों से किराये के रूप में इसकी भरपाई करने की कोशिश होती है।
हालांकि सिर्फ CNG की कीमत में एक रुपये की बढ़ोतरी के आधार पर किराया बढ़ना तय नहीं माना जा सकता। किराये में बदलाव के लिए संबंधित स्तर पर अलग फैसला जरूरी होगा।
निजी कार वालों के लिए भी बढ़ा खर्च
CNG को आमतौर पर पेट्रोल के मुकाबले किफायती ईंधन विकल्प माना जाता है। यही वजह है कि कई वाहन मालिक ईंधन खर्च कम रखने के लिए CNG वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
अब 94 रुपये प्रति किलो की नई दर के बाद CNG वाहन मालिकों को भी अपने मासिक बजट की दोबारा गणना करनी होगी।
खासकर ऐसे परिवारों के लिए इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है जहां रोजाना लंबी दूरी तक ऑफिस, कारोबार या बच्चों की पढ़ाई के लिए वाहन का इस्तेमाल होता है।
विश्लेषण: असली असर एक रुपये का नहीं, लगातार बढ़ती लागत का है
CNG की कीमत में एक रुपये की बढ़ोतरी अपने आप में बड़ी खबर नहीं लग सकती। लेकिन उपभोक्ता के नजरिए से ईंधन की कीमत को सिर्फ एक बार की बढ़ोतरी के रूप में देखना सही नहीं होगा।
ईंधन की कीमत में हर छोटी बढ़ोतरी जब बार-बार होती है तो उसका संचयी असर वाहन चलाने की कुल लागत पर पड़ता है। इसके अलावा वाहन मालिक को ईंधन के साथ सर्विसिंग, बीमा, टायर, रखरखाव और अन्य खर्च भी वहन करने पड़ते हैं।
व्यावसायिक वाहनों के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग है। ऑटो या कैब चालक के लिए CNG सीधे ऑपरेटिंग कॉस्ट का हिस्सा है। इसलिए कीमत बढ़ने के बाद उसके सामने तीन विकल्प होते हैं—खर्च खुद सहना, ज्यादा यात्राएं करना या किराये में बढ़ोतरी की मांग करना।
यही वजह है कि CNG की कीमत में मामूली बदलाव भी परिवहन क्षेत्र में चर्चा का विषय बन जाता है।
क्या CNG अभी भी किफायती विकल्प रहेगी?
नई कीमत के बाद यह सवाल भी स्वाभाविक है कि CNG वाहन चलाना अब भी कितना फायदेमंद रहेगा।
इसका जवाब सिर्फ CNG की कीमत से नहीं निकलेगा। तुलना करते समय पेट्रोल की मौजूदा कीमत, वाहन का माइलेज, रोजाना कितनी दूरी तय होती है और वाहन की मेंटेनेंस लागत—इन सभी को देखना होगा।
यानी किसी व्यक्ति के लिए 94 रुपये प्रति किलो CNG अभी भी बेहतर विकल्प हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए ईंधन लागत का अंतर उतना महत्वपूर्ण नहीं होगा।
यात्रियों पर असर अभी सबसे बड़ा सवाल
CNG की नई दर लागू होने के बाद पटना के यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि क्या ऑटो और कैब चालक बढ़ी हुई लागत का हवाला देकर किराया बढ़ाते हैं।
अगर किराया बढ़ता है तो CNG की कीमत में एक रुपये की बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन मालिक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दैनिक यात्रियों के परिवहन बजट पर भी पड़ेगा।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि नई CNG दर के कारण किराये में तत्काल कितना बदलाव होगा।
मंगलवार सुबह से नया रेट
नई दर मंगलवार सुबह से लागू होगी। यानी इसके बाद CNG भराने वाले उपभोक्ताओं को पहले के 93 रुपये के बजाय 94 रुपये प्रति किलो भुगतान करना होगा।
फिलहाल बढ़ोतरी सिर्फ एक रुपये प्रति किलो है, लेकिन आने वाले दिनों में इसका सबसे बड़ा असर परिवहन क्षेत्र की लागत और यात्रियों के किराये पर देखने को मिल सकता है।
93 से 94 रुपये—सुनने में सिर्फ एक रुपये का फर्क। लेकिन रोज सड़क पर दौड़ने वाले वाहन के लिए यही एक रुपया महीने के बजट में सैकड़ों रुपये जोड़ सकता है।
अब असली नजर इस पर होगी कि बढ़ी CNG कीमत का बोझ ऑटो-टैक्सी चालक उठाते हैं या फिर इसका हिस्सा यात्रियों की जेब तक पहुंचता है।