Onion Price Hike: देश में प्याज की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। महाराष्ट्र की नासिक मंडी में प्याज के थोक भाव में महज एक महीने के भीतर करीब 76 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी तरफ कई राज्यों में भी थोक कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इस बढ़ोतरी के पीछे खरीफ प्याज की बोआई में देरी, रबी प्याज की कमजोर आवक और सरकारी बफर स्टॉक की सीमित खरीद जैसे कारण सामने आ रहे हैं।
नासिक मंडी में प्याज का भाव तेजी से बढ़ा
नासिक की मंडियों में प्याज की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में तेज बदलाव आया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 23 जुलाई के आसपास नासिक मंडी में प्याज का भाव करीब 2050 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अगस्त में बढ़कर 3500 रुपये से ऊपर पहुंच गया। 19 अगस्त को भाव 3750 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया था। इसके बाद भी कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा।
प्याज महंगा होने की बड़ी वजह क्या है?
प्याज की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। मानसून की स्थिति और खरीफ प्याज की बोआई में देरी से आने वाले समय की सप्लाई को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है। इसके अलावा रबी प्याज की आवक कम होने से मौजूदा समय में मंडियों पर दबाव बढ़ा है। कुछ रिपोर्टों में व्यापारियों की ओर से संभावित कीमत बढ़ने की उम्मीद में खरीदारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
सरकारी बफर स्टॉक भी बना चिंता का कारण
प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने में सरकार का बफर स्टॉक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस साल सरकार ने बफर के लिए प्याज खरीदने का लक्ष्य 2 लाख टन रखा था, लेकिन जुलाई के अंत तक करीब 1.20 लाख टन ही खरीद हो सकी थी। खुले बाजार में बेहतर कीमत मिलने के कारण किसानों की सरकारी एजेंसियों को बिक्री में रुचि कम रही। सरकार ने खरीद को बढ़ावा देने के लिए खरीद मूल्य में कई बार बढ़ोतरी भी की है।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ता है प्याज का भाव?
प्याज की कीमतों में अगस्त और सितंबर के दौरान मौसमी तेजी आमतौर पर देखने को मिलती है। इस अवधि में रबी सीजन का स्टॉक धीरे-धीरे कम होता है, जबकि नई खरीफ फसल की पर्याप्त आवक बाजार में आने में समय लगता है। इस साल खरीफ बोआई में देरी और मौसम से जुड़ी अनिश्चितता ने इस अंतर को और बढ़ा दिया है। ऐसे में मंडियों में उपलब्ध प्याज की मात्रा पर दबाव पड़ने से कीमतें ऊपर जा रही हैं।
क्या प्याज की कमी हो गई है?
सरकार के अनुसार देश में प्याज के कुल उत्पादन को लेकर फिलहाल बड़ी कमी की स्थिति नहीं है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 307.67 लाख टन था। यानी उत्पादन लगभग पिछले साल के स्तर के आसपास है। मौजूदा परेशानी मुख्य रूप से अलग-अलग समय पर मंडियों में होने वाली आवक और उपलब्ध स्टॉक को लेकर है।
खुदरा बाजार पर भी दिखने लगा असर
थोक मंडियों में बढ़ी कीमतों का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। उपभोक्ता मामलों से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 22 अगस्त को प्याज का राष्ट्रीय औसत खुदरा भाव करीब 41.64 रुपये प्रति किलो था, जबकि एक महीने पहले यह करीब 34.95 रुपये प्रति किलो था। यानी इस अवधि में औसत खुदरा कीमत में भी लगभग 19 फीसदी की वृद्धि हुई है।
कई राज्यों में प्याज के भाव चढ़े
प्याज की महंगाई का असर सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। उपलब्ध मंडी आंकड़ों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, पंजाब, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पिछले एक महीने के मुकाबले थोक कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय आवक, मांग और परिवहन लागत के कारण कीमतों में अंतर बना हुआ है।
आगे कब मिल सकती है राहत?
प्याज की कीमतों में राहत मुख्य रूप से नई फसल की आवक और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर निर्भर करेगी। अगर खरीफ प्याज की आवक उम्मीद के मुताबिक बढ़ती है तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। वहीं, अगर बोआई में देरी और कम आवक का असर जारी रहा तो कुछ समय तक कीमतें ऊंची रह सकती हैं। सरकार भी बफर स्टॉक के जरिए उन शहरों में आपूर्ति बढ़ाने पर विचार कर रही है जहां खुदरा भाव ज्यादा बढ़ रहे हैं।