मुजफ्फरपुर: तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नव निर्वाचित निर्दलीय विधान परिषद सदस्य वंशीधर ब्रजवासी शनिवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। वंशीधर ब्रजवासी ने हाल में हुए चुनाव में एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार अभिषेक झा को पराजित किया था। उनकी जीत के बाद से ही उनके भाजपा में शामिल होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज थी।
ब्रजवासी के भाजपा में जाने के कयास उस समय और मजबूत हुए, जब चुनाव परिणाम सामने आने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। इसके बाद से ही यह माना जाने लगा था कि वह जल्द ही भाजपा का हिस्सा बन सकते हैं। अब उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दो बार मिली जीत
वंशीधर ब्रजवासी की राजनीतिक यात्रा की खास बात यह रही कि उन्होंने सत्ता के किसी बड़े राजनीतिक दल के टिकट पर नहीं, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2024 में देवेश चंद्र ठाकुर के इस्तीफे के बाद तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में ब्रजवासी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
उनकी पहली जीत को शिक्षकों से जुड़े आंदोलन की पृष्ठभूमि में देखा गया। जिले के मड़वन प्रखंड की रक्सा पंचायत के एक स्कूल में नियोजित शिक्षक के रूप में काम कर चुके ब्रजवासी ने शिक्षकों के मुद्दों को लेकर सड़क पर आंदोलन किया था। इस संघर्ष के दौरान उन्हें अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी। इसके बाद शिक्षकों के बीच उनकी सक्रियता और आंदोलन से जुड़ी पहचान मजबूत हुई।

शिक्षकों की लड़ाई से विधान परिषद तक का सफर
ब्रजवासी की राजनीतिक पहचान शिक्षकों के मुद्दों पर सक्रियता से बनी। उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया और इसी क्रम में वह व्यापक स्तर पर चर्चा में आए। वर्ष 2024 के उपचुनाव में उनकी जीत ने उन्हें सीधे विधान परिषद तक पहुंचाया। इस चुनाव में उन्होंने एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज से जुड़े उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की थी।
इसके बाद 23 अक्टूबर को हुए चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर कायम रखी। इस चुनाव में भी उनका मुकाबला जदयू समर्थित उम्मीदवार अभिषेक झा से हुआ। परिणाम में ब्रजवासी ने अभिषेक झा को हराकर अपनी राजनीतिक पकड़ को दोबारा साबित किया। लगातार दूसरी जीत के बाद उनका भाजपा में शामिल होना अब उनकी राजनीतिक यात्रा का नया चरण माना जा रहा है।
चुनाव प्रचार के दौरान भी चर्चा में रहे ब्रजवासी
चुनाव प्रचार के दौरान वंशीधर ब्रजवासी के सत्ता पक्ष के कई नेताओं के प्रति नरम रवैये की चर्चा भी हुई थी। इंटरनेट मीडिया पर सत्ता पक्ष के नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें प्रसारित हुई थीं। इससे उनके राजनीतिक रुख को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे। हालांकि, चुनाव उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ही लड़ा और जीत हासिल की।
अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति बदल गई है। शिक्षक आंदोलन से विधान परिषद तक पहुंचे ब्रजवासी ने अपनी राजनीतिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। उनकी सदस्यता को तिरहुत स्नातक क्षेत्र की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह लगातार दो चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतने के बाद अब एक प्रमुख राजनीतिक दल के साथ जुड़ गए हैं।

भाजपा में शामिल होने से बदला राजनीतिक समीकरण
वंशीधर ब्रजवासी के भाजपा में शामिल होने से तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में नया समीकरण बनना स्वाभाविक है। अब तक शिक्षक मुद्दों और निर्दलीय राजनीति के जरिए अपनी पहचान बनाने वाले ब्रजवासी भाजपा के संगठनात्मक ढांचे के साथ काम करेंगे। उनकी पृष्ठभूमि शिक्षकों के आंदोलन से जुड़ी रही है, इसलिए पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में नजर बनी रहेगी।
ब्रजवासी की इस पूरी यात्रा में शिक्षक आंदोलन, निर्दलीय चुनावी जीत और अब भाजपा में प्रवेश तीन महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं। दो चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल करने के बाद पार्टी में शामिल होने का फैसला उनके राजनीतिक सफर को नई दिशा देता है।
