Munger News: मुंगेर सदर अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शनिवार देर रात प्रसव पीड़ा से परेशान एक महिला ने अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर खड़े ई-रिक्शा में ही बच्चे को जन्म दिया। अस्पताल पहुंचने के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना ने मौके पर पहुंचकर प्रसव कराया।
जच्चा और नवजात दोनों को बाद में प्रसव वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति सामान्य बताई गई। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में अस्पताल परिसर में वाहन के अंदर प्रसव की यह तीसरी घटना है।
प्रसव वार्ड तक पहुंचने से पहले ई-रिक्शा में गूंजी किलकारी
नया रामनगर थाना क्षेत्र के गढ़ी रामपुर निवासी सुशील ठाकुर की पत्नी मोनी देवी शनिवार देर रात प्रसव पीड़ा के बाद मुंगेर सदर अस्पताल पहुंचीं। परिवार उन्हें अस्पताल लेकर आया, लेकिन प्रसव वार्ड तक पहुंचने से पहले ही स्थिति गंभीर हो गई।
महिला को तत्काल प्रसव कक्ष तक ले जाने की स्थिति नहीं बन पाई और इमरजेंसी के बाहर खड़े ई-रिक्शा में ही प्रसव शुरू हो गया।
सूचना मिलते ही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना मौके पर पहुंचीं। उन्होंने ई-रिक्शा में ही सुरक्षित प्रसव कराया। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों की मदद से जच्चा और नवजात को प्रसव वार्ड में भर्ती कराया गया। दोनों की हालत सामान्य बताई गई है।
पांचवें बच्चे के जन्म से परिवार में खुशी
मोनी देवी के पहले से तीन बेटियां और एक बेटा है। इस बार बेटे के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद जिस तरह वाहन में ही प्रसव की नौबत आई, उससे अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
परिजनों के मुताबिक, अस्पताल का प्रसव वार्ड पहली मंजिल पर है। प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को इमरजेंसी से पहली मंजिल तक ले जाना कई बार मुश्किल हो जाता है।
इसी वजह से प्रसव वार्ड को ग्राउंड फ्लोर पर स्थानांतरित करने की मांग उठ रही है, ताकि गंभीर स्थिति में गर्भवती महिलाओं को कम से कम समय में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
सितंबर में तीसरी बार वाहन बना प्रसव का स्थान
मुंगेर सदर अस्पताल में सितंबर महीने के दौरान वाहन में प्रसव की यह तीसरी घटना बताई जा रही है। इससे पहले भी दो महिलाओं ने अस्पताल के अंदर प्रसव कक्ष तक पहुंचने से पहले परिसर में ही वाहनों में बच्चों को जन्म दिया था।
बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था और प्रसव सेवाओं की पहुंच पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब, जब अस्पताल में प्रसव के लिए अलग वार्ड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मौजूद है।
अस्पताल की व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल
इस घटना ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि आखिर प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को इमरजेंसी से प्रसव वार्ड तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
अगर किसी गर्भवती की स्थिति अचानक गंभीर हो जाए तो उसे तत्काल चिकित्सा निगरानी और सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिलना जरूरी है। ऐसे में प्रसव वार्ड को निचले तल पर रखने या इमरजेंसी से सीधे जोड़ने जैसी व्यवस्था पर विचार की मांग सामने आ रही है।
मुंगेर सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हाल में अन्य रिपोर्टों में भी डॉक्टरों और सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख हुआ है।