मढ़ौरा में शराब बरामदगी की कार्रवाई ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश से बिहार तक सक्रिय शराब तस्करी के नेटवर्क पर सवाल खड़े किए हैं। सारण जिले के मढ़ौरा थाना क्षेत्र में धेनुकी चौक के पास पुलिस ने एक 12 चक्का ट्रक को रोककर तलाशी ली। वाहन से 77 कार्टून विदेशी शराब मिलने के बाद पुलिस ने चालक और खलासी को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक शराब की खेप उत्तर प्रदेश से लाई जा रही थी।
पुलिस को धेनुकी चौक के आसपास मुख्य सड़क से शराब की बड़ी खेप गुजरने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और मढ़ौरा डायल 112 की टीम के साथ समन्वय कर कार्रवाई की तैयारी की। संदिग्ध ट्रक के गुजरने की आशंका वाले मार्ग पर पुलिसकर्मियों ने निगरानी बढ़ाई। जैसे ही बताए गए हुलिए का 12 चक्का ट्रक वहां पहुंचा, टीम ने उसे रुकवाया।
पुलिस ने वारंट और गुप्त सूचना के आधार पर की कार्रवाई
वाहन रोकने के बाद पुलिस ने ट्रक के भीतर रखे सामान की जांच शुरू की। तलाशी के दौरान छिपाकर रखे गए विदेशी शराब के 77 कार्टून बरामद हुए। इसके बाद मौके पर मौजूद चालक और खलासी को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने शराब के साथ ट्रक को भी जब्त कर लिया है। जब्त शराब की ब्रांड, कुल बोतलों और अनुमानित बाजार कीमत का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराए गए प्रारंभिक विवरण में नहीं दिया गया है।
प्रारंभिक सूचना के अनुसार, खेप उत्तर प्रदेश से ट्रक के जरिए बिहार लाई जा रही थी। हालांकि शराब किस स्थान पर पहुंचाई जानी थी, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि ट्रक किसके कहने पर रवाना हुआ, रास्ते में इसे किसे सौंपा जाना था और तस्करी के इस काम में किन अन्य लोगों की भूमिका थी। चालक और खलासी से पूछताछ इसी दिशा में की जा रही है।

जांच के केंद्र में नेटवर्क और घटनाक्रम
शराबबंदी लागू होने के बाद भी सीमावर्ती राज्यों से अवैध शराब की आवाजाही रोकना पुलिस और उत्पाद विभाग के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। तस्कर अक्सर बड़े वाहनों का इस्तेमाल कर माल को छिपाकर ले जाने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में केवल वाहन पर मौजूद लोगों की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो पाता। आपूर्ति करने वाले, परिवहन की व्यवस्था करने वाले और स्थानीय स्तर पर खेप लेने वाले लोगों की पहचान भी जांच का अहम हिस्सा होती है।
मढ़ौरा की इस कार्रवाई में डायल 112 और थाना पुलिस की संयुक्त भूमिका रही। गुप्त सूचना के आधार पर समय रहते वाहन को रोकना बरामदगी में निर्णायक साबित हुआ। पुलिस अब जब्त शराब और वाहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकती है, ताकि ट्रक के मालिकाना हक, यात्रा के मार्ग और खेप की वास्तविक मंजिल का पता लगाया जा सके। उपलब्ध सूचना में ट्रक के पंजीकरण नंबर या चालक-खलासी के नाम का उल्लेख नहीं है।
गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। जांच में यदि किसी बड़े गिरोह या संगठित तस्करी नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता जब्त शराब के स्रोत और गंतव्य की पुष्टि करना तथा इस कारोबार से जुड़े संभावित सहयोगियों की पहचान करना है।
