विशेष लेख | 8 नवम्बर | विश्व राजनीति और इतिहास
8 नवम्बर 1932 को महामंदी (Great Depression) से जूझ रहे अमेरिका ने सत्ता परिवर्तन का फैसला सुनाया। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और न्यूयॉर्क के तत्कालीन गवर्नर फ्रेंकलिन डेलानो रूजवेल्ट ने मौजूदा राष्ट्रपति रिपब्लिकन हरबर्ट हूवर को निर्णायक अंतर से हराया। रूजवेल्ट की जीत ने न केवल व्हाइट हाउस में नेतृत्व बदला, बल्कि अमेरिकी सरकार की आर्थिक और सामाजिक भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने वाले ‘न्यू डील’ कार्यक्रमों का रास्ता भी खोला।
1929 में शेयर बाजार के पतन के बाद शुरू हुई आर्थिक मंदी 1932 तक अमेरिकी समाज के हर हिस्से को प्रभावित कर रही थी। बैंक बंद हो रहे थे, उद्योगों में उत्पादन घट रहा था, किसान कर्ज और गिरती कीमतों से जूझ रहे थे और लाखों लोग बेरोजगार थे। ऐसे संकट में मतदाताओं ने रिपब्लिकन प्रशासन के बजाय बदलाव और सरकारी हस्तक्षेप का वादा करने वाले रूजवेल्ट पर भरोसा जताया। 8 नवम्बर 1932 का चुनाव आधुनिक अमेरिकी इतिहास में एक निर्णायक मोड़ बन गया।
महामंदी ने बदला अमेरिकी जनजीवन
महामंदी केवल शेयर बाजार की गिरावट नहीं थी। वित्तीय संकट ने बैंकों, कारोबार, कृषि, उद्योग और आम परिवारों को एक साथ प्रभावित किया। निवेश और उपभोग में कमी आई, कंपनियों ने उत्पादन घटाया और कर्मचारियों की छंटनी की। ग्रामीण क्षेत्रों में फसल की कीमतें गिरने से किसानों की आय प्रभावित हुई। जिन परिवारों की बचत बैंक खातों में थी, वे बैंक विफलताओं के कारण असुरक्षित महसूस करने लगे।

राष्ट्रपति हरबर्ट हूवर ने संकट से निपटने के लिए कुछ सरकारी कदम उठाए। उनके प्रशासन ने सार्वजनिक निर्माण, वित्तीय संस्थानों को सहायता और उद्योगों के साथ सहयोग जैसे उपाय किए। 1932 में Reconstruction Finance Corporation की स्थापना भी हुई, जिसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों और कुछ अन्य संस्थाओं को ऋण उपलब्ध कराना था। फिर भी संकट की व्यापकता और राहत की गति को लेकर जनता में असंतोष बढ़ता गया। बहुत से अमेरिकियों को लगा कि संघीय सरकार की प्रतिक्रिया उनकी तत्काल जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त नहीं थी।
महामंदी के दौरान बेरोजगारी, बेघरपन और गरीबी ने सामाजिक तनाव बढ़ाया। शहरों में भोजन और रोजगार की तलाश में लोगों की कतारें दिखाई देती थीं। किसानों को गिरती कीमतों और कर्ज के दबाव का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों ने 1932 के चुनाव को सामान्य राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़ाकर आर्थिक व्यवस्था और सरकार की जिम्मेदारी पर जनमत-संग्रह जैसा बना दिया।
फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट का उभार
फ्रेंकलिन डेलानो रूजवेल्ट का जन्म 30 जनवरी 1882 को न्यूयॉर्क राज्य के हाइड पार्क में हुआ था। वह डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े थे और 1929 से 1932 तक न्यूयॉर्क के गवर्नर रहे। इससे पहले वह न्यूयॉर्क राज्य की सीनेट और अमेरिकी नौसेना विभाग में सहायक सचिव के पद पर काम कर चुके थे। 1921 में पोलियो जैसी बीमारी के बाद उनके पैरों में स्थायी कमजोरी आ गई, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका जारी रखी।
न्यूयॉर्क के गवर्नर के रूप में रूजवेल्ट ने आर्थिक संकट के बीच राहत और रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों का समर्थन किया। राज्य स्तर पर उनके प्रशासन के अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे नेता की छवि दी जो आर्थिक कठिनाइयों से निपटने में सरकार की भूमिका को स्वीकार करता था। 1932 में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शिकागो में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना।

नामांकन स्वीकार करते हुए रूजवेल्ट ने अमेरिकी जनता के लिए ‘न्यू डील’ का वादा किया। यह शब्द आगे चलकर उनके प्रशासन के व्यापक आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रमों की पहचान बना। उन्होंने राहत, आर्थिक पुनरुद्धार और सुधार को प्रमुख लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। उनका अभियान आशा, बदलाव और सक्रिय नेतृत्व के संदेश पर केंद्रित था।
हूवर बनाम रूजवेल्ट: दो राजनीतिक दृष्टिकोण
हरबर्ट हूवर 1929 से अमेरिका के राष्ट्रपति थे। वह इंजीनियर और सफल प्रशासक के रूप में पहचाने जाते थे तथा प्रथम विश्व युद्ध के बाद मानवीय राहत कार्यों में उनकी भूमिका रही थी। लेकिन महामंदी उनके राष्ट्रपति कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती बन गई। उनके आलोचकों का मानना था कि संकट के शुरुआती वर्षों में प्रशासन ने प्रत्यक्ष राहत और अर्थव्यवस्था में संघीय हस्तक्षेप को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी। हूवर का पक्ष था कि आर्थिक पुनरुद्धार के लिए स्थानीय समुदायों, निजी संस्थाओं और कारोबार की भूमिका महत्वपूर्ण है तथा संघीय सरकार को सीमित और संतुलित हस्तक्षेप करना चाहिए।
रूजवेल्ट ने इसके विपरीत संघीय सरकार की अधिक सक्रिय भूमिका का समर्थन किया। उन्होंने बेरोजगारों और जरूरतमंद परिवारों को राहत, सार्वजनिक कार्यों के जरिए रोजगार, कृषि और उद्योगों में स्थिरता तथा वित्तीय व्यवस्था में सुधार की बात कही। हालांकि चुनाव अभियान के दौरान ‘न्यू डील’ की सभी नीतियों का विस्तृत खाका तय नहीं था, लेकिन बदलाव का उनका संदेश महामंदी से परेशान मतदाताओं के बीच प्रभावशाली साबित हुआ।
8 नवम्बर 1932: निर्णायक चुनावी जीत
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव 8 नवम्बर 1932 को हुआ। रूजवेल्ट के साथ उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन नैंस गार्नर थे, जबकि हूवर के साथ चार्ल्स कर्टिस मैदान में थे। चुनाव का परिणाम रूजवेल्ट के पक्ष में भारी अंतर से आया। अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार के इलेक्टोरल कॉलेज रिकॉर्ड के अनुसार, रूजवेल्ट को 472 और हूवर को 59 इलेक्टोरल वोट मिले। कुल 531 इलेक्टोरल वोटों में जीत के लिए 266 की आवश्यकता थी।

लोकप्रिय मतों में भी रूजवेल्ट को स्पष्ट बढ़त मिली। राष्ट्रपति हूवर के आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज अंतिम परिणाम के अनुसार, रूजवेल्ट को 22,821,857 और हूवर को 15,761,841 लोकप्रिय वोट मिले। रूजवेल्ट ने 42 राज्यों में जीत दर्ज की और डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस में भी मजबूत स्थिति हासिल की। यह परिणाम रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका था, जिसका राष्ट्रीय राजनीतिक वर्चस्व 1920 के दशक में मजबूत रहा था।
हूवर ने चुनाव परिणाम स्वीकार करते हुए 8 नवम्बर की रात रूजवेल्ट को बधाई संदेश भेजा। उन्होंने अपने संदेश में देश की सेवा के अवसर के लिए शुभकामनाएं दीं और सहयोग की भावना व्यक्त की। यह शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण अमेरिकी लोकतांत्रिक परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण था, हालांकि चुनाव और शपथ ग्रहण के बीच उस समय लगभग चार महीने का अंतर था।
न्यू डील: चुनावी वादे से सरकारी कार्यक्रम तक
रूजवेल्ट ने 4 मार्च 1933 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उस समय तक आर्थिक स्थिति और बिगड़ चुकी थी। बैंकिंग व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर था और बेरोजगारी अत्यधिक स्तर पर पहुंच गई थी। पद संभालने के बाद उनके प्रशासन ने बैंकिंग संकट से निपटने के लिए अस्थायी बैंक अवकाश घोषित किया और कांग्रेस से आपातकालीन कानून पारित कराए। बैंकिंग व्यवस्था को स्थिर करने और जनता का भरोसा बहाल करने के प्रयास न्यू डील के शुरुआती कदमों में शामिल थे।
न्यू डील किसी एक कानून या योजना का नाम नहीं था, बल्कि 1930 के दशक में शुरू किए गए अनेक कार्यक्रमों, संस्थाओं और सुधारों का व्यापक समूह था। इसके प्रमुख उद्देश्य राहत (Relief), पुनरुद्धार (Recovery) और सुधार (Reform) थे। राहत कार्यक्रमों के तहत बेरोजगारों और गरीब परिवारों को सहायता दी गई। सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार पैदा करने का प्रयास हुआ। कृषि और उद्योगों में उत्पादन तथा कीमतों को स्थिर करने के लिए नीतियां बनाई गईं।

Works Progress Administration (WPA) और Civilian Conservation Corps (CCC) जैसी योजनाओं ने रोजगार और सार्वजनिक कार्यों में भूमिका निभाई। Tennessee Valley Authority (TVA) ने क्षेत्रीय विकास, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में काम किया। बैंकिंग तथा वित्तीय बाजारों के नियमन में भी सुधार किए गए। बाद के वर्षों में Social Security Act 1935 और श्रमिक अधिकारों से जुड़े कानूनों ने अमेरिकी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को नया आधार दिया।
क्या न्यू डील ने महामंदी समाप्त कर दी?
रूजवेल्ट की जीत और न्यू डील को अक्सर महामंदी से उबरने की अमेरिकी कोशिशों के निर्णायक अध्याय के रूप में देखा जाता है। लेकिन यह कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा कि न्यू डील लागू होते ही महामंदी समाप्त हो गई। सरकारी राहत, सार्वजनिक निवेश, वित्तीय सुधार और रोजगार कार्यक्रमों ने लाखों लोगों को मदद पहुंचाई तथा आर्थिक संस्थाओं में भरोसा बहाल करने में योगदान दिया। इसके बावजूद बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता कई वर्षों तक बनी रही।
इतिहासकारों और अर्थशास्त्रियों के बीच न्यू डील के प्रभाव की सीमा पर बहस जारी है। कुछ विश्लेषण इसे सामाजिक सुरक्षा और सरकारी नियमन की बुनियाद मानते हैं, जबकि अन्य का तर्क है कि आर्थिक सुधार अपेक्षा से धीमा रहा और महामंदी का पूर्ण अंत द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बढ़े औद्योगिक उत्पादन और सरकारी मांग के साथ आया। इसलिए न्यू डील को संकट के खिलाफ महत्वपूर्ण नीतिगत प्रतिक्रिया के रूप में समझना अधिक संतुलित है, न कि तत्काल समाधान के रूप में।
अमेरिकी राजनीति में स्थायी बदलाव
1932 की जीत ने अमेरिकी राजनीति में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति मजबूत की। रूजवेल्ट ने 1936, 1940 और 1944 में भी राष्ट्रपति चुनाव जीते और चार बार राष्ट्रपति चुने जाने वाले अमेरिका के एकमात्र राष्ट्रपति बने। उनके लंबे कार्यकाल के दौरान संघीय सरकार की भूमिका, सामाजिक सुरक्षा, श्रम संबंधों और आर्थिक नियमन में स्थायी परिवर्तन हुए। 1951 में संविधान के 22वें संशोधन के अनुमोदन के बाद राष्ट्रपति के दो निर्वाचित कार्यकाल की सीमा तय हुई; यह बदलाव रूजवेल्ट के चार कार्यकालों के बाद की संवैधानिक पृष्ठभूमि से जुड़ा था।

रूजवेल्ट के नेतृत्व में अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1941 में पर्ल हार्बर पर जापानी हमले के बाद अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ। रूजवेल्ट का निधन 12 अप्रैल 1945 को हुआ, जब युद्ध अपने अंतिम चरण में था। उनकी राजनीतिक विरासत में न्यू डील, सामाजिक सुरक्षा और संकट के समय संघीय नेतृत्व की भूमिका प्रमुख स्थान रखती है।
8 नवम्बर 1932 का ऐतिहासिक महत्व
महामंदी के दौर में रूजवेल्ट की जीत अमेरिकी जनता की आर्थिक असुरक्षा, बदलाव की इच्छा और सरकार से नई अपेक्षाओं का परिणाम थी। 8 नवम्बर 1932 को मतदाताओं ने हूवर प्रशासन के प्रति असंतोष व्यक्त किया और रूजवेल्ट को व्यापक जनादेश दिया। 472 इलेक्टोरल वोटों की जीत ने उन्हें संकट के बीच मजबूत राजनीतिक आधार प्रदान किया।
इस चुनाव का महत्व केवल राष्ट्रपति बदलने तक सीमित नहीं रहा। इसने अमेरिकी राज्य की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों पर नई बहस को संस्थागत रूप दिया। न्यू डील की नीतियों ने रोजगार, बैंकिंग, कृषि, श्रम और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सरकार की भूमिका का विस्तार किया। महामंदी तत्काल समाप्त नहीं हुई, लेकिन 1932 का चुनाव अमेरिकी इतिहास में उस मोड़ के रूप में दर्ज हुआ, जहां संकट के जवाब में देश ने नई राजनीतिक दिशा चुनी।
