Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: लियोन ट्रॉट्स्की: रूसी क्रांति के रणनीतिकार, लाल सेना के निर्माता और स्टालिन के प्रखर आलोचक
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - राजनीति - लियोन ट्रॉट्स्की: रूसी क्रांति के रणनीतिकार, लाल सेना के निर्माता और स्टालिन के प्रखर आलोचक

लियोन ट्रॉट्स्की: रूसी क्रांति के रणनीतिकार, लाल सेना के निर्माता और स्टालिन के प्रखर आलोचक

प्रशांत कुमार
Last updated: नवम्बर 7, 2026 11:59 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 55 मिनट पहले
लियोन ट्रॉट्स्की: रूसी क्रांति और लाल सेना के निर्माता
लियोन ट्रॉट्स्की: रूसी क्रांति और लाल सेना के निर्माता
साझा करें

जयंती विशेष | 7 नवंबर | इतिहास एवं विश्व राजनीति

बीसवीं सदी की विश्व राजनीति को जिन क्रांतिकारी विचारकों और नेताओं ने गहराई से प्रभावित किया, उनमें लियोन ट्रॉट्स्की का नाम प्रमुख है। रूसी मार्क्सवादी क्रांतिकारी, प्रभावशाली वक्ता, लेखक और सिद्धांतकार के रूप में पहचाने जाने वाले ट्रॉट्स्की ने 1917 की रूसी क्रांति में निर्णायक भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने सोवियत लाल सेना को संगठित करने और रूसी गृहयुद्ध में बोल्शेविक सत्ता की रक्षा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। लेकिन सत्ता-संघर्ष में जोसेफ स्टालिन से पराजित होने के बाद उन्हें देशनिकाला झेलना पड़ा और अंततः मैक्सिको में उनकी हत्या कर दी गई।

जन्म, परिवार और शुरुआती जीवन

लियोन ट्रॉट्स्की का जन्म 7 नवंबर 1879 को तत्कालीन रूसी साम्राज्य के खेरसॉन प्रांत के यानोव्का गांव में हुआ था। यह क्षेत्र आज यूक्रेन में है। उनका जन्म नाम लेव दाविदोविच ब्रोंश्टाइन था। उनका परिवार यहूदी पृष्ठभूमि का था और खेती-किसानी से जुड़ा था। बचपन में शिक्षा के लिए उन्हें ओडेसा भेजा गया, जहां उनकी बौद्धिक क्षमता और साहित्यिक रुचि सामने आई। बाद में निकोलायेव में पढ़ाई के दौरान वे समाजवादी विचारों और मजदूर आंदोलन से प्रभावित हुए।

1897 के आसपास वे दक्षिण रूसी मजदूर संघ के संगठनात्मक काम से जुड़े। जारशाही शासन के विरुद्ध गतिविधियों के कारण 1898 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। जेल और साइबेरिया के निर्वासन ने उनके राजनीतिक जीवन को नई दिशा दी। 1902 में वे साइबेरिया से भाग निकले और विदेश पहुंचकर रूसी सोशल डेमोक्रेटिक आंदोलन से जुड़ गए। इसी दौरान उन्होंने ‘ट्रॉट्स्की’ नाम अपनाया, जो आगे चलकर उनकी राजनीतिक पहचान बन गया।

Dinman Times ads 728-90

क्रांतिकारी राजनीति और स्थायी क्रांति का सिद्धांत

1903 में रूसी सोशल डेमोक्रेटिक वर्कर्स पार्टी के भीतर बोल्शेविक और मेंशेविक धाराओं के विभाजन के समय ट्रॉट्स्की ने शुरुआत में लेनिन के संगठनात्मक दृष्टिकोण का विरोध किया और मेंशेविक पक्ष के निकट रहे। हालांकि उनका राजनीतिक रास्ता किसी एक गुट तक सीमित नहीं रहा। 1905 की रूसी क्रांति के दौरान वे सेंट पीटर्सबर्ग सोवियत के प्रमुख नेताओं में उभरे। गिरफ्तारी और दोबारा साइबेरिया निर्वासन के बावजूद वे फिर भाग निकले और यूरोप में पत्रकारिता तथा राजनीतिक लेखन करते रहे।

ये भी पढ़े

कमला हैरिस की ऐतिहासिक जीत: 7 नवंबर 2020 को अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति-निर्वाचित
फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट चौथी बार राष्ट्रपति निर्वाचित: 7 नवंबर 1944 का ऐतिहासिक चुनाव
एलेनोर रूजवेल्ट: मानवाधिकारों की वैश्विक आवाज और संयुक्त राष्ट्र घोषणा की प्रमुख शिल्पकार
जैनेट रेनो: अमेरिका की पहली महिला अटॉर्नी जनरल और कानून के शासन की मुखर पैरोकार

ट्रॉट्स्की का सबसे चर्चित वैचारिक योगदान ‘स्थायी क्रांति’ (Permanent Revolution) का सिद्धांत था। उनका तर्क था कि रूस जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े समाज में लोकतांत्रिक परिवर्तन और समाजवादी क्रांति को अलग-अलग, लंबे चरणों में बांधकर नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार मजदूर वर्ग को सत्ता हासिल करने के बाद सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन आगे बढ़ाने होंगे और रूसी क्रांति की स्थिरता व्यापक अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी परिवर्तन से जुड़ी होगी। इस विचार ने उन्हें बाद में स्टालिन की ‘एक देश में समाजवाद’ की नीति का प्रमुख आलोचक बनाया।

1917 की रूसी क्रांति में निर्णायक भूमिका

1917 में जारशाही के पतन और फरवरी क्रांति के बाद ट्रॉट्स्की रूस लौटे। उस वर्ष वे बोल्शेविकों के साथ आए और पार्टी की केंद्रीय समिति में शामिल हुए। सितंबर 1917 में वे पेट्रोग्राद सोवियत के अध्यक्ष चुने गए। अक्टूबर क्रांति की तैयारियों में सैन्य क्रांतिकारी समिति के नेतृत्व के जरिए उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बोल्शेविकों द्वारा अंतरिम सरकार को हटाकर सत्ता संभालने के बाद वे नई सरकार में विदेश मामलों के जन-आयुक्त बने।

प्रथम विश्व युद्ध से रूस को बाहर निकालने के लिए ब्रेस्ट-लितोव्स्क में जर्मनी और उसके सहयोगियों के साथ हुई शांति वार्ताओं में ट्रॉट्स्की ने सोवियत प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। वे जर्मनी की कठोर शर्तें स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे। उनकी ‘न युद्ध, न शांति’ की रणनीति अंततः सफल नहीं हुई और सोवियत नेतृत्व को मार्च 1918 में संधि स्वीकार करनी पड़ी। इसके बाद ट्रॉट्स्की ने विदेश मामलों का पद छोड़ दिया।

Dinman Times ads 728-90

लाल सेना का संगठन और गृहयुद्ध

मार्च 1918 में ट्रॉट्स्की को युद्ध मामलों का जन-आयुक्त नियुक्त किया गया। उस समय नई बोल्शेविक सरकार को देश के भीतर विरोधी श्वेत सेनाओं, विदेशी हस्तक्षेप और बिखरती सैन्य व्यवस्था की चुनौती का सामना करना पड़ रहा था। ट्रॉट्स्की ने लाल सेना को एक नियमित, अनुशासित और संगठित सैन्य बल में बदलने के लिए व्यापक प्रयास किए। उन्होंने अनिवार्य भर्ती, कठोर अनुशासन, सैन्य प्रशिक्षण और पुराने जारशाही सैन्य अधिकारियों की विशेषज्ञता का उपयोग करने की नीति अपनाई।

पूर्व शाही अधिकारियों को लाल सेना में शामिल करने का निर्णय विवादास्पद था, इसलिए उनके साथ राजनीतिक आयुक्तों की निगरानी व्यवस्था भी विकसित की गई। ट्रॉट्स्की ने मोर्चों का दौरा किया, सैनिकों को संबोधित किया और सैन्य परिवहन तथा रसद को व्यवस्थित करने पर जोर दिया। गृहयुद्ध में बोल्शेविक सत्ता के टिके रहने में लाल सेना की भूमिका निर्णायक रही। इस सेना का निर्माण केवल एक व्यक्ति का काम नहीं था; अनेक सैनिकों, कमांडरों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने इसमें योगदान दिया। फिर भी ट्रॉट्स्की को इसके प्रमुख संस्थापकों और पहले प्रभावशाली संगठनकर्ताओं में गिना जाता है।

इस सैन्य सफलता का दूसरा पक्ष भी था। गृहयुद्ध के दौरान बोल्शेविक शासन ने राजनीतिक दमन, कठोर सैन्य उपायों और ‘रेड टेरर’ का सहारा लिया। ट्रॉट्स्की उस व्यवस्था के वरिष्ठ नेता थे और उनकी भूमिका को लेकर इतिहासकारों तथा राजनीतिक विचारधाराओं में तीखी बहस रही है। इसलिए उन्हें केवल सैन्य प्रतिभा के रूप में देखना अधूरा होगा; उनके राजनीतिक निर्णयों और क्रांतिकारी शासन की हिंसक नीतियों का आलोचनात्मक मूल्यांकन भी आवश्यक है।

लेनिन के बाद सत्ता-संघर्ष और स्टालिन से टकराव

1920 के दशक में व्लादिमीर लेनिन की सेहत बिगड़ने और 1924 में उनकी मृत्यु के बाद सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी में नेतृत्व का संघर्ष तेज हुआ। ट्रॉट्स्की को व्यापक वैचारिक प्रतिष्ठा और क्रांतिकारी अनुभव हासिल था, लेकिन पार्टी संगठन पर जोसेफ स्टालिन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा था। ट्रॉट्स्की ने पार्टी में बढ़ती नौकरशाही, आंतरिक लोकतंत्र के क्षरण और ‘एक देश में समाजवाद’ की नीति की आलोचना की।

Dinman Times ads 728-90

स्टालिन और उनके सहयोगियों के साथ संघर्ष में ट्रॉट्स्की अलग-थलग पड़ते गए। 1925 में उन्होंने युद्ध मामलों के जन-आयुक्त का पद छोड़ा। 1927 में उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया और 1929 में सोवियत संघ से निर्वासित कर दिया गया। इसके बाद उनका जीवन तुर्की, फ्रांस और नॉर्वे सहित विभिन्न देशों में निर्वासन के बीच गुजरा। 1936 में उन्हें मैक्सिको में शरण मिली, जहां वे लेखन और राजनीतिक गतिविधियों में लगे रहे।

लेखन, विचार और ट्रॉट्स्कीवाद

ट्रॉट्स्की एक सक्रिय लेखक और इतिहासकार भी थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में आत्मकथा ‘माय लाइफ’, ‘हिस्ट्री ऑफ द रशियन रिवोल्यूशन’ और ‘द रिवोल्यूशन बेट्रayed’ शामिल हैं। उन्होंने मार्क्सवाद की अंतरराष्ट्रीयतावादी व्याख्या प्रस्तुत की और स्टालिनवादी शासन की आलोचना की। उनके विचारों से विकसित राजनीतिक धारा को ‘ट्रॉट्स्कीवाद’ कहा जाता है। 1938 में उन्होंने चौथे इंटरनेशनल के गठन में भी भूमिका निभाई।

उनके लेखन में क्रांति, वर्ग-संघर्ष, राज्यसत्ता, युद्ध और समाजवादी आंदोलन की रणनीति पर विस्तृत विचार मिलते हैं। समर्थक उन्हें क्रांतिकारी अंतरराष्ट्रीयतावाद का प्रखर सिद्धांतकार मानते हैं, जबकि आलोचक उनके राजनीतिक व्यवहार में केंद्रीकरण, कठोरता और दमनकारी उपायों की ओर संकेत करते हैं।

मैक्सिको में हत्या और विरासत

20 अगस्त 1940 को मैक्सिको सिटी के कोयोआकान इलाके में अपने निवास पर ट्रॉट्स्की पर हमला किया गया। हमलावर रेमोन मर्काडर ने बर्फ काटने वाले हथियार से उनके सिर पर प्रहार किया। गंभीर रूप से घायल ट्रॉट्स्की की 21 अगस्त 1940 को मृत्यु हो गई। मर्काडर को गिरफ्तार कर सजा दी गई। इस हत्या को व्यापक रूप से स्टालिनवादी सोवियत सत्ता से जुड़े षड्यंत्र के रूप में देखा जाता है।

Dinman Times ads 728-90

लियोन ट्रॉट्स्की का जीवन रूसी क्रांति की उपलब्धियों, अंतर्विरोधों और त्रासदियों का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वे एक ओर लाल सेना के निर्माण और 1917 की क्रांति के प्रमुख रणनीतिकार थे, तो दूसरी ओर गृहयुद्धकालीन दमनकारी नीतियों से जुड़े नेता भी थे। स्टालिन के साथ उनका संघर्ष बीसवीं सदी के कम्युनिस्ट आंदोलन की दिशा और विभाजन को समझने की कुंजी है। उनकी जयंती पर उनका मूल्यांकन किसी एक राजनीतिक छवि में सीमित करने के बजाय इतिहास, विचारधारा, सत्ता और क्रांति के जटिल संबंधों के संदर्भ में किया जाना चाहिए।

TAGGED:लियोन ट्रॉट्स्की
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर पंजाब में कर्मभूमि एक्सप्रेस के 4 कोच में आग पंजाब में चलती कर्मभूमि एक्सप्रेस के 4 कोच में लगी आग, 1,500 यात्रियों की जान बची
अगली ख़बर बिली ग्राहम: जीवन, वैश्विक धर्मप्रचार और विरासत बिली ग्राहम: बीसवीं सदी के विश्वप्रसिद्ध ईसाई धर्मप्रचारक और प्रभावशाली लेखक
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

कमला हैरिस: अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति

कमला हैरिस की ऐतिहासिक जीत: 7 नवंबर 2020 को अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति-निर्वाचित

फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट: 1944 में चौथी राष्ट्रपति जीत

फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट चौथी बार राष्ट्रपति निर्वाचित: 7 नवंबर 1944 का ऐतिहासिक चुनाव

Eleanor Roosevelt

एलेनोर रूजवेल्ट: मानवाधिकारों की वैश्विक आवाज और संयुक्त राष्ट्र घोषणा की प्रमुख शिल्पकार

जैनेट रेनो

जैनेट रेनो: अमेरिका की पहली महिला अटॉर्नी जनरल और कानून के शासन की मुखर पैरोकार

सी. वी. रमन: रमन प्रभाव, नोबेल पुरस्कार और भारत रत्न

सी. वी. रमन: रमन प्रभाव की खोज से नोबेल पुरस्कार तक, भारतीय विज्ञान के महान पुरोधा

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • विदेश
  • धर्म
  • खेल
  • पटना
  • टेक्नोलॉजी

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?