Dinman Times
  • फोटो
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 22 अक्टूबर: अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस – सम्मान, समझ और सहज संवाद का संदेश
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - स्वास्थ्य - 22 अक्टूबर: अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस – सम्मान, समझ और सहज संवाद का संदेश

22 अक्टूबर: अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस – सम्मान, समझ और सहज संवाद का संदेश

प्रशांत कुमार
Last updated: अक्टूबर 22, 2026 2:14 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 5 दिन पहले
अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस
साझा करें

बोलने में लगने वाला थोड़ा अतिरिक्त समय किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता, योग्यता या विचारों की गुणवत्ता का पैमाना नहीं है। हकलाने वाले लोगों को अक्सर बातचीत, पढ़ाई, काम और सार्वजनिक जीवन में गलत धारणाओं या अधीरता का सामना करना पड़ता है। इसी सोच को बदलने और समाज में समझ, सम्मान तथा समावेश बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 22 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस (International Stuttering Awareness Day—ISAD) मनाया जाता है।

कब शुरू हुआ यह दिवस?

अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस 1998 से हर साल 22 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य हकलाने के बारे में विश्वसनीय जानकारी फैलाना, इससे जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों को चुनौती देना और हकलाने वाले लोगों, उनके परिवारों, विशेषज्ञों तथा शोधकर्ताओं के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना है। दुनिया भर में इस अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम, व्यक्तिगत अनुभवों की साझेदारी और ऑनलाइन चर्चाएं आयोजित की जाती हैं।

क्या है हकलाना?

हकलाना बोलने के प्रवाह से जुड़ी एक स्थिति है। इसमें व्यक्ति कुछ ध्वनियों या शब्दांशों को दोहरा सकता है, किसी ध्वनि को खींच सकता है या बोलते समय क्षणिक रुकावट महसूस कर सकता है। इसका अनुभव हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। कई बच्चों में यह बोलना और भाषा सीखने के शुरुआती वर्षों में दिखाई देता है; कुछ लोगों में यह आगे भी बना रह सकता है।

हकलाने का कारण केवल घबराहट, आत्मविश्वास की कमी या खराब परवरिश मानना सही नहीं है। इसके पीछे जटिल विकासात्मक और जैविक कारक हो सकते हैं। तनाव या दबाव कुछ परिस्थितियों में बोलने के अनुभव को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि हकलाना व्यक्ति की गलती है।

Dinman Times ads 728-90

भ्रांतियों से बाहर निकलना जरूरी

  • भ्रांति: हकलाने वाला व्यक्ति जानता नहीं कि क्या कहना है। सच्चाई: अक्सर व्यक्ति को अपने शब्द पता होते हैं, लेकिन उन्हें सहज प्रवाह में बोलने में कठिनाई हो सकती है।
  • भ्रांति: हकलाना बुद्धिमत्ता या क्षमता की कमी का संकेत है। सच्चाई: हकलाना किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता, प्रतिभा या पेशेवर योग्यता का माप नहीं है।
  • भ्रांति: व्यक्ति को बस शांत होकर या अधिक कोशिश करके बोलना चाहिए। सच्चाई: ऐसा कहना अनजाने में दबाव बढ़ा सकता है; सम्मानजनक माहौल और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ सहायता अधिक उपयोगी हैं।
  • भ्रांति: हर व्यक्ति का अनुभव एक जैसा होता है। सच्चाई: हकलाने की प्रकृति, परिस्थितियां और व्यक्ति की प्राथमिकताएं अलग-अलग हो सकती हैं।

हम कैसे बनाएं अधिक संवेदनशील समाज?

  • व्यक्ति की बात ध्यान से सुनें और उसे अपनी गति से बोलने का समय दें।
  • उसके वाक्य पूरे न करें और बिना पूछे बोलने का तरीका सुधारने की कोशिश न करें।
  • बातचीत के दौरान सामान्य, सहज नजर-संपर्क और सम्मान बनाए रखें; असहजता या दया का प्रदर्शन न करें।
  • स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थल पर मजाक, नकल या भेदभाव को रोकें और सभी को भागीदारी का समान अवसर दें।
  • यदि कोई व्यक्ति अपनी जरूरत या पसंद बताए, तो उसी के अनुरूप संवाद करें। हर व्यक्ति से एक ही तरह की मदद की अपेक्षा न रखें।

विशेषज्ञ सहायता कब उपयोगी हो सकती है?

यदि हकलाना व्यक्ति की रोजमर्रा की बातचीत, पढ़ाई, काम या सामाजिक भागीदारी को प्रभावित कर रहा हो, या बच्चा बोलने को लेकर परेशान हो, तो स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट (वाक् एवं भाषा विशेषज्ञ) से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। विशेषज्ञ व्यक्ति की जरूरत और उम्र के अनुसार आकलन करके उपयुक्त सहायता के विकल्प समझा सकते हैं। बच्चों में हकलाने को लेकर चिंता होने पर केवल इंतजार करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ या संबंधित विशेषज्ञ से चर्चा करना उचित है। सहायता का उद्देश्य हर व्यक्ति को एक ही ढंग से बोलने के लिए मजबूर करना नहीं, बल्कि संवाद और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

ये भी पढ़े

मुंगेर में सीने के दर्द से परेशान तीन बच्चों की मां ने जहर खाया, सदर अस्पताल में इलाज जारी
न्यूरोलॉजी में AI की बढ़ती भूमिका: ऑटोइम्यून बीमारियों के निदान और निगरानी में नई उम्मीद
2050 तक दुनिया में हर साल 2.47 करोड़ नए डिमेंशिया मामले संभव, महिलाओं में दर अधिक
फ्रांस में शमोंडा वायरस का पहला मानव संक्रमण, WHO की पुष्टि; आम लोगों के लिए फिलहाल जोखिम नहीं

जागरूकता एक दिन नहीं, रोज की जिम्मेदारी

अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस हमें याद दिलाता है कि प्रभावी संवाद केवल धाराप्रवाह बोलने का नाम नहीं है; इसमें सुनने वाले का धैर्य, सम्मान और समझ भी शामिल हैं। हकलाने वाले लोगों की कहानियों को सुनना, उनके अनुभवों को गंभीरता से लेना और उन्हें अपनी शर्तों पर भाग लेने का अवसर देना, जागरूकता को वास्तविक बदलाव में बदल सकता है।

संदेश साफ है: किसी व्यक्ति को उसकी बोलने की गति से नहीं, उसकी बात और व्यक्तित्व से पहचानें। जब हम बीच में टोकने के बजाय सुनते हैं और निर्णय देने के बजाय समझने की कोशिश करते हैं, तभी एक अधिक समावेशी समाज बनता है।

TAGGED:Health NewsHealth TipsWorld News
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर पटना सिटी में कुंदन कुमार की हत्या पटना सिटी में विसर्जन जुलूस के बीच खूनी वारदात, 20 साल के कुंदन की हत्या; गाना बजाने को लेकर हुआ था विवाद
अगली ख़बर पटना में KFC, बारबेक्यू नेशन और पिज्जा हट पर कार्रवाई पटना में नामी फूड चेन के किचन पर सवाल! KFC, बारबेक्यू नेशन और पिज्जा हट में मिलीं गड़बड़ियां, 14 दिन का अल्टीमेटम
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

पावापुरी महोत्सव: राज्यपाल ने स्वीकारा निमंत्रण

पावापुरी महोत्सव में जुटेंगे दिग्गज, राज्यपाल ने स्वीकारा निमंत्रण

भागलपुर में शिक्षकों की अटेंडेंस पर सख्ती, होगी कार्रवाई

हर रोज पकड़े जाएंगे गायब शिक्षक, उसी दिन होगी कार्रवाई

बेगूसराय में आर्ट ऑफ लिविंग के नए केंद्र का आयोजन

बेगूसराय में आर्ट ऑफ लिविंग के नए केंद्र का भव्य आयोजन, 300 लोग हुए शामिल

नवादा में पति की हत्या के मामले में पत्नी को उम्रकैद

पति की हत्या के मामले में पत्नी को उम्रकैद, 20 हजार रुपये जुर्माना

वैशाली में दो हजार रुपये नहीं देने पर युवक से मारपीट

दो हजार रुपये नहीं देने पर युवक से मारपीट, सोने की हनुमानी और नकदी छीनने का आरोप

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • विदेश
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • बिज़नेस

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?