25 अक्टूबर 1983 को अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के आदेश पर अमेरिकी सेना ने कैरेबियाई द्वीपीय देश ग्रेनाडा में सैन्य अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई को ऑपरेशन अर्जेंट फ्यूरी (Operation Urgent Fury) नाम दिया गया। शीत युद्ध के दौर में हुई इस कार्रवाई ने छोटे कैरेबियाई देश की राजनीति, क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका की विदेश नीति को अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया।
ग्रेनाडा में संकट की पृष्ठभूमि
ग्रेनाडा 1974 में ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ था। 1979 में मॉरिस बिशप के नेतृत्व में न्यू ज्वेल मूवमेंट ने सत्ता संभाली। उनकी सरकार ने सामाजिक कार्यक्रमों और क्यूबा तथा अन्य वामपंथी देशों के साथ संबंधों पर जोर दिया। अक्टूबर 1983 में बिशप और उनके समर्थकों के बीच सत्ता संघर्ष तेज हुआ। बिशप को हिरासत में लिए जाने के बाद 19 अक्टूबर को उन्हें और कई अन्य लोगों को मार दिया गया। इसके बाद देश में सैन्य शासन और कर्फ्यू की स्थिति बनी।
ऑपरेशन अर्जेंट फ्यूरी क्यों शुरू हुआ?
अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई के पक्ष में अमेरिकी नागरिकों—विशेषकर ग्रेनाडा के सेंट जॉर्ज़ विश्वविद्यालय में पढ़ रहे विद्यार्थियों—की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और पूर्वी कैरेबियाई देशों की अपील को प्रमुख कारण बताया। अभियान से पहले ग्रेनाडा में क्यूबा के निर्माणकर्मी और सैन्य कर्मी भी मौजूद थे, जबकि वहाँ बन रहे हवाई अड्डे को लेकर वॉशिंगटन में सुरक्षा संबंधी चिंताएँ थीं। इन कारणों की व्याख्या और कार्रवाई की वैधता को लेकर उस समय भी मतभेद रहे।
25 अक्टूबर को सैन्य कार्रवाई
25 अक्टूबर को अमेरिकी सैनिकों ने ग्रेनाडा में उतरकर हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और अन्य रणनीतिक स्थानों पर नियंत्रण पाने का अभियान शुरू किया। अमेरिका के साथ कुछ कैरेबियाई देशों की सेनाएँ भी शामिल थीं। ग्रेनाडा और क्यूबा की ओर से प्रतिरोध हुआ और लड़ाई कई दिनों तक चली। अमेरिकी बलों ने अंततः प्रमुख ठिकानों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया तथा वहाँ मौजूद अमेरिकी विद्यार्थियों को निकालने की कार्रवाई की। अभियान के दौरान सैनिकों और नागरिकों की मौतें हुईं; हताहतों के आँकड़े स्रोत और गणना के आधार पर अलग-अलग मिलते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और विवाद
अमेरिकी सरकार ने इस कार्रवाई को नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक बताया। वहीं कई देशों और अंतरराष्ट्रीय आलोचकों ने इसे ग्रेनाडा की संप्रभुता तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर में बल प्रयोग पर लगी सीमाओं के संदर्भ में चुनौती दी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बाद में प्रस्ताव पारित कर आक्रमण को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप पर खेद व्यक्त किया। इस प्रकार ऑपरेशन अर्जेंट फ्यूरी शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेपों की चर्चा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया।
ग्रेनाडा पर आक्रमण की ऐतिहासिक विरासत
ऑपरेशन अर्जेंट फ्यूरी के बाद ग्रेनाडा में राजनीतिक व्यवस्था बदली और 1984 में आम चुनाव हुए। अमेरिका ने अभियान को सफल बचाव और स्थिरीकरण की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि आलोचकों ने इसकी वैधता, नागरिकों पर प्रभाव और छोटे देशों की संप्रभुता से जुड़े प्रश्न उठाए। 25 अक्टूबर 1983 की घटना यह याद दिलाती है कि शीत युद्ध की भू-राजनीति में स्थानीय सत्ता संघर्ष भी बड़ी शक्तियों के सैन्य हस्तक्षेप और व्यापक अंतरराष्ट्रीय विवाद का कारण बन सकता था।
