मुंगेर पुलिस के वेतन-भत्तों से जुड़े भुगतान की चार साल की जांच पूरी हो गई है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर मई 2022 से मई 2026 तक के भुगतान और ई-एचआरएमएस से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल की गई। जांच टीम ने वेतन तथा अन्य मदों में भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद किसी तरह की त्रुटि नहीं मिलने की रिपोर्ट सौंपी है।
अन्य जिलों में गड़बड़ी की आशंका के बाद हुई जांच
पुलिस मुख्यालय के स्तर पर कुछ जिलों के भुगतान संबंधी आंकड़ों में संभावित वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद अन्य जिलों के रिकॉर्ड की भी जांच कराने का निर्देश दिया गया था। इसी क्रम में मुंगेर पुलिस के भुगतान का रिकॉर्ड खंगाला गया।
ई-एचआरएमएस के आंकड़ों के अवलोकन के दौरान कुछ कार्यालयों में निर्धारित सीमा से अधिक भुगतान, एक ही कार्यालय से दोबारा राशि जारी होने और नियमों के विपरीत निकासी जैसी संभावित गड़बड़ियों के संकेतों की बात सामने आई थी। इसके बाद संबंधित अभिलेखों का सत्यापन किया गया।
लखीसराय, शेखपुरा और जमुई की टीम ने की जांच
मुंगेर के एसपी सैयद इमरान मसूद के अनुसार, डीआइजी के निर्देशन में जांच टीम गठित की गई थी। इस टीम में लखीसराय, शेखपुरा और जमुई की टीम शामिल थी। जांच दल ने मुंगेर पुलिस के वेतन और अन्य मदों में हुए भुगतान से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल की।

जांच के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी विवरणों का सत्यापन किया गया। एसपी के अनुसार, जांच में किसी तरह की त्रुटि नहीं मिली। इसके बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
मुंगेर पुलिस को मिली राहत
जांच रिपोर्ट में भुगतान संबंधी गड़बड़ी नहीं मिलने से मुंगेर पुलिस को फिलहाल राहत मिली है। मुख्यालय के निर्देश पर की गई यह पड़ताल वेतन और भत्तों से जुड़े भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का हिस्सा थी।
पुलिस विभाग में ई-एचआरएमएस डेटा के आधार पर भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान जिन संभावित विसंगतियों की जांच की जा रही थी, उनमें मुंगेर के मामले में जांच टीम ने अभिलेखों को सही पाया।
चार वर्षों के रिकॉर्ड की हुई पड़ताल
जांच का दायरा मई 2022 से मई 2026 तक का रहा। इस अवधि में वेतन और अन्य मदों में किए गए भुगतानों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। रिपोर्ट जमा होने के बाद मुंगेर पुलिस के लिए इस मामले में फिलहाल किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।

