बिहार के बोधगया में दीपावली का उत्सव इस बार अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहभागिता का भी अवसर बना। मैक्सिको से आए 10 सदस्यीय शिष्टमंडल ने भारतीय परंपरा के अनुसार स्थानीय बच्चों और शिक्षकों के साथ दीपावली मनाई। विदेशी मेहमानों ने दीप जलाए, आतिशबाजी की, मिठाइयां खाईं और एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर खुशियां साझा कीं। भारतीय संस्कृति और त्योहार को करीब से अनुभव करने पहुंचे दल के सदस्यों ने इस आयोजन को यादगार बताया।
पुलिस ने शुरू की जांच
दीपावली के पर्व और भारतीय परंपराओं को समझने के उद्देश्य से बोधगया पहुंचे शिष्टमंडल ने सबसे पहले विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में भगवान बुद्ध के दर्शन किए। वहां उन्होंने शांति का संदेश ग्रहण किया। इसके बाद सभी सदस्य बकरौर स्थित ज्ञान ज्योति रूरल डेवलपमेंट वेलफेयर ट्रस्ट पहुंचे। संस्था के परिसर में शिक्षकों ने अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
घटना के बाद की कार्रवाई
संस्था के शिक्षकों ने विदेशी मेहमानों को माला पहनाई और तिलक लगाया। बच्चों ने भी गर्मजोशी के साथ उनका अभिवादन किया। स्वागत के बाद अतिथियों ने बच्चों और शिक्षकों के साथ दीपावली का उत्सव मनाया। सभी ने मिलकर दीप जलाए और आतिशबाजी की। रंग-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी गईं। मिठाइयां बांटकर पर्व की खुशियां साझा की गईं। आयोजन में माता लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना भी की गई।
मामले में सामने आए तथ्य
मैक्सिको से आए मौरिसिको ओरनेक्स, जुलिसा मोंटोया, अलेजेंडर माउस और कार्ला ओवनलस ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अब तक दीपावली के बारे में उन्होंने सुना था और किताबों में पढ़ा था, लेकिन भारत आकर इस पर्व को प्रत्यक्ष रूप से मनाने का अवसर मिला। उनके अनुसार, बोधगया में भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नजदीक से जानना खास अनुभव रहा।

जांच के अहम पहलू
विदेशी मेहमानों ने बच्चों के साथ दीप जलाने, पटाखे फोड़ने और मिठाइयां खाने को आनंददायक बताया। उन्होंने दीपावली को सुंदर और खुशियों से भरा त्योहार कहा। अतिथियों ने भारतीय संस्कृति, स्थानीय लोगों के अपनापन और बच्चों के उत्साह की सराहना की। उनके लिए यह यात्रा केवल किसी त्योहार में शामिल होने तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय परंपराओं को लोगों के साथ मिलकर अनुभव करने का अवसर भी बनी।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
आयोजन में भारत और मैक्सिको के बीच सांस्कृतिक मैत्री की झलक देखने को मिली। अलग देश से आए अतिथियों ने स्थानीय संस्था के बच्चों और शिक्षकों के साथ मिलकर पर्व मनाया। इस सहभागिता ने यह दिखाया कि त्योहारों के माध्यम से अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग एक-दूसरे की परंपराओं को समझने का अवसर पा सकते हैं। बोधगया का धार्मिक और सांस्कृतिक परिवेश इस अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
परिवार और स्थानीय स्तर पर असर
कार्यक्रम के दौरान संस्था के चेयरमैन रंजन कुमार, गाइड विक्की कुमार, शिक्षक नीतू कुमारी, जितेंद्र कुमार और अन्य लोग मौजूद रहे। संस्था की ओर से अतिथियों का स्वागत किया गया और बच्चों ने उत्सव में भाग लिया। शिष्टमंडल के कुल 10 सदस्यीय होने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण में दल के सभी सदस्यों के नाम नहीं दिए गए हैं, इसलिए केवल साझा किए गए नामों का ही उल्लेख किया गया है।
