सहारनपुर: पुराने नोट बदलवाने और एंटीक वस्तुओं के कारोबार में मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर बिहार के दो कारोबारियों से 21 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने पहले एंटीक वस्तुओं का संग्रह बेचने का भरोसा दिलाया और बाद में दो हजार रुपये के पुराने नोटों की बड़ी खेप बदलवाने के नाम पर रकम ऐंठ ली। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपित शाहनवाज को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से 500 रुपये के छह जाली नोट, यानी कुल 3,000 रुपये की नकली करेंसी बरामद होने की बात पुलिस ने कही है।
पुलिस के अनुसार, आरोपित पर पहले से इनाम भी घोषित था। मामले की जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और पीड़ितों से रकम लेने के बाद उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
एंटीक कारोबार के नाम पर शुरू हुई बातचीत
मामले की शुरुआत बिहार के बक्सर जिले के दुबोली गांव निवासी कृष्णाकांत दुबे से संपर्क के बाद हुई। वह खेतीबाड़ी के साथ एंटीक वस्तुओं की खरीद-बिक्री से जुड़े हैं। उनकी पहचान बनारस निवासी गुड्डू के माध्यम से सहारनपुर के मिर्जापुर पोल निवासी शाहनवाज से हुई। आरोप है कि शाहनवाज ने अपने पास एंटीक वस्तुओं का संग्रह होने और उन्हें अच्छे दाम पर बेचने का प्रस्ताव रखा।
इस प्रस्ताव के भरोसे कृष्णाकांत दो-तीन बार सहारनपुर पहुंचे, लेकिन उन्हें बताए गए सामान उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद वह अपने मित्र मनुरंजन कुमार सिन्हा के साथ दोबारा सहारनपुर पहुंचे। यहीं से कथित ठगी की कहानी ने दूसरा रूप ले लिया। आरोप है कि शाहनवाज ने एंटीक कारोबार के साथ एक अन्य काम में भी भारी मुनाफे का लालच दिया।

वीडियो में दिखाईं नोटों की गड्डियां
कुछ समय बाद शाहनवाज ने अपने परिचित अनिल कुमार पांडेय के माध्यम से दोनों कारोबारियों को एक वीडियो भेजा। इसमें बक्सों में दो-दो हजार रुपये के नोटों की गड्डियां दिखाई गई थीं। आरोप है कि वीडियो के आधार पर शाहनवाज ने दावा किया कि उसके पास करीब दो हजार करोड़ रुपये की पुरानी करेंसी मौजूद है। उसने यह भरोसा दिलाया कि करेंसी बदलवाने की व्यवस्था होने पर एंटीक वस्तुओं के कारोबार में भी अच्छा मुनाफा कराया जाएगा।
इसके बाद सहारनपुर के होटल सूर्या लोक में कथित तौर पर शाहनवाज, दिल्ली निवासी विशाल त्यागी और एक अन्य व्यक्ति ने नोटों की गड्डियां दिखाईं। आरोपितों ने करेंसी मंगाने और उसे लोड कराकर भेजने के नाम पर 15 से 16 लाख रुपये के खर्च की बात कही। इसके बाद पीड़ितों से अलग-अलग चरणों में नकदी ली गई। शिकायत के मुताबिक, तीन बार पांच-पांच लाख रुपये और एक बार छह लाख रुपये दिए गए। इस तरह कुल रकम 21 लाख रुपये तक पहुंच गई।
500, 200 और 100 रुपये के नोटों का भी दावा
मामले में आरोप है कि बाद में आरोपितों ने दो हजार रुपये के नोटों के अलावा 500, 200 और 100 रुपये के नोट होने की बात भी कही। इससे पीड़ितों को भरोसे में रखने की कोशिश की गई। हालांकि, रकम लेने के बाद जिस तरह की कारोबारी डील का भरोसा दिया गया था, वह आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
25 हजार का इनामी था मुख्य आरोपित
एसपी सिटी व्योम बिंदल के अनुसार, सदर बाजार थाना पुलिस ने शाहनवाज, विशाल त्यागी और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने शाहनवाज को शुक्रवार शाम भट्टा कालोनी तिराहा से गिरफ्तार किया। उसके पास से 3,000 रुपये की जाली करेंसी बरामद की गई। पुलिस के मुताबिक, मिर्जापुर थाने से आरोपित पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कथित ठगी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या रही। साथ ही नकली नोट कहां से आए और आरोपितों ने पीड़ितों को भरोसे में लेने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
पुराने नोटों के नाम पर ठगी से सावधान रहने की जरूरत
इस मामले ने यह भी दिखाया है कि पुराने नोटों या किसी असामान्य करेंसी सौदे में बड़े मुनाफे का लालच किस तरह ठगी का माध्यम बन सकता है। खासकर जब किसी सौदे में पहले से बड़ी रकम नकद मांगी जाए और उसके बदले असाधारण मुनाफे का दावा किया जाए, तो दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच जरूरी है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और जांच आगे जारी है।
