कलेर, अरवल। करीब 10 करोड़ रुपये की कथित साइबर ठगी से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश की रायगढ़ पुलिस ने बिहार के अरवल जिले से एक पंचायत सचिव को गिरफ्तार किया है। शनिवार रात हुई इस कार्रवाई में पटना एसटीएफ और कलेर थाना पुलिस ने भी सहयोग किया। गिरफ्तार पंचायत सचिव की पहचान टोनी कुमार के रूप में हुई है, जो कलेर प्रखंड में कार्यरत था।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में एक साल के दौरान टोनी कुमार द्वारा 132 अलग-अलग सिम कार्ड इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। रायगढ़ थाने में इस संबंध में कांड संख्या 282/26 दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश पुलिस उसे अपने साथ ले गई।
पटना एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की मदद से कार्रवाई
कलेर के प्रभारी थानाध्यक्ष गुड्डू कुमार ने बताया कि रायगढ़ पुलिस साइबर अपराध के मामले में पंचायत सचिव टोनी कुमार को गिरफ्तार कर ले गई है। वहीं, कलेर के बीडीओ सुशील कुमार के मुताबिक, शनिवार रात मध्य प्रदेश पुलिस और पटना एसटीएफ की टीम गिरफ्तारी के लिए प्रखंड पहुंची थी।
इसके बाद कलेर थाना पुलिस के सहयोग से कार्रवाई पूरी की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की जांच के लिए रायगढ़ पुलिस अपने साथ ले गई।
एक साल में 132 सिम कार्ड के इस्तेमाल की जांच
मामले में सामने आए 132 अलग-अलग सिम कार्ड के इस्तेमाल को जांच का अहम पहलू माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया और कथित साइबर ठगी से इनका क्या संबंध है।
पुलिस की जांच में मोबाइल नंबरों के अलावा बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा सकती है।
कलेर में पंचायत सचिव के रूप में था तैनात
टोनी कुमार कलेर प्रखंड में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत था और प्रखंड कर्मियों के आवास में रह रहा था। स्थानीय स्तर पर उसके काले रंग की थार गाड़ी और महंगे मोबाइल फोन के इस्तेमाल की भी चर्चा है।
एक सरकारी पद पर कार्यरत व्यक्ति की कथित तौर पर बड़े साइबर ठगी मामले में गिरफ्तारी के बाद प्रखंड में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
साइबर नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही जांच एजेंसियां
करीब 10 करोड़ रुपये की कथित साइबर ठगी से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसियां मोबाइल सिम, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। पुलिस जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
फिलहाल, मामले में आगे की जांच रायगढ़ पुलिस कर रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।