डेस्क: देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक यानी Anti Paper Leak Bill 2026, पर चर्चा हुई। सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने के बाद परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों और पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।
केंद्र सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य पर असर डाला है। ऐसे में मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन आवश्यक था। सरकार के अनुसार, नए प्रावधान जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार देंगे और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का रास्ता साफ करेंगे।
लोकसभा में चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि पेपर लीक जैसे अपराधों को होने से पहले रोकना भी है। इसके लिए जांच प्रक्रिया को मजबूत करने, मामलों का तेजी से निपटारा करने और संगठित अपराध के रूप में पेपर लीक नेटवर्क पर कार्रवाई करने जैसे प्रावधानों पर जोर दिया गया है।
हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्षी दलों का कहना था कि केवल नया कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने सरकार से पूछा कि पिछले वर्षों में हुए बड़े पेपर लीक मामलों में कितने आरोपियों को सजा मिली और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार की ठोस योजना क्या है।
संसद में बहस के दौरान कई सांसदों ने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। लाखों युवा वर्षों तक मेहनत कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और जब पेपर लीक की घटनाएं सामने आती हैं तो उनका भरोसा पूरी व्यवस्था से उठने लगता है। ऐसे में एक प्रभावी कानून के साथ-साथ उसके सख्ती से पालन की भी जरूरत है।
सरकार ने अपने पक्ष में कहा कि संशोधित कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही ऐसे मामलों में शामिल संगठित गिरोहों और आर्थिक लाभ कमाने वाले लोगों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी और छात्रों का भरोसा बढ़ेगा।
वहीं, संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे के अलावा छात्र आंदोलनों और शिक्षा से जुड़े अन्य विषयों को लेकर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कई बार सदन में हंगामे की स्थिति बनी, जिसके कारण कार्यवाही भी प्रभावित हुई। इसके बावजूद सरकार ने साफ किया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार उसके प्रमुख एजेंडे में शामिल है।