बेटी के प्रेम विवाह से आहत पिता ने पुतला बनाकर निकाली अर्थी, गांव में घुमाने के बाद किया दाह संस्कार; बोले- बेटी ने परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई
पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के नगर प्रखंड क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों, सामाजिक सोच और अंतरजातीय विवाह को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। गंगेली पंचायत के चपय गांव में एक पिता ने अपनी ही जीवित बेटी का प्रतीकात्मक रूप से ‘अंतिम संस्कार’ कर दिया।
बेटी ने परिवार की इच्छा के खिलाफ गांव के ही एक युवक से प्रेम विवाह किया था। इससे नाराज पिता ने बेटी का पुतला तैयार कराया, उसकी अर्थी निकाली और पूरे गांव में घुमाने के बाद उसका दाह संस्कार कर दिया।
बताया गया है कि चपय गांव निवासी मनोज गोस्वामी की बेटी रिया कुमारी ने गांव के ही रहने वाले दिलीप पासवान के पुत्र मिलन पासवान के साथ भागकर शादी कर ली।

दोनों के विवाह की जानकारी परिवार को मिलने के बाद घर में नाराजगी का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि यह विवाह अलग-अलग जातियों के बीच हुआ, जिसे लेकर रिया के पिता मनोज गोस्वामी काफी आहत थे।
बेटी के इस फैसले को स्वीकार करने के बजाय पिता ने उससे अपना रिश्ता खत्म करने का प्रतीकात्मक फैसला लिया। इसके लिए उन्होंने ग्रामीणों की मौजूदगी में बेटी का पुतला तैयार कराया।
इसके बाद पुतले को अर्थी पर रखा गया और अंतिम यात्रा की तरह गांव में घुमाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इसके बाद पुतले को मुखाग्नि देकर उसका दाह संस्कार कर दिया गया।
‘मेहनत से पढ़ाया-लिखाया, लेकिन बेटी ने परिवार की बात नहीं मानी’
बताया जाता है कि मनोज गोस्वामी अपनी बेटी की पढ़ाई-लिखाई को लेकर काफी गंभीर थे। उनका कहना है कि उन्होंने मेहनत करके बेटी को पढ़ाया-लिखाया और उसके बेहतर भविष्य के लिए प्रयास किया।
पिता के मुताबिक, उन्हें उम्मीद थी कि बेटी परिवार की इच्छा और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने जीवन का फैसला करेगी।
लेकिन रिया ने परिवार की सहमति के बिना मिलन पासवान से शादी कर ली। बेटी के इस फैसले से पिता खुद को ठगा हुआ और बेहद आहत महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि बेटी के इस कदम से परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
इसी नाराजगी में उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से बेटी से अपना रिश्ता खत्म करने के लिए उसका पुतला बनाकर अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।
हालांकि, यहां किया गया दाह संस्कार बेटी का वास्तविक अंतिम संस्कार नहीं था। रिया जीवित है और यह पूरी कार्रवाई उसके पुतले के साथ प्रतीकात्मक रूप से की गई। पिता की ओर से इसे बेटी से संबंध खत्म करने के तरीके के तौर पर देखा जा रहा है।
गांव में चर्चा का विषय बना मामला
चपय गांव में हुई इस घटना के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा हो रही है। एक तरफ बेटी का अपनी पसंद से विवाह करना और दूसरी तरफ पिता का इस तरह सार्वजनिक रूप से बेटी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
घटना के दौरान ग्रामीणों की मौजूदगी भी रही। पुतले की अर्थी को गांव में घुमाया गया और इसके बाद दाह संस्कार की रस्म पूरी की गई। इस दौरान राधेश्याम गोस्वामी, शशिधर गिरी, अनिल गोस्वामी, डबलू यादव, नवीन गोस्वामी, राजाराम गोस्वामी और बिशन देव यादव समेत गांव के कई लोग मौजूद बताए गए हैं।
प्रेम विवाह के बाद परिवार से दूरी का संदेश
इस घटना को पिता की ओर से बेटी के फैसले के प्रति अपनी नाराजगी जताने और उससे संबंध खत्म करने के सार्वजनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
आम तौर पर परिवार में शादी को लेकर मतभेद होने पर बातचीत या रिश्तेदारों के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश की जाती है, लेकिन चपय गांव में सामने आया यह तरीका काफी अलग और चौंकाने वाला है।
बेटी के प्रेम विवाह से नाराज पिता द्वारा उसके पुतले की अर्थी निकालकर दाह संस्कार किए जाने की बात ने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है।
पिता का कहना है कि उन्होंने बेटी की परवरिश और पढ़ाई में अपनी पूरी मेहनत लगाई, लेकिन उसके विवाह के फैसले ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया।
फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि जब संतान अपने जीवनसाथी का चुनाव खुद करती है और परिवार उस फैसले को स्वीकार नहीं करता, तो रिश्तों के बीच पैदा होने वाली दूरी किस हद तक जा सकती है।
चपय गांव की यह घटना इसी टूटते पारिवारिक रिश्ते का एक बेहद असामान्य और प्रतीकात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।