वाराणसी नगर निगम ने ध्वस्तीकरण में किसी भूमिका से किया इनकार; जर्जर मकान को लेकर परिजनों के बीच हुआ था विवाद, रियाज वाले कमरे को संग्रहालय में बदलने की योजना पर भी चर्चा
वाराणसी। भारत रत्न से सम्मानित शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पैतृक मकान को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई की खबरों के बीच वाराणसी नगर निगम ने स्थिति स्पष्ट की है। निगम के मुताबिक, मकान को गिराने की कार्रवाई उसकी ओर से नहीं की गई है। इमारत पुरानी और जर्जर हो चुकी है, इसलिए परिवार के एक पक्ष ने अपने स्तर पर इसे गिराकर नया निर्माण कराने का फैसला लिया है। इस बीच मकान के स्वामित्व और निर्माण को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच विवाद भी सामने आया था।
जर्जर मकान को गिराने पर परिवार में हुआ था विवाद
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का पैतृक मकान वाराणसी के सराय हड़हा इलाके की भीखाशाह गली में स्थित है। मकान की हालत लंबे समय से खराब बताई जा रही है। इसी पुराने ढांचे को हटाकर नए सिरे से निर्माण कराने की तैयारी के दौरान परिवार के दो पक्ष आमने-सामने आ गए।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 1 नवंबर को जब मजदूर मकान के हिस्से को गिराने पहुंचे, तो परिवार के एक सदस्य ने आपत्ति जताई और निर्माण से जुड़े दस्तावेज दिखाने की मांग की। विवाद बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को चौकी बुलाकर संपत्ति से जुड़े कागजात देखे। पुलिस ने शांति बनाए रखने और किसी भी आपत्ति के समाधान के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी।
नगर निगम बोला- हमारी ओर से नहीं हुई तोड़फोड़
मामले पर वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि निगम ने इस मकान को नहीं गिराया है। उनके अनुसार, नगर निगम ने शहर की प्रमुख हस्तियों की विरासत को संरक्षित करने के लिए एक योजना तैयार की थी। इसमें संबंधित हस्तियों के घरों तक जाने वाली गलियों का विकास और उनके आवास के किसी हिस्से को संग्रहालय के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव शामिल था।

श्रीवास्तव के मुताबिक, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के परिवार से भी संग्रहालय बनाने को लेकर बातचीत हुई थी, लेकिन परिवार की ओर से इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं मिली। इसके बाद परिवार ने मकान की जर्जर हालत का हवाला देते हुए अपने स्तर पर ढांचा गिराकर पुनर्विकास कराने की इच्छा जताई। निगम ने साफ किया कि निजी संपत्ति पर मालिकों की सहमति के बिना वह निर्माण या बदलाव नहीं कर सकता।
चौक थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला ने भी बताया कि मकान पुराना और जर्जर है। संपत्ति को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच विवाद हुआ था, लेकिन अब मामला सुलझने की जानकारी दी गई है।
संग्रहालय बनाने की योजना फिर चर्चा में
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जिस कमरे में बैठकर शहनाई का रियाज करते थे, उसे संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना पहले भी सामने आ चुकी है। जून 2026 में नगर निगम की ओर से इस कमरे को संग्रहालय बनाने और आसपास के क्षेत्र के विकास की योजना की जानकारी दी गई थी।
नवंबर की शुरुआत में परिवार के सदस्य मोहम्मद सिब्तैन ने भी बताया था कि मकान के पुनर्निर्माण के बाद नए भवन में उस्ताद की शहनाइयों, पुरस्कारों और निजी वस्तुओं को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय बनाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि परिवार के बीच संपत्ति को लेकर उठा विवाद सुलझ गया है और शुरुआती काम शुरू हो गया है। सिब्तैन के मुताबिक, नए भवन के भूतल का एक हिस्सा संग्रहालय के लिए देने की योजना है।

हालांकि, नगर निगम और परिवार की ओर से सामने आए बयानों में संग्रहालय की व्यवस्था को लेकर अलग-अलग बातें हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि रियाज वाला कमरा ज्यों का त्यों सुरक्षित रख लिया गया है या संग्रहालय का निर्माण अंतिम रूप से तय हो चुका है।
उस्ताद की विरासत को सहेजने का सवाल
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का यह मकान केवल एक निजी संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी संगीत यात्रा और काशी से उनके गहरे जुड़ाव की यादों से भी जुड़ा है। ऐसे में इसके पुनर्निर्माण के साथ उनकी सांस्कृतिक विरासत को किस तरह सुरक्षित रखा जाएगा, यह अहम सवाल है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मकान पर सरकारी बुलडोजर कार्रवाई नहीं हुई है। ढांचे को गिराने और नए निर्माण की पहल परिवार की ओर से की गई है। वहीं, रियाज वाले कमरे और उस्ताद की निजी वस्तुओं को संग्रहालय के रूप में सहेजने की योजना पर आगे क्या फैसला होता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
