भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड में मध्याह्न भोजन योजना के अभिलेखों के कथित फर्जी ऑडिट और विभागीय पत्र में बदलाव के आरोपों के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। गोपालपुर के प्रखंड साधन सेवी (बीआरपी) विकास कुमार को पद से मुक्त कर जिला कार्यालय में पदस्थापित कर दिया गया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, पीएम पोषण योजना महेश प्रसाद ने इस संबंध में आदेश जारी किया। वहीं जिला साधन सेवी सौरभ अनिकेत को अगले आदेश तक गोपालपुर बीआरपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
मामले की जड़ 17 जुलाई 2026 को जारी विभागीय पत्रांक 464 से जुड़ी बताई गई है। आरोप है कि मूल ज्ञापन में 288 विद्यालयों के ऑडिट से संबंधित आंकड़ों में बदलाव कर गोपालपुर के 26 प्राथमिक विद्यालयों को दोबारा ऑडिट के लिए शामिल कर दिया गया। इसके बाद 10 अगस्त को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से मध्याह्न भोजन पंजी, अंडा पंजी और वर्ष 2024, 2025 तथा 2026 की कैशबुक बीआरसी में जमा कराने को कहा गया।
कार्यक्रम और घटनाक्रम की प्रमुख बातें
विभागीय स्तर पर इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे तो जिला कार्यालय ने संबंधित स्कूलों के अभिलेखों की जांच शुरू की। 26 सितंबर और 28 सितंबर को जारी पत्रों के माध्यम से गोपालपुर के सभी 26 विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाध्यापकों को रिकॉर्ड के साथ बुलाया गया। अभिलेखों के अवलोकन के दौरान चार विद्यालयों की पंजी पर ऑडिट किए जाने के निशान मिलने की बात सामने आई। इन स्कूलों में प्राथमिक विद्यालय मुस्लिम टोला पंचगछिया, लत्तीपाकर, मौधा यादव टोला और नवटोलिया शामिल बताए गए।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी महेश प्रसाद के अनुसार, जिला कार्यालय में अंतिम ऑडिट 27 जुलाई 2026 तक ही किया गया था। ऐसे में चार विद्यालयों के अभिलेखों पर 27 जुलाई के बाद ऑडिट के निशान मिलने से यह सवाल उठा कि यह जांच किसके निर्देश पर और कहां की गई। इसी बिंदु को लेकर विभाग ने बीआरपी से स्पष्टीकरण मांगा। 10 अक्टूबर को विकास कुमार को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया था।

जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
विभागीय पूछताछ में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया कि विभागीय पत्र में संशोधन कर विद्यालयों से पंजी क्यों मंगाई गई और अधिकृत ऑडिट समाप्त होने के बाद किस आधार पर अभिलेखों की जांच की गई। आरोपों को वित्तीय अनियमितता की आशंका और पद के दुरुपयोग से जोड़कर देखा गया। उपलब्ध विवरण में विकास कुमार की ओर से दिए गए जवाब या उनके पक्ष का उल्लेख नहीं है। इसलिए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और विभागीय प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
इसी बीच मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े एक अन्य मामले में शाहकुंड के बीआरपी रजनीश कुमार दास पर 1,24,931 रुपये की वसूली का निर्देश दिया गया है। 15 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक में नियम विरुद्ध राशि निकासी के मामले में वसूली का निर्णय लिया गया था। चार नवंबर को जारी कार्रवाई के अनुसार उनके मानदेय से हर महीने 50 प्रतिशत राशि काटी जाएगी और वसूली पूरी होने तक उन्हें जिला कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है।
आयोजन का व्यापक महत्व
गोपालपुर का मामला विभागीय रिकॉर्ड, ऑडिट प्रक्रिया और मध्याह्न भोजन योजना के वित्तीय प्रबंधन से जुड़ा है। विद्यालयों से मांगे गए रजिस्टर और कैशबुक सरकारी योजना के खर्च तथा संचालन का हिसाब रखने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इसलिए इनके ऑडिट की तारीख, आदेश और प्रक्रिया का स्पष्ट होना जरूरी है। विकास कुमार को पद से हटाकर जिला कार्यालय में पदस्थापित करना फिलहाल प्रशासनिक कदम है; आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।
