टाटा पावर सोलर डीलरशिप ठगी के मामले में राजनांदगांव पुलिस ने बिहार के गया जिले के बोधगया से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इंस्टाग्राम पर टाटा पावर सोलर कंपनी का जिला डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का फर्जी विज्ञापन प्रसारित कर लोगों को कारोबार का झांसा दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, इस तरीके से शिकायतकर्ता से 11 लाख 36 हजार 123 रुपये की ठगी की गई। दोनों आरोपित बोधगया में किराये का मकान लेकर कथित तौर पर साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।
बोधगया में किराये के मकान से चल रहा था नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान प्रशांत कुमार उर्फ निक्की (27), निवासी नालंदा, और अभिषेक कुमार यादव उर्फ रवि (34), निवासी औरंगाबाद, बिहार के रूप में हुई है। राजनांदगांव पुलिस की साइबर टीम ने सूचना और जांच के आधार पर बिहार के बोधगया में दबिश दी। वहां से दोनों को पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, स्कैनर, चार नोटबुक, दो एटीएम कार्ड और सिम समेत अन्य सामग्री जब्त की है।
इंस्टाग्राम विज्ञापन से जुटाते थे इच्छुक लोगों का डाटा
पुलिस के अनुसार, आरोपित सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर टाटा पावर सोलर का जिला डिस्ट्रीब्यूटर बनाने से जुड़ा फर्जी विज्ञापन और लिंक प्रसारित करते थे। विज्ञापन देखकर जो लोग डीलरशिप लेने में रुचि दिखाते, उनसे लिंक के माध्यम से नाम, पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी जानकारी भरवाई जाती थी। फॉर्म में दर्ज जानकारी कथित तौर पर आरोपितों तक पहुंच जाती थी। इसके बाद वे कंपनी का प्रतिनिधि बनकर संबंधित व्यक्ति को फोन करते थे।
विश्वास कायम करने के लिए कंपनी के नाम से फर्जी दस्तावेज ईमेल किए जाते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन शुल्क, सोलर मशीन की अग्रिम कीमत और अधिकारियों के आने-जाने के खर्च जैसे अलग-अलग मद बताकर किश्तों में पैसे जमा कराने को कहा जाता था। इस तरह एक बार में बड़ी रकम मांगने के बजाय भुगतान को कई चरणों में बांटा जाता था। पुलिस का कहना है कि यही तरीका अपनाकर शिकायतकर्ता से जुलाई-अगस्त के दौरान कुल 11,36,123 रुपये लिए गए।

कमीशन पर उपलब्ध सिम और म्यूल खातों का इस्तेमाल
जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, ठगी की रकम कोलकाता क्षेत्र से कमीशन पर उपलब्ध कराए गए सिम कार्ड और म्यूल बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद एटीएम और फोनपे के माध्यम से रकम निकालने की बात सामने आई है। म्यूल खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल वास्तविक लाभार्थी की पहचान छिपाकर लेन-देन के लिए किया जाता है। इस मामले में पुलिस ने खातों और सिम से जुड़े नेटवर्क की जांच भी शुरू की है।
सात मोबाइल, लैपटॉप और अन्य उपकरण जब्त
पुलिस ने आरोपितों के पास से सात मोबाइल, एक लैपटॉप, स्कैनर, चार नोटबुक, दो एटीएम कार्ड और सिम सहित कई सामान जब्त किए हैं। इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से कथित नेटवर्क के संचालन, संपर्कों और लेन-देन से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस के अनुसार, गिरोह में शामिल अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है।
मामले में साइबर थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है। जब्त डिजिटल उपकरणों की जांच और बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि कथित ठगी का दायरा केवल एक शिकायतकर्ता तक सीमित था या अन्य लोग भी इस तरीके से निशाना बनाए गए।
यह मामला सोशल मीडिया पर कारोबार या डीलरशिप के विज्ञापनों के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी दिखाता है। किसी भी कंपनी की डीलरशिप के नाम पर भुगतान करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत कार्यालय से पुष्टि करना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।

