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Home - देश - 29 अक्टूबर: विश्व सोरायसिस दिवस और त्वचा से जुड़ी बीमारी के प्रति जागरूकता

29 अक्टूबर: विश्व सोरायसिस दिवस और त्वचा से जुड़ी बीमारी के प्रति जागरूकता

प्रशांत कुमार
Last updated: अक्टूबर 29, 2026 12:45 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 1 घंटा पहले
विश्व सोरायसिस दिवस
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29 अक्टूबर को विश्व सोरायसिस दिवस (World Psoriasis Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सोरायसिस के बारे में सही जानकारी फैलाना, इससे प्रभावित लोगों की जरूरतों को समझना और समय पर निदान तथा उपचार तक पहुंच को प्रोत्साहित करना है। यह केवल त्वचा पर दिखाई देने वाले धब्बों की समस्या नहीं है; कुछ लोगों में यह जोड़ों और मानसिक स्वास्थ्य सहित जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित कर सकती है।

क्या है सोरायसिस?

सोरायसिस एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक), प्रतिरक्षा-प्रणाली से जुड़ी सूजनकारी बीमारी है। इसमें त्वचा की कोशिकाएं सामान्य से तेजी से बनती और सतह पर जमा होती हैं, जिससे उभरे हुए, लाल या गहरे रंग के पैच और उन पर सफेद-सिल्वर पपड़ी दिखाई दे सकती है। त्वचा के रंग और बीमारी के प्रकार के अनुसार इसका रूप अलग-अलग हो सकता है। यह संक्रामक बीमारी नहीं है—छूने, साथ बैठने या भोजन साझा करने से सोरायसिस नहीं फैलता।

सामान्य लक्षण और प्रभावित हिस्से

  • त्वचा पर स्पष्ट सीमाओं वाले लाल, बैंगनी या गहरे रंग के पैच, जिन पर पपड़ी हो सकती है।
  • खुजली, जलन, सूखापन, त्वचा का फटना या कभी-कभी रक्तस्राव।
  • सिर की त्वचा, कोहनी, घुटने, पीठ और नाखूनों में बदलाव; हालांकि शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं।
  • कुछ लोगों में जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न—ये सोरियाटिक आर्थराइटिस के संकेत हो सकते हैं।

हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते। कभी लक्षण कम हो सकते हैं और कभी भड़क सकते हैं। केवल तस्वीर या ऑनलाइन जानकारी के आधार पर स्वयं निदान करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

सोरायसिस क्यों होता है?

इसका कोई एक कारण नहीं है। आनुवंशिक प्रवृत्ति और प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि इसमें भूमिका निभाती हैं। संक्रमण, त्वचा पर चोट, तनाव, धूम्रपान, अधिक शराब, कुछ दवाएं या मौसम जैसे कारक कुछ लोगों में लक्षण भड़का सकते हैं। ट्रिगर व्यक्ति-विशेष के अनुसार अलग होते हैं; किसी एक कारक को सभी मरीजों के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

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उपचार और देखभाल

सोरायसिस का ऐसा एक उपचार नहीं है जो हर व्यक्ति के लिए स्थायी रूप से इसे समाप्त कर दे, लेकिन उपलब्ध उपचार लक्षणों को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। उपचार बीमारी की गंभीरता, प्रभावित हिस्सों, अन्य स्वास्थ्य स्थितियों और व्यक्ति की जरूरतों के आधार पर तय होता है।

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  • त्वचा पर लगाने वाली दवाएं: मॉइस्चराइज़र तथा चिकित्सक द्वारा सुझाई गई क्रीम या मलहम।
  • फोटोथेरेपी: कुछ मरीजों में चिकित्सकीय निगरानी में नियंत्रित प्रकाश-उपचार।
  • मुंह से या इंजेक्शन द्वारा दी जाने वाली दवाएं: मध्यम से गंभीर बीमारी में विशेषज्ञ कुछ प्रणालीगत दवाएं या बायोलॉजिक उपचार सुझा सकते हैं।
  • रोजमर्रा की देखभाल: त्वचा को नम रखना, कठोर साबुन और त्वचा को चोट पहुंचाने वाली आदतों से बचना तथा व्यक्तिगत ट्रिगर पहचानना।

स्टेरॉयड क्रीम, पारंपरिक नुस्खे, सप्लीमेंट या अन्य उपचार स्वयं शुरू न करें। दवा बदलने या बंद करने से पहले चिकित्सक से बात करें। धूप या किसी भी प्रकाश-उपचार का इस्तेमाल भी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही होना चाहिए।

कब डॉक्टर से मिलें?

यदि त्वचा पर लगातार पपड़ीदार धब्बे हों, खुजली या दर्द बढ़ रहा हो, नाखूनों में बदलाव आएं या रोजमर्रा के काम प्रभावित हों तो त्वचा विशेषज्ञ से मिलें। जोड़ों में दर्द, सूजन या सुबह के समय लंबे समय तक अकड़न हो तो इसे नजरअंदाज न करें। त्वचा का बहुत तेजी से लाल होना, व्यापक छिलना, पस, बुखार या अचानक गंभीर लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।

मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन भी जरूरी

दिखाई देने वाले त्वचा-लक्षणों के कारण कुछ लोगों को शर्मिंदगी, भेदभाव, चिंता या अवसाद का सामना करना पड़ सकता है। परिवार, कार्यस्थल और समाज में सहानुभूति तथा सही जानकारी महत्वपूर्ण हैं। सोरायसिस किसी व्यक्ति की स्वच्छता, चरित्र या दूसरों के लिए संक्रमण के खतरे का संकेत नहीं है। जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या मरीज सहायता समूह से मदद लेना उपयोगी हो सकता है।

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विश्व सोरायसिस दिवस का संदेश

इस दिवस का संदेश है कि सोरायसिस से प्रभावित लोगों को सम्मान, सटीक जानकारी, समय पर विशेषज्ञ देखभाल और उपचार के विकल्प उपलब्ध होने चाहिए। जागरूकता का अर्थ मिथकों को दूर करना, बीमारी के लक्षण पहचानना और मरीजों को दोष देने के बजाय उनका साथ देना है।

निष्कर्ष: सोरायसिस एक दीर्घकालिक लेकिन प्रबंधित की जा सकने वाली बीमारी है। सही निदान, व्यक्ति के अनुरूप उपचार, नियमित फॉलो-अप और सामाजिक समर्थन से कई मरीज बेहतर जीवन जी सकते हैं। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत निदान या उपचार के लिए योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लें।

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