29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस (World Stroke Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मस्तिष्क आघात यानी स्ट्रोक के बारे में जागरूकता बढ़ाना, इसके शुरुआती संकेत पहचानना और समय पर उपचार के महत्व को समझाना है। स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सकीय आपातस्थिति है। इसमें मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क में रक्तस्राव होता है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। तुरंत उपचार से जान बचने और स्थायी विकलांगता का जोखिम कम होने की संभावना बढ़ सकती है।
स्ट्रोक क्या है?
स्ट्रोक मुख्यतः दो प्रकार का होता है। इस्केमिक स्ट्रोक में रक्त का थक्का या अवरोध मस्तिष्क तक रक्त पहुँचने से रोकता है। हेमरेजिक स्ट्रोक में मस्तिष्क के भीतर या आसपास रक्तस्राव होता है। दोनों स्थितियों में मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते या रक्तस्राव से नुकसान होता है। लक्षण अचानक शुरू हो सकते हैं और उनकी गंभीरता व्यक्ति तथा प्रभावित मस्तिष्क क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें?
स्ट्रोक के संकेत अचानक दिखाई दे सकते हैं। याद रखने का एक सरल तरीका FAST है:
- F — Face (चेहरा): मुस्कुराने पर चेहरा एक ओर लटकना या असमान दिखना।
- A — Arms (बाँहें): एक बाँह में कमजोरी या दोनों बाँहों को उठाकर रखने में कठिनाई।
- S — Speech (बोलना): बोली लड़खड़ाना, शब्द समझने या बोलने में अचानक परेशानी।
- T — Time (समय): तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें; लक्षण शुरू होने का समय नोट करें।
इसके अलावा अचानक दृष्टि में बदलाव, संतुलन बिगड़ना, चलने में कठिनाई या बिना स्पष्ट कारण बहुत तेज सिरदर्द भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। लक्षण कुछ मिनटों में ठीक हो जाएँ, तब भी चिकित्सा जाँच जरूरी है।

स्ट्रोक होने पर क्या करें?
स्ट्रोक का संदेह होने पर तुरंत स्थानीय आपातकालीन सेवा को कॉल करें और व्यक्ति को अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था करें। लक्षण शुरू होने का समय या वह समय जब व्यक्ति आखिरी बार सामान्य था, याद रखें। व्यक्ति को स्वयं वाहन चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के भोजन, पेय या एस्पिरिन जैसी दवा न दें, क्योंकि निगलने में कठिनाई या मस्तिष्क में रक्तस्राव की स्थिति हो सकती है। उपचार में देरी न करें और लक्षणों के अपने-आप ठीक होने की प्रतीक्षा न करें।
स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक
उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का एक प्रमुख जोखिम कारक है। मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, हृदय की कुछ स्थितियाँ जैसे एट्रियल फिब्रिलेशन, शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित आहार और अत्यधिक शराब का सेवन भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। उम्र और पारिवारिक इतिहास जैसे कुछ कारक बदले नहीं जा सकते, लेकिन कई जोखिमों को नियमित स्वास्थ्य जाँच और उपचार से नियंत्रित किया जा सकता है।
स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?
- रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जाँच कराएँ तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियंत्रण रखें।
- सब्जियों, फलों, साबुत अनाज और दालों सहित संतुलित आहार लें; नमक और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ सीमित करें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएँ और लंबे समय तक निष्क्रिय बैठने से बचें।
- धूम्रपान छोड़ें और शराब के सेवन से जुड़े जोखिमों पर चिकित्सकीय सलाह लें।
- निर्धारित दवाएँ नियमित लें; बिना सलाह दवा बंद न करें या खुराक न बदलें।
विश्व स्ट्रोक दिवस का महत्व
विश्व स्ट्रोक दिवस लोगों, परिवारों, स्वास्थ्यकर्मियों और समुदायों को स्ट्रोक की रोकथाम और समय पर उपचार के बारे में शिक्षित करने का अवसर देता है। जागरूकता का अर्थ केवल जोखिम घटाना नहीं, बल्कि लक्षण पहचानकर बिना देर किए चिकित्सा सहायता लेना भी है। स्ट्रोक के बाद पुनर्वास, फिजियोथेरेपी, भाषा और निगलने से जुड़ी सहायता तथा भावनात्मक सहयोग भी रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
संदेश: हर मिनट महत्वपूर्ण है
स्ट्रोक के मामले में समय निर्णायक हो सकता है। चेहरे का अचानक टेढ़ा होना, बाँह में कमजोरी या बोलने में परेशानी जैसे संकेत दिखें तो तुरंत आपातकालीन सहायता लें। विश्व स्ट्रोक दिवस हमें याद दिलाता है कि सही जानकारी, जोखिम कारकों का नियंत्रण और त्वरित कार्रवाई जीवन बचाने में मदद कर सकती है। यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है; व्यक्तिगत निदान या उपचार के लिए योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लें।

