एक मां और बेटे ने चांदी के छोटे कारोबार से शुरुआत की और दशकों में उसे दुनिया के बड़े औद्योगिक समूहों में शामिल कर दिया। यह कहानी है विवेक चांद सहगल और उनकी मां स्वर्ण लता सहगल की साझेदारी की, जिसने Motherson समूह की नींव रखी। आज यह समूह ऑटोमोबाइल सहित कई क्षेत्रों के लिए पुर्जे और तकनीकी उत्पाद बनाता है और दर्जनों देशों में काम करता है।
द फाइनेंशियल एक्सप्रेस की 18 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, समूह का बाजार मूल्य सितंबर 2026 के अंत में लगभग ₹1.71 लाख करोड़ से ₹1.75 लाख करोड़ के बीच था। यह बाजार पूंजीकरण है, कंपनी की सालाना आय या नकद संपत्ति नहीं।
चांदी के कारोबार से शुरुआत
विवेक चांद सहगल का परिवार पहले से आभूषण और चांदी के कारोबार से जुड़ा था। रिपोर्ट के मुताबिक, 18 वर्ष की उम्र में सहगल चांदी की सिल्लियां पहुंचाने का काम करते थे और उस समय उन्हें करीब ₹2,500 महीने मिलते थे। इस शुरुआती अनुभव ने उन्हें कारोबार, ग्राहकों के भरोसे और बाजार के उतार-चढ़ाव को करीब से समझने का अवसर दिया।
1975 में उनके पिता के सुझाव पर विवेक ने अपनी मां स्वर्ण लता सहगल के साथ कारोबार शुरू किया। ‘Motherson’ नाम भी इसी मां-बेटे की साझेदारी से जुड़ा है। शुरुआत चांदी के व्यापार से हुई, लेकिन परिवार ने जल्द ही विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ने का फैसला किया।

व्यापार से विनिर्माण तक का सफर
1977 के आसपास कंपनी ने नोएडा में केबल और तार बनाने का काम शुरू किया। निर्णायक अवसर 1980 के दशक में आया, जब भारत में कार निर्माण का विस्तार हो रहा था। सहगल ने मारुति की कारों के लिए वायरिंग हार्नेस—वाहन के अलग-अलग विद्युत हिस्सों को जोड़ने वाली तारों की प्रणाली—बनाने का अवसर पहचाना।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1983 में सहगल जापान गए और वहां के साझेदारों से तकनीकी सहयोग हासिल करने की कोशिश की। शुरुआती मुश्किलों के बावजूद कंपनी ने स्थानीय स्तर पर उत्पाद विकसित किए। उसी दौर में Motherson ने मारुति के लिए ऑटोमोबाइल वायरिंग हार्नेस तैयार किया और जापानी कंपनी Tokai Electric, जो बाद में Sumitomo Wiring Systems से जुड़ी, के साथ तकनीकी सहयोग की राह खुली। 1986 में संयुक्त उद्यम बना।
एक ग्राहक पर निर्भरता से वैश्विक विस्तार तक
किसी बड़े ग्राहक से कारोबार मिलना विकास का अवसर है, लेकिन उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता जोखिम भी पैदा करती है। 1990 के दशक के अंत में Motherson के कारोबार का बड़ा हिस्सा मारुति से जुड़ा था। इस अनुभव ने कंपनी को ग्राहक, देश और उत्पाद—तीनों स्तरों पर विविधता बढ़ाने की जरूरत समझाई।
कंपनी ने यूरोप में कदम बढ़ाए और 2002 में आयरलैंड की Wexford Electronics का अधिग्रहण किया। आगे चलकर उसने ऐसे कारोबारों को खरीदने की रणनीति अपनाई जिन्हें नई पूंजी, प्रबंधन और परिचालन सुधार की जरूरत थी। कंपनी के विस्तार में जर्मनी की Visiocorp के मिरर कारोबार और Peguform जैसे अधिग्रहण महत्वपूर्ण रहे। इन सौदों ने Motherson को वैश्विक वाहन निर्माताओं की आपूर्ति श्रृंखला में अधिक मजबूत जगह बनाने में मदद की।

अधिग्रहण की रणनीति और जोखिम
Motherson की विकास यात्रा में अधिग्रहण अहम रहे हैं। Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 2002 के बाद से 54 अधिग्रहण किए। रणनीति का उद्देश्य केवल आकार बढ़ाना नहीं, बल्कि तकनीक, नए ग्राहक, उत्पादन क्षमता और अलग-अलग बाजारों तक पहुंच हासिल करना था। हालांकि, अधिग्रहणों से कर्ज और कारोबार को एकीकृत करने की चुनौतियां भी पैदा होती हैं।
कंपनी ने ‘3CX10’ सिद्धांत अपनाया है, जिसके तहत किसी एक ग्राहक, देश या उत्पाद का योगदान कारोबार के 10 प्रतिशत से अधिक न होने देने का लक्ष्य रखा जाता है। यह नियम किसी एक बाजार या ग्राहक में गिरावट आने पर जोखिम सीमित करने की कोशिश है। कंपनी ने अपनी दीर्घकालीन योजनाओं में पूंजी पर बेहतर प्रतिफल का लक्ष्य भी रखा है; रिपोर्ट बताती है कि 40 प्रतिशत ROCE का लक्ष्य अब तक हासिल नहीं हुआ है।
कोविड संकट और वापसी
2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान वाहन उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। Motherson जैसे अंतरराष्ट्रीय विनिर्माता के लिए यह बड़ी परीक्षा थी। इसके बाद सेमीकंडक्टर की कमी, कच्चे माल की लागत और माल ढुलाई की महंगाई ने भी उद्योग पर दबाव डाला।
कंपनी ने नकदी प्रबंधन, लागत नियंत्रण और कर्ज घटाने पर ध्यान दिया। साथ ही, उसने पारंपरिक ऑटोमोबाइल कारोबार से आगे बढ़कर एयरोस्पेस, मेडिकल और हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स तथा उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। इससे समूह को अलग-अलग उद्योगों से विकास के अवसर हासिल करने में मदद मिली।

आज का Motherson समूह
रिपोर्ट में दिए गए वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में समूह का राजस्व ₹1,26,104 करोड़ रहा। जून 2026 में समाप्त पहली तिमाही में राजस्व ₹35,244 करोड़ बताया गया। समूह के 47 देशों में 475 से अधिक उत्पादन और अन्य सुविधाएं तथा 2,05,000 से अधिक कर्मचारी होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। ये आंकड़े रिपोर्ट में उद्धृत कंपनी के परिचालन पैमाने को दर्शाते हैं; वित्तीय नतीजों और बाजार मूल्य में समय के साथ बदलाव हो सकता है।
समूह का मूल ऑटोमोबाइल कारोबार अब भी अहम है। वायरिंग हार्नेस, वाहन के मिरर, पॉलिमर उत्पाद और मॉड्यूल जैसे हिस्से इसके प्रमुख व्यवसायों में शामिल हैं। साथ ही, नए क्षेत्रों में विस्तार का उद्देश्य कंपनी को वाहन उद्योग के चक्रों और किसी एक उत्पाद की मांग में गिरावट से बचाने की क्षमता बढ़ाना है।
अगली पीढ़ी की भूमिका
विवेक चांद सहगल के बेटे लक्ष वैमान सहगल भी समूह के नेतृत्व में भूमिका निभा रहे हैं। परिवार की हिस्सेदारी के साथ पेशेवर प्रबंधन का मॉडल कंपनी की आगे की यात्रा का हिस्सा है। बड़े पारिवारिक कारोबारों के लिए उत्तराधिकार की योजना, जवाबदेही और पेशेवर निर्णय प्रक्रिया दीर्घकालीन स्थिरता में महत्वपूर्ण होती है।
इस कारोबारी कहानी से क्या सीख मिलती है?
- बदलाव के अवसर पहचानना: चांदी के व्यापार से केबल और फिर ऑटोमोबाइल कंपोनेंट निर्माण तक जाना कारोबार को नई दिशा देने का उदाहरण है।
- ग्राहक पर निर्भरता कम करना: कई ग्राहकों, देशों और उत्पादों में कारोबार फैलाने से एक जगह की मंदी का असर सीमित किया जा सकता है।
- अधिग्रहण के साथ अनुशासन: कंपनी खरीदना तभी मूल्य पैदा करता है, जब तकनीक, टीम, लागत और ग्राहक संबंधों को प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए।
- संकट में नकदी और कर्ज पर ध्यान: विकास के साथ वित्तीय मजबूती बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
- भरोसे की अहमियत: मां-बेटे की शुरुआती साझेदारी से शुरू हुई कंपनी की कहानी रिश्तों, दीर्घकालीन सोच और कारोबारी विश्वसनीयता को रेखांकित करती है।
निष्कर्ष
विवेक चांद सहगल और स्वर्ण लता सहगल की कहानी केवल एक बड़े बाजार मूल्य तक पहुंचने की कहानी नहीं है। यह एक पारिवारिक कारोबार के बदलते उद्योगों के अनुरूप खुद को ढालने, तकनीकी साझेदारी बनाने, वैश्विक अधिग्रहण करने और जोखिम प्रबंधन सीखने की यात्रा है। चांदी के व्यापार से शुरू हुआ Motherson आज विशाल विनिर्माण नेटवर्क बन चुका है—और इसकी अगली चुनौती होगी कि वह विस्तार के साथ गुणवत्ता, वित्तीय अनुशासन और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखे।

