Purnia News: पूर्णिया से 1 मीट्रिक टन फूला मखाना ग्रीस निर्यात; APEDA की पहल से किसानों को घरेलू बाजार से बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद, 20 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है भारतीय मखाना
पूर्णिया: बिहार के पारंपरिक मखाने ने अब यूरोप के बाजार में एक और मजबूत दस्तक दी है। पूर्णिया से 1 मीट्रिक टन फूला (Popped/Phool) मखाना ग्रीस के लिए निर्यात किया गया है।
यह खेप कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की पहल के तहत भेजी गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की है।
यह सिर्फ मखाने की एक खेप का विदेश पहुंचना नहीं है, बल्कि बिहार के इस पारंपरिक उत्पाद को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि निर्यात की गई खेप के लिए उत्पादकों को घरेलू बाजार में मिलने वाले मौजूदा भाव की तुलना में बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ है। इससे किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाएं बढ़ी हैं।

बेलौरी से मुंद्रा होते हुए पहुंचा ग्रीस
ग्रीस भेजी गई मखाने की इस खेप की सोर्सिंग इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट, बेलौरी, पूर्णिया ने की है। निर्यात के लिए इसे दिल्ली की S. S Foods Exports Pvt. Ltd. के माध्यम से भेजा गया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक खेप गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से समुद्री मार्ग के जरिए ग्रीस के पिराएस पोर्ट पहुंचेगी।
इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर मखाना उत्पादकों और निर्यात व्यवस्था के बीच बेहतर कड़ी बनाने की कोशिश दिखाई देती है। इससे पूर्णिया जैसे उत्पादन क्षेत्र को केवल घरेलू मंडियों तक सीमित रहने के बजाय सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और बाजारों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
APEDA की पहल से निर्यात को मिल रही रफ्तार
मखाने को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में APEDA की भूमिका महत्वपूर्ण है। संस्था किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों के बीच बाजार संपर्क विकसित करने तथा निर्यात मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और वैल्यू-एडेड मखाना उत्पादों का निर्यात किया, जिनकी कीमत करीब 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर रही। ये उत्पाद 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचे।

ग्रीस की यह खेप इसी विस्तार की अगली कड़ी है। खासकर यूरोपीय बाजारों में मखाने की पहुंच बढ़ने से बिहार के उत्पादकों के लिए नए खरीदार और बाजार तलाशने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
बिहार में देश के 80-85 फीसदी मखाने का उत्पादन
मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 80 से 85 प्रतिशत बताई जाती है। राज्य में इसकी खेती 35 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती है और उत्पादन से जुड़े कई जिले इस कारोबार की रीढ़ हैं। इनमें पूर्णिया के साथ कटिहार, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे इलाके शामिल हैं।
पूर्णिया से ग्रीस तक पहुंची यह खेप इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे स्थानीय उत्पादन को वैश्विक मांग के साथ जोड़ने का रास्ता खुलता है। निर्यात बढ़ने पर किसानों और उत्पादक समूहों को घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।
हेल्दी स्नैक के रूप में बढ़ रही वैश्विक मांग
मखाना लंबे समय से बिहार और देश के दूसरे हिस्सों में व्रत, त्योहार और पारंपरिक खान-पान का हिस्सा रहा है। अब इसकी पहचान धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक आधुनिक स्नैक और खाद्य उत्पाद के तौर पर भी बन रही है।

प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों के कारण मखाने को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच जगह मिल रही है। यही वजह है कि भारतीय मखाने के लिए यूरोप और अन्य विदेशी बाजारों में नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।
पूर्णिया से ग्रीस भेजी गई यह पहली 1 मीट्रिक टन खेप आकार में भले ही सीमित हो, लेकिन इसके जरिए बिहार के मखाने के लिए यूरोपीय बाजार में एक नया रास्ता खुला है।
निर्यात श्रृंखला मजबूत होने और अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने के साथ आने वाले समय में इससे किसानों, उत्पादकों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।
