पटना: बिहार में Bihar Gramin Bank व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन की समीक्षा की। भारतीय रिजर्व बैंक, पटना में 7 अक्टूबर 2026 को बिहार राज्य के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक पर अधिकार प्राप्त समिति (EC-RRB) की 78वीं बैठक आयोजित की गई।
बैठक में बिहार ग्रामीण बैंक के वित्तीय प्रदर्शन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण पहुंच, वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग और ग्राहक सेवा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता RBI के क्षेत्रीय निदेशक श्री सुजीत कुमार अरविंद ने की। इस अवसर पर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री गौतम कुमार सिंह और बिहार ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष श्री मुकुल सहाय मौजूद रहे। इसके अलावा बिहार ग्रामीण बैंक, उसके प्रायोजक बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) तथा बिहार सरकार के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।
बिहार ग्रामीण बैंक के एकीकरण के बाद प्रगति की समीक्षा
बैठक के दौरान क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद ने एकीकृत संस्था के रूप में दूसरे वर्ष में प्रवेश करने पर बिहार ग्रामीण बैंक को बधाई दी। उन्होंने दोनों क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के सफल एकीकरण के बाद बैंक की ओर से की गई प्रगति की सराहना की।

उन्होंने कहा कि बिहार जैसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले राज्य में मजबूत और समावेशी ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। बैंक द्वारा प्रणालियों और प्रक्रियाओं को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने विनियामक अनुपालन को और सुदृढ़ करने पर भी जोर दिया।
30 जून 2026 तक के प्रदर्शन की हुई समीक्षा
बैठक में 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए बिहार ग्रामीण बैंक के प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता, ऋण वसूली, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग की तैयारी, ग्राहक सेवा और परिचालन दक्षता जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
बैंक की ओर से रीटेल लेंडिंग, MSME वित्तपोषण और बैंक सखी के विस्तार से जुड़ी पहलों की भी जानकारी दी गई। RBI क्षेत्रीय निदेशक ने बैंक को ऋण प्रवाह बढ़ाने तथा वार्षिक ऋण योजना के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
NPA घटाने और आंतरिक नियंत्रण मजबूत करने पर जोर
बैठक में परिसंपत्ति गुणवत्ता बनाए रखने और NPA कम करने के लिए लगातार प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही बैंक को अपने आंतरिक नियंत्रण तंत्र को और मजबूत करने की सलाह दी गई।

RBI ने डिजिटल सेवाओं में सुधार के साथ-साथ आधार और मोबाइल सीडिंग को बढ़ाने पर भी जोर दिया, विशेषकर मौजूदा बैंक खातों में। इसका उद्देश्य ग्राहक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ वित्तीय धोखाधड़ी की निगरानी और रोकथाम को अधिक प्रभावी बनाना है।
गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने की जरूरत
बैठक में वित्तीय समावेशन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए बिहार ग्रामीण बैंक को अपने व्यापक शाखा और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) नेटवर्क का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।
RBI की ओर से बैंक को नवोन्मेषी समाधानों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनके गांवों के करीब आवश्यक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही ग्रामीण बिहार में संस्थागत ऋण की पहुंच मजबूत करने और बैंक की परिचालन दक्षता बढ़ाने के प्रयास जारी रखने की बात कही गई।

बैठक का व्यापक संदेश यही रहा कि बिहार ग्रामीण बैंक को एकीकृत संस्था के रूप में अपनी क्षमता मजबूत करते हुए ऋण विस्तार, वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग, ग्राहक सुरक्षा और परिसंपत्ति गुणवत्ता के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा।
