सतीश सालियान ने 2 सितंबर के हाईकोर्ट आदेश की उस टिप्पणी को हटाने या स्पष्ट करने की मांग की है, जिसमें कहा गया था कि जांच में पर्याप्त आधार मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए। उन्होंने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया है।
मुंबई की दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में नया कानूनी मोड़ आया है। उनके पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख कर 2 सितंबर 2026 के आदेश में इस्तेमाल की गई ‘आरोपी’ से जुड़ी एक शर्त को हटाने या स्पष्ट करने की मांग की है।
यह वही आदेश है, जिसके तहत हाईकोर्ट ने दिशा की मौत की जांच CBI को सौंपते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।
किस बात पर है आपत्ति?
2 सितंबर के अपने आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री के आधार पर जब तक जांच अधिकारी के पास किसी व्यक्ति के खिलाफ उचित संदेह के पर्याप्त आधार न हों, तब तक उसे आरोपी नहीं माना जाना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाना चाहिए और अगर अपराध सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सतीश सालियान ने इसी हिस्से को लेकर हाईकोर्ट में अंतरिम आवेदन दायर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने या तो इस टिप्पणी को हटाने या इसका दायरा स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट के किस फैसले का दिया हवाला?
सतीश सालियान की अर्जी में Balkishan A. Devidayal बनाम State of Maharashtra (1980) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है।
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 20(3) के संदर्भ में ‘accused of an offence’ यानी अपराध के आरोपी की अवधारणा पर विचार किया था। अर्जी में इसी फैसले का सहारा लेते हुए कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणी को व्यापक अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए।

पिता का कहना क्या है?
Mid-Day की रिपोर्ट के मुताबिक, सतीश सालियान का कहना है कि हाईकोर्ट की यह टिप्पणी मूल रूप से गिरफ्तारी से जुड़े संदर्भ में थी, लेकिन इसकी व्याख्या व्यापक रूप से की जा रही है। उनका दावा है कि इससे मामले में उनके पक्ष को लेकर भ्रम और पूर्वाग्रह की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से उन्होंने अदालत से इस हिस्से को हटाने या स्पष्ट करने की मांग की है।
2 सितंबर को हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
यह समझना जरूरी है कि मौजूदा अर्जी किस पृष्ठभूमि में आई है। 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियों की जांच CBI से कराने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने CBI के मुंबई क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी को एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त करने, सतीश सालियान का बयान दर्ज करने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। जांच अधिकारी को दिशा की मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों की जांच करने को कहा गया था।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि FIR दर्ज करने का आदेश किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बराबर नहीं है। किसी व्यक्ति को आरोपी तभी माना जाना चाहिए, जब जांच में जुटी सामग्री के आधार पर उसके खिलाफ उचित संदेह का पर्याप्त आधार सामने आए।

मामला यहां तक कैसे पहुंचा?
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इसे Accidental Death Report (ADR) के रूप में दर्ज किया था और बाद की जांच में मौत को आत्महत्या बताया था। सतीश सालियान ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाते हुए 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और अपनी बेटी की मौत की नए सिरे से जांच की मांग की।
हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को मामले की जांच CBI को सौंपते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने मुंबई पुलिस को मामले से जुड़े रिकॉर्ड CBI को सौंपने को भी कहा था। साथ ही कहा था कि अगर जांच में कोई मामला नहीं बनता है तो CBI संबंधित अदालत में उचित रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।
CBI ने FIR भी दर्ज कर ली है
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने सितंबर 2026 में FIR दर्ज कर जांच शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, FIR सतीश सालियान के बयान के आधार पर दर्ज की गई और इसमें उनके द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े गंभीर अपराधों की जांच शामिल है। हालांकि, इन आरोपों को जांच का विषय समझना जरूरी है, किसी अदालत द्वारा साबित तथ्य के रूप में नहीं।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सतीश सालियान की नई अर्जी बॉम्बे हाईकोर्ट के विचाराधीन है। उनकी मांग है कि 2 सितंबर के आदेश में ‘आरोपी’ से जुड़ी टिप्पणी को या तो हटाया जाए या उसका अर्थ स्पष्ट किया जाए। उपलब्ध रिपोर्टों में इस अर्जी पर हाईकोर्ट के किसी अंतिम आदेश की जानकारी नहीं है।

इसलिए फिलहाल स्थिति यही है कि CBI की जांच जारी है और ‘आरोपी’ वाली टिप्पणी को लेकर सतीश सालियान ने हाईकोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय होना जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
