10 साल में टेलीकॉम की तस्वीर बदलने के बाद जियो की अगली छलांग डीप-टेक पर; 6,800 से ज्यादा पेटेंट आवेदन, AI और नेटवर्क सॉफ्टवेयर पर बड़ा फोकस
नई दिल्ली: भारत में सस्ता डेटा और तेज इंटरनेट पहुंचाने से शुरू हुई रिलायंस जियो की कहानी अब टेलीकॉम से आगे निकलती दिख रही है।
कंपनी अब केवल मोबाइल कनेक्टिविटी देने वाली कंपनी बने रहने के बजाय अपनी खुद की टेक्नोलॉजी विकसित करने और उसे दुनिया के दूसरे बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। जियो की इस नई दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G, 6G, नेटवर्क सॉफ्टवेयर, क्लाउड, डिजिटल प्लेटफॉर्म और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी अहम भूमिका में हैं।
10 साल बाद जियो की दूसरी पारी शुरू
जियो ने 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। शुरुआती दौर में कंपनी ने कम कीमत वाले डेटा और बड़े नेटवर्क विस्तार के जरिए मोबाइल इंटरनेट के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाया।

अब कंपनी अपनी अगली पारी में उस तकनीक पर भी नियंत्रण बढ़ाना चाहती है, जिससे उसका नेटवर्क और डिजिटल सेवाएं चलती हैं। यानी फोकस केवल कनेक्टिविटी बेचने पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी को खुद विकसित करके एक प्रोडक्ट के रूप में पेश करने पर है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने भी कंपनी की दिशा को टेलीकॉम से कहीं व्यापक बताया है। कंपनी के मुताबिक उसका लक्ष्य भारत में विकसित तकनीक और बौद्धिक संपदा को वैश्विक बाजारों तक ले जाना है।
AI से लेकर 6G तक, अपनी टेक्नोलॉजी पर जोर
जियो की टेक्नोलॉजी रणनीति सिर्फ मोबाइल नेटवर्क तक सीमित नहीं है। कंपनी AI, क्लाउड, नेटवर्क ऑटोमेशन, 5G और 6G जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों पर काम कर रही है।
कंपनी के मुताबिक उसके पास नेटवर्क, डिवाइस इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम और डिजिटल एप्लिकेशन तक की टेक्नोलॉजी क्षमताएं हैं। जियो का दावा है कि वह अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को आगे बढ़ाकर AI आधारित डिजिटल सेवाओं की दिशा में भी काम कर रही है।

6G के मामले में भी कंपनी की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। रिलायंस की 2026 की AGM प्रस्तुति में जियो ने 5G को आगे बढ़ाने के साथ 6G स्टैंडर्ड में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका की दिशा में काम करने की बात कही थी। कंपनी ने 2030 तक अपने सभी ग्राहकों को 5G पर लाने का लक्ष्य भी बताया है।
6,817 पेटेंट आवेदन, दुनिया की टॉप-20 टेक कंपनियों में जगह
जियो की इस रणनीति का एक बड़ा संकेत उसके पेटेंट पोर्टफोलियो से मिलता है। कंपनी के अनुसार 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स ने कुल 6,817 पेटेंट आवेदन दाखिल किए थे। इनमें 2,393 आवेदन भारत में और 4,424 विदेशी न्यायक्षेत्रों में दाखिल किए गए हैं। इनमें से कुल 1,009 पेटेंट वैश्विक स्तर पर मंजूर भी हो चुके थे।
WIPO के 2025 के PCT आंकड़ों में जियो प्लेटफॉर्म्स ग्लोबल टॉप-20 में पहुंचा। कंपनी ने बताया कि उसके पेटेंट फोकस में 5G, 5G Advanced, 6G, AI, AI-native networks, cloud-native platforms, network automation, radio access और core network software जैसी तकनीकें शामिल हैं।
बनाएगी ऐसी तकनीक जिसे दूसरी कंपनियां भी इस्तेमाल कर सकें
जियो की रणनीति का अगला हिस्सा टेक्नोलॉजी को व्यावसायिक रूप देना है। कंपनी अपने विकसित 5G स्टैक, नेटवर्क सॉफ्टवेयर, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और दूसरी डिजिटल तकनीकों को चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेश करने की दिशा में बढ़ रही है।

इसका मतलब यह है कि भविष्य में जियो की कमाई सिर्फ भारत में मोबाइल कनेक्शन और डिजिटल सेवाओं से नहीं, बल्कि दूसरे देशों की कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराने से भी हो सकती है।
एंटरप्राइज सेक्टर में भी बढ़ेगा फोकस
जियो की योजना सिर्फ आम मोबाइल यूजर तक सीमित नहीं है। कंपनी एंटरप्राइज और छोटे कारोबारों के लिए भी डिजिटल समाधान विकसित कर रही है।
इसके तहत प्राइवेट 5G, क्लाउड, AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है। यानी आने वाले समय में जियो का मुकाबला केवल टेलीकॉम कंपनियों से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल सॉल्यूशन देने वाली कंपनियों से भी हो सकता है।
AI को हर सेवा में जोड़ने की तैयारी
जियो की AI रणनीति भी तेजी से आगे बढ़ रही है। 2026 में कंपनी ने AI को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और उपभोक्ता सेवाओं में शामिल करने की दिशा में कई पहल की हैं।

कंपनी का लक्ष्य AI को केवल अलग ऐप या सेवा के तौर पर नहीं, बल्कि अपने डिजिटल इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना है। इसके तहत कॉल, ऐप, डिजिटल सेवाओं और कारोबार से जुड़े अलग-अलग उपयोगों में AI की क्षमता का इस्तेमाल करने की योजना है।
जियो का असली लक्ष्य क्या है?
सीधी भाषा में समझें तो जियो की रणनीति तीन चरणों में दिखाई देती है—
पहला: भारत में बड़े पैमाने पर डिजिटल कनेक्टिविटी देना।
दूसरा: उसी नेटवर्क और डिजिटल इकोसिस्टम के लिए अपनी टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा विकसित करना।
तीसरा: भारत में तैयार इन तकनीकों को दूसरे देशों के बाजारों तक पहुंचाना।
यानी जियो अब सिर्फ “भारत को इंटरनेट से जोड़ने” वाली कंपनी की भूमिका से आगे बढ़कर “भारत में टेक्नोलॉजी बनाने और उसे दुनिया तक पहुंचाने” वाला कारोबार खड़ा करना चाहती है।

एक नजर में समझें जियो की नई टेक्नोलॉजी रणनीति
- शुरुआत: 2016 में भारत के टेलीकॉम बाजार में एंट्री
- अगला फोकस: डीप-टेक और अपनी बौद्धिक संपदा
- मुख्य तकनीक: AI, 5G, 6G, क्लाउड और नेटवर्क सॉफ्टवेयर
- पेटेंट आवेदन: 31 मार्च 2026 तक 6,817
- विदेशी पेटेंट आवेदन: 4,424
- मंजूर पेटेंट: 1,009 वैश्विक स्तर पर
- 6G लक्ष्य: भारत को 6G मानकों में अग्रणी बनाने की दिशा में काम
- ग्लोबल प्लान: अपनी टेक्नोलॉजी को चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंचाना
- नया बिजनेस मॉडल: टेलीकॉम के साथ टेक्नोलॉजी और डिजिटल सॉल्यूशन कारोबार पर जोर
