Angeline Mock: हैलोवीन की सुबह 80 साल की मां की बिस्तर पर हत्या, बेटी के हाथों पर भी मिले जख्म; पहले आत्मरक्षा का दावा, फिर सामने आई मानसिक स्वास्थ्य और भ्रम से जुड़ी कहानी
विचिटा, कंसास: कभी टीवी पर लोगों तक खबरें पहुंचाने वाली 48 वर्षीय एंजेलिन ‘एंजी’ मॉक अब अपनी 80 साल की मां अनीता एवर्स की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटेगी। 31 अक्टूबर 2025 की सुबह कंसास के विचिटा स्थित घर में अनीता पर चाकू से कई वार किए गए थे।
पुलिस पहुंची तो मॉक घर के बाहर खून से सनी हालत में मिली और उसके हाथों पर भी चोटें थीं। एक साल बाद इस मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए उसे उम्रकैद की सजा दी है, जिसमें 25 साल बाद पैरोल की पात्रता होगी।
हैलोवीन की सुबह घर में आखिर हुआ क्या?
31 अक्टूबर 2025 को सुबह करीब 7:50 बजे पुलिस को विचिटा के दक्षिणी हिस्से में स्थित घर से सूचना मिली। पुलिस वहां पहुंची तो अनीता एवर्स अपने बिस्तर पर गंभीर रूप से घायल मिलीं। उनके शरीर पर चाकू के कई वार थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

जांच में बिस्तर पर अनीता के पास रसोई में इस्तेमाल होने वाले चाकू और एक चीज ग्रेटर मिला। बेडशीट पर कम से कम 12 जगह चाकू लगने के निशान थे। पुलिस को घर के बाहर मॉक मिली। उसके हाथों और बाजुओं पर भी कट लगे थे।
शुरुआत में मॉक ने खुद को पीड़ित बताते हुए कहा कि उसकी मां ने उस पर चाकू से हमला करने की कोशिश की थी और उसने अपनी जान बचाने के लिए जवाब दिया। लेकिन पूछताछ आगे बढ़ी तो घटना को लेकर उसके बयान एक जैसे नहीं रहे।
मॉक ने एक बयान में बताया कि वह अपनी मां से एक नौकरी के इंटरव्यू के बारे में बात कर रही थी। इसी दौरान उसने दावा किया कि अनीता चाकू तेज करने लगीं और फिर चाकू लेकर उसके पीछे आईं। मॉक के मुताबिक, इसी दौरान दोनों के बीच संघर्ष हुआ और उसने मां पर चाकू चला दिया।
लेकिन जांचकर्ताओं के सामने उसने एक और बेहद अहम बात कही—“मुझे उसे मारना ही था, वह रुकने वाली नहीं थी।” बाद में उसने यह भी कहा कि उसे विश्वास था कि उसकी मां ‘डेविल यानी शैतान’ बन चुकी थीं। यही विश्वास इस मामले की सबसे अहम कड़ियों में से एक बन गया।

कौन थी एंजेलिन मॉक?
एंजेलिन मॉक कोई आम आरोपी नहीं थी। वह कई साल तक टीवी पत्रकारिता में काम कर चुकी थी। 2002 से 2004 के बीच वह नेब्रास्का के लिंकन में KLKN में स्पोर्ट्स रिपोर्टर रही। इसके बाद ओक्लाहोमा सिटी के KOKH में काम किया। 2011 से 2015 तक वह सेंट लुइस के KTVI में मॉर्निंग न्यूज एंकर रही।
बाद में उसने टीवी पत्रकारिता छोड़कर कॉर्पोरेट सेक्टर में काम शुरू किया। हत्या के समय वह एक सॉफ्टवेयर कंपनी में सेल्स से जुड़ी नौकरी कर रही थी। वह अपनी मां अनीता और सौतेले पिता बैरी एवर्स के साथ विचिटा में रह रही थी। परिवार के मुताबिक, वह कई साल पहले सेंट लुइस में नौकरी जाने के बाद विचिटा वापस आई थी।
मानसिक बीमारी की बात कब सामने आई?
हत्या की जांच के दौरान मॉक की मानसिक स्थिति का इतिहास भी सामने आया। उसके सौतेले पिता बैरी एवर्स ने पुलिस को बताया कि मॉक को पहले बाइपोलर डिसऑर्डर बताया गया था, लेकिन बाद में उसका निदान बदलकर स्किजोएफेक्टिव डिसऑर्डर किया गया।
परिवार और अदालत से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, मॉक को कई बार ऐसी धारणाएं होती थीं जो वास्तविकता से मेल नहीं खाती थीं।

वह लोगों को कभी-कभी रोबोट या असली इंसान नहीं मानती थी। भगवान से बात करने और खुद को ‘एंटी-क्राइस्ट’ बताने जैसी बातें भी उसके व्यवहार का हिस्सा थीं। उसे इलाज और दवाएं दी जा रही थीं। परिवार ने यह भी बताया कि उसने पहले मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज कराया था और कुछ समय अस्पताल में भी रही थी।
बैरी एवर्स ने यह जरूर कहा था कि उन्होंने मॉक को पहले हिंसक व्यक्ति के तौर पर नहीं देखा था। यानी मानसिक बीमारी का इतिहास था, लेकिन परिवार के लिए 31 अक्टूबर की घटना जैसी हिंसा की पहले कोई ऐसी स्पष्ट आशंका नहीं थी।
स्किजोएफेक्टिव डिसऑर्डर एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें मनोदशा से जुड़े लक्षणों के साथ भ्रम या अन्य मनोविकारी लक्षण भी हो सकते हैं।
हालांकि, इस बीमारी से जूझने वाले व्यक्ति को हिंसक मानना सही नहीं है। मॉक के मामले में इसका उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत में उसकी मानसिक स्थिति और घटना के समय उसकी सोच को लेकर अलग से मूल्यांकन हुआ था।

हत्या के बाद जनवरी 2026 में अदालत ने मॉक को मुकदमे का सामना करने के लिए अयोग्य माना और उसे मानसिक मूल्यांकन व इलाज के लिए Larned State Hospital भेजा।
जुलाई में उसे ट्रायल के लिए सक्षम माना गया। इसके बाद अगस्त 2026 में उसने फर्स्ट-डिग्री मर्डर का दोष स्वीकार कर लिया।
5 अक्टूबर 2026 को अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। वह 25 साल बाद पैरोल के लिए पात्र हो सकेगी। इस तरह कभी टीवी पर सुबह की खबरें पढ़ने वाली एंजेलिन मॉक की कहानी अपनी ही मां की हत्या के मामले में उम्रकैद तक पहुंच गई।
इस केस में हत्या के साथ-साथ उसकी बदलती कहानी और मानसिक स्थिति ने जांच को एक अलग दिशा दी, जबकि अदालत में दोष स्वीकार करने के बाद अब इस मामले का कानूनी फैसला हो चुका है।

