Rohtas Cyber Crime: रोहतास में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस की जांच व्यवस्था और कार्रवाई की समीक्षा की गई। शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी डा. सत्यप्रकाश ने साइबर थाना, रोहतास का वार्षिक निरीक्षण कर लंबित मामलों की प्रगति, तकनीकी संसाधनों और साक्ष्य संरक्षण की व्यवस्था का जायजा लिया।
उन्होंने अधिकारियों को साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित संज्ञान और तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
थाना परिसर से तकनीकी शाखा तक व्यवस्था की जांच
वार्षिक निरीक्षण के दौरान डीआईजी ने साइबर थाना परिसर के विभिन्न हिस्सों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने रिकॉर्ड रूम, केस डायरी, मालखाना, साक्ष्य संरक्षण कक्ष और तकनीकी शाखा का निरीक्षण किया।
तकनीकी शाखा में इस्तेमाल किए जा रहे कंप्यूटर, सर्वर और अन्य उपकरणों की स्थिति की भी जानकारी ली गई। इसके साथ ही साइबर अपराध से संबंधित लंबित कांडों की समीक्षा करते हुए केस डायरी को नियमित रूप से अपडेट रखने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए।
ऑनलाइन ठगी से लेकर हैकिंग तक मामलों की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान डीआईजी ने साइबर अपराध से जुड़े अलग-अलग मामलों की जांच प्रक्रिया के बारे में पुलिस पदाधिकारियों से जानकारी ली। इनमें ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया फ्रॉड, बैंक खातों से अवैध निकासी और हैकिंग जैसे मामले शामिल रहे।
इसके अलावा अश्लील सामग्री के प्रसार, फेक न्यूज, हेट स्पीच तथा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराध की जांच के तरीके पर भी चर्चा की गई।
डीआईजी ने अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की कि ऐसे मामलों में डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों को किस तरह सुरक्षित रखा जा रहा है और जांच को आगे बढ़ाने के लिए किन तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
1930 पर आने वाली शिकायतों के त्वरित निष्पादन पर जोर
डीआईजी डा. सत्यप्रकाश ने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ 1930 पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा।
साइबर ठगी के मामलों में समय पर शिकायत और कार्रवाई महत्वपूर्ण होने के कारण पुलिस अधिकारियों को मामलों को प्राथमिकता के साथ देखने का निर्देश दिया गया।
साइबर जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश
डीआईजी ने केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय आम लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को साइबर जागरूकता अभियान चलाने और लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने के जरूरी उपायों की जानकारी देने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लोगों को साइबर अपराध के तरीकों और उनसे बचाव के बारे में लगातार जागरूक करना जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान एसपी राज, साइबर थानाध्यक्ष गौरव कुमार यादव समेत साइबर थाने के पुलिस पदाधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने डीआईजी को साइबर थाना से जुड़े मामलों और जांच प्रक्रिया की जानकारी दी।
वार्षिक निरीक्षण के दौरान लंबित मामलों की समीक्षा के साथ तकनीकी संसाधनों, साक्ष्य संरक्षण और शिकायतों के त्वरित निपटारे पर विशेष जोर दिया गया।