आइबीए और यूएफबीयू की वार्ता के बाद आंदोलन स्थगित, बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर आगे बढ़ी बातचीत; पीएलआइ योजना में संशोधन का प्रस्ताव सरकार को देगा आइबीए
पटना। बिहार समेत देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित बैंक हड़ताल फिलहाल टल गई है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच रविवार देर रात हुई बैठक में आंदोलन और हड़ताल के प्रस्तावित कार्यक्रमों को स्थगित करने पर सहमति बनी।
इसका सीधा मतलब है कि इन तारीखों में बैंक बंद रहने की आशंका फिलहाल खत्म हो गई है और बैंकिंग सेवाओं पर प्रस्तावित हड़ताल का असर नहीं पड़ेगा।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब बैंकिंग संगठनों की ओर से कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर आंदोलन का कार्यक्रम प्रस्तावित था। वार्ता के दौरान पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह, स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए
प्रस्तावित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना और 8 मार्च 2024 की बैठक के मिनट्स में दर्ज लंबित मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इन मुद्दों पर आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।
ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहत क्या है?
28 से 30 सितंबर के बीच बैंक हड़ताल का कार्यक्रम स्थगित होने का सबसे बड़ा असर बैंक ग्राहकों पर पड़ेगा। हड़ताल होने की स्थिति में बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने के साथ नकद निकासी, जमा, चेक से जुड़े कार्य, शाखा आधारित भुगतान और अन्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका थी।
अब हड़ताल स्थगित होने से इन तीन दिनों में बैंक शाखाओं के सामान्य रूप से काम करने की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, किसी बैंक या स्थानीय स्तर पर अलग प्रशासनिक कारणों से होने वाले बदलाव को इस फैसले से अलग समझना होगा।
यह फैसला बिहार के बैंक ग्राहकों के लिए भी राहत वाला है, क्योंकि प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल के कारण लगातार कई दिनों तक बैंकिंग कामकाज प्रभावित होने की आशंका थी।
पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह पर बनेगी उच्चस्तरीय समिति
वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह से जुड़ा है। यूएफबीयू के अनुसार, इस मुद्दे पर तत्काल एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है।
यह समिति पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े सभी संभावित विकल्पों पर विचार करेगी। इसके साथ ही संबंधित पक्षों से चर्चा कर ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा, जिसे सभी हितधारकों और खासकर बैंक ग्राहकों के लिए स्वीकार्य बनाया जा सके।
इसका मतलब क्या है?
यह समझना जरूरी है कि अभी पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। फिलहाल इस मुद्दे पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने पर सहमति बनी है।
यानी बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर बातचीत अब एक औपचारिक उच्चस्तरीय प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ेगी। समिति के विचार और संबंधित पक्षों के साथ होने वाली चर्चा के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
पीएलआइ योजना पर भी बनी सहमति
बैठक में स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए प्रस्तावित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना पर भी चर्चा हुई।
यूएफबीयू के अनुसार, यूनियनों और एसोसिएशनों ने इस प्रस्ताव को लेकर अपनी आपत्तियां रखी थीं। इन आपत्तियों को देखते हुए आइबीए सरकार के सामने योजना में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव रखेगा।
इसका अर्थ यह है कि पीएलआइ योजना को लेकर भी बातचीत का रास्ता खुला हुआ है। फिलहाल योजना को लेकर अंतिम रूप से कोई नया बदलाव लागू होने की बात नहीं कही गई है। आइबीए अब यूनियनों और एसोसिएशनों की आपत्तियों के आधार पर सरकार के समक्ष संशोधन का प्रस्ताव रखेगा।
8 मार्च 2024 की बैठक के लंबित मुद्दों पर भी बातचीत
आइबीए और यूएफबीयू के बीच केवल हड़ताल से जुड़े तत्काल मुद्दों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि 8 मार्च 2024 को हुई बैठक के मिनट्स में दर्ज शेष मुद्दों पर भी आगे बातचीत करने पर सहमति बनी है।
दोनों पक्ष इन लंबित मुद्दों के समाधान के लिए जल्द चर्चा करेंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि हड़ताल टलने के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कई पुराने मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।
आंदोलन क्यों टला?
यूएफबीयू की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हड़ताल और आंदोलन स्थगित करने का फैसला वार्ता में बनी सहमतियों को देखते हुए लिया गया है।
यानी यूनियनों और आइबीए के बीच हुई बातचीत में कुछ प्रमुख मांगों और लंबित विषयों पर आगे की प्रक्रिया तय होने के बाद तत्काल आंदोलन की जरूरत नहीं समझी गई।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि सभी मुद्दों का अंतिम समाधान हो गया है। कई मामलों में अभी समिति की रिपोर्ट, सरकार के स्तर पर विचार और आगे की वार्ता बाकी है।
बैंक ग्राहकों को अभी क्या समझना चाहिए?
बैंक ग्राहकों के लिए इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि 28, 29 और 30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल स्थगित है।
जिन लोगों ने इन तारीखों में बैंक शाखा जाकर जरूरी काम कराने की योजना बनाई थी, उन्हें प्रस्तावित हड़ताल के कारण उसे टालने की जरूरत फिलहाल नहीं है। हालांकि, सामान्य बैंकिंग व्यवस्था में भी छुट्टी, स्थानीय अवकाश या किसी बैंक की अपनी व्यवस्था के कारण सेवाओं में बदलाव संभव हो सकता है।
ग्राहकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हड़ताल स्थगित होना और बैंकिंग सप्ताह में पांच दिन की व्यवस्था लागू होना दो अलग-अलग बातें हैं। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को लेकर अभी समिति और आगे की प्रक्रिया के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
बैंकिंग सेक्टर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?
इस घटनाक्रम को केवल तीन दिन की हड़ताल टलने के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे बैंक कर्मचारियों, अधिकारियों, प्रबंधन और ग्राहकों से जुड़े कई मुद्दे हैं।
पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह का मुद्दा सीधे तौर पर बैंक शाखाओं के कामकाज के दिनों से जुड़ा है। यदि भविष्य में इस पर कोई निर्णय होता है, तो इसका असर बैंक कर्मचारियों की कार्यप्रणाली के साथ ग्राहकों के शाखा-आधारित बैंकिंग अनुभव पर भी पड़ सकता है। इसलिए समिति में ग्राहकों के हित को ध्यान में रखने की बात महत्वपूर्ण है।
दूसरी ओर, पीएलआइ योजना का विषय बैंक अधिकारियों के प्रदर्शन और प्रोत्साहन व्यवस्था से संबंधित है। इस पर यूनियनों की आपत्तियों के बाद संशोधन का प्रस्ताव सरकार को दिया जाना बताता है कि इस विषय पर अभी सहमति की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
आगे क्या होगा?
अब आगे की नजर मुख्य रूप से तीन चीजों पर रहेगी।
पहला, पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह के लिए बनने वाली उच्चस्तरीय समिति इस मुद्दे पर क्या विकल्प सुझाती है।
दूसरा, पीएलआइ योजना में आइबीए की ओर से सरकार के समक्ष क्या संशोधन प्रस्ताव रखा जाता है।
तीसरा, 8 मार्च 2024 की बैठक में दर्ज लंबित मुद्दों पर आइबीए और यूएफबीयू के बीच बातचीत से क्या समाधान निकलता है।
इन तीनों विषयों पर आगे होने वाली बातचीत ही यह तय करेगी कि बैंकिंग क्षेत्र में लंबित मुद्दों का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है।
फिलहाल ग्राहकों को राहत
कुल मिलाकर रविवार रात हुई आइबीए-यूएफबीयू वार्ता के बाद 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित बैंक हड़ताल और आंदोलन स्थगित हो गया है। इससे बिहार समेत देशभर में बैंकिंग सेवाओं के प्रभावित होने की तत्काल आशंका टल गई है।
हालांकि, पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह, पीएलआइ योजना और अन्य लंबित मुद्दों पर अभी प्रक्रिया जारी रहेगी। इसलिए मौजूदा स्थिति को हड़ताल का स्थगन और बातचीत के रास्ते का खुलना माना जा सकता है, न कि सभी विवादों का अंतिम समाधान।
बैंक ग्राहकों के लिए फिलहाल सबसे अहम खबर यही है—28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल टल गई है और इन तारीखों को लेकर हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं बंद होने की आशंका फिलहाल नहीं है।