तिरुवनंतपुरम में Virat Kohli का ऐसा विराट रूप दिखा, जिसमें क्लास भी था, आक्रामकता भी और रिकॉर्डों की झड़ी भी; वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 139 रन की पारी ने भारत को 8 विकेट से दिलाई शानदार जीत
तिरुवनंतपुरम, 27 सितंबर 2026। कुछ पारियां सिर्फ स्कोरबोर्ड पर दर्ज नहीं होतीं, बल्कि क्रिकेट के इतिहास में अपनी अलग जगह बना लेती हैं। रविवार को तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में विराट कोहली ने ऐसी ही एक पारी खेली।
वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में कोहली ने सिर्फ 88 गेंदों पर नाबाद 139 रन बनाकर एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मंच पर दबाव कितना भी हो, जब उनका बल्ला बोलता है तो रिकॉर्ड खुद उनके पीछे चल पड़ते हैं। उनकी इस पारी में 10 चौके और 9 छक्के शामिल रहे।
The bat raise, the roar, the milestone 👏👏
A Virat Kohli show in Thiruvananthapuram 🍿
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— BCCI (@BCCI) September 27, 2026
कोहली की इस पारी की सबसे खास बात सिर्फ उनका शतक नहीं था। उन्होंने इस दौरान अपने वनडे करियर का 55वां शतक पूरा किया और 15,000 वनडे रन के आंकड़े को पार कर लिया। वह इस मुकाम तक पहुंचने वाले दुनिया के केवल दूसरे बल्लेबाज बने। उनसे पहले यह उपलब्धि सचिन तेंदुलकर ने हासिल की थी।
यानी एक ही पारी में विराट ने शतक भी लगाया, टीम को जीत भी दिलाई और भारतीय क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में अपना नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ दर्ज करा दिया।
जब विराट का बल्ला चला तो हर गेंद पर दिखा ‘किंग कोहली’ का अंदाज
वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 295 रन बनाए थे। लक्ष्य 296 रन का था। भारत को शुरुआत में रोहित शर्मा के रूप में झटका लगा, लेकिन इसके बाद शुभमन गिल और विराट कोहली ने पारी को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया।
गिल ने शानदार 110 रन बनाए, जबकि दूसरे छोर पर विराट कोहली ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसने मैच का पूरा रुख बदल दिया। दोनों के बीच 151 रनों की साझेदारी हुई और भारत की जीत लगभग तय हो गई।
कोहली की बल्लेबाजी में अनुभव और आक्रामकता का शानदार मेल दिखाई दिया। शुरुआत में उन्होंने परिस्थितियों को समझा, गेंदबाजों को परखा और फिर जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ी, उनके शॉट्स में आक्रमण की धार बढ़ती गई।
उनके 9 छक्के इस बात की गवाही देते हैं कि यह केवल तकनीक और धैर्य की पारी नहीं थी। यह जरूरत पड़ने पर गेंदबाजों पर पूरी तरह हावी होने वाली विराट की वही बल्लेबाजी थी, जिसके लिए उन्हें दुनिया के महानतम आधुनिक वनडे बल्लेबाजों में गिना जाता है।
55वां शतक, लेकिन विराट के लिए असली लक्ष्य टीम की जीत
विराट कोहली के करियर में रिकॉर्ड अब कोई नई बात नहीं रह गई है। लेकिन उनकी रविवार की पारी की खूबसूरती इस बात में भी रही कि व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद उनकी बल्लेबाजी का केंद्र टीम का लक्ष्य रहा।
15,000 वनडे रन पूरे करने के बाद प्रस्तुति समारोह में कोहली ने खुद कहा कि व्यक्तिगत आंकड़े उनके लिए प्राथमिक लक्ष्य नहीं रहे हैं। उनका ध्यान परिस्थितियों को पढ़ने और टीम की जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी करने पर रहता है।
यही विराट कोहली की बल्लेबाजी की पहचान रही है। वह सिर्फ रन बनाने वाले बल्लेबाज नहीं हैं, बल्कि मैच की स्थिति को समझकर अपनी बल्लेबाजी की गति बदलने वाले खिलाड़ी हैं। रविवार को भी उन्होंने यही किया।
जब तेजी से रन बनाने की जरूरत थी, तो बड़े शॉट लगाए और जब साझेदारी को संभालने की जरूरत थी, तो स्ट्राइक रोटेट की। नतीजा यह रहा कि भारत ने 296 रन का लक्ष्य केवल 41.4 ओवर में दो विकेट खोकर हासिल कर लिया, यानी 50 गेंद शेष रहते भारत ने मुकाबला अपने नाम कर लिया।
15 हजार ODI रन: एक और ऐतिहासिक मुकाम
विराट कोहली के लिए यह मैच एक और बड़ी वजह से यादगार बन गया। उन्होंने वनडे क्रिकेट में 15,000 रन पूरे कर लिए। वह ऐसा करने वाले दूसरे बल्लेबाज हैं।
इस उपलब्धि ने एक बार फिर उनके वनडे करियर की निरंतरता और लंबी अवधि तक शीर्ष स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता को सामने रखा है। सचिन तेंदुलकर के बाद इस विशिष्ट क्लब में शामिल होना भारतीय क्रिकेट के लिए भी खास उपलब्धि है।
कोहली ने यह मुकाम हासिल करते हुए एक और रिकॉर्ड अपने नाम किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह 15,000 वनडे रन तक पहुंचने वाले सबसे तेज बल्लेबाज भी बने और घरेलू परिस्थितियों में वनडे रनों के मामले में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया।
उम्र बढ़ी, लेकिन बल्ले की भूख आज भी वही
विराट कोहली की रविवार की पारी का एक पहलू और भी खास है। क्रिकेट में उम्र बढ़ने के साथ खिलाड़ियों से लगातार प्रदर्शन की उम्मीदों पर सवाल उठते हैं, लेकिन कोहली ने अपने बल्ले से इसका जवाब दिया।
37 साल की उम्र में 88 गेंदों पर 139 रन की नाबाद पारी, उसमें 9 छक्के और 10 चौके—यह आंकड़ा बताता है कि अनुभव के साथ उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता भी कायम है।
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व ऑलराउंडर जेपी डुमिनी भी पहले कह चुके हैं कि खिलाड़ियों का आकलन उम्र के बजाय उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाना चाहिए और उन्होंने विराट कोहली के लगातार प्रदर्शन का उदाहरण दिया था।
आज तिरुवनंतपुरम में कोहली ने एक बार फिर अपने प्रदर्शन से वही बात कही—बड़े खिलाड़ी अपनी उम्र से नहीं, अपने बल्ले से अपनी पहचान बनाते हैं।
गिल के साथ मिलकर विराट ने लिखी जीत की कहानी
भारत की इस जीत में शुभमन गिल की शतकीय पारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही। गिल ने 108 गेंदों पर 110 रन बनाए। लेकिन कोहली के साथ उनकी 151 रन की साझेदारी ने वेस्टइंडीज की वापसी की सारी संभावनाओं को लगभग खत्म कर दिया।
दोनों बल्लेबाजों ने जिस तरह पारी को आगे बढ़ाया, उसने भारतीय क्रिकेट की नई और अनुभवी पीढ़ी के बीच शानदार तालमेल की तस्वीर भी पेश की। एक तरफ गिल का आत्मविश्वास और दूसरी तरफ कोहली का अनुभव—दोनों ने मिलकर लक्ष्य को बेहद आसान बना दिया।
मैच खत्म करने का अंदाज भी रहा विराट वाला
विराट कोहली की इस पारी का अंत भी उसी अंदाज में हुआ, जैसा उनके प्रशंसक उनसे उम्मीद करते हैं। लक्ष्य के करीब पहुंचने के बाद उन्होंने छक्का लगाकर भारत को जीत दिलाई। उनकी नाबाद 139 रन की पारी में कुल नौ छक्के आए और आखिरी वार भी उन्हीं के बल्ले से निकला।
यानी शुरुआत से लेकर अंत तक मुकाबले पर विराट की छाप रही।
2027 विश्व कप की तैयारी के बीच विराट का बड़ा संदेश
भारत के लिए यह वनडे सीरीज 2027 विश्व कप की तैयारियों की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक विराट कोहली ने 2027 विश्व कप को भारत के लिए अपना आखिरी विश्व कप बताया है और उसे जीतना अपनी प्रेरणा बताया है।
ऐसे में आज की पारी का महत्व सिर्फ एक मैच की जीत तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ते भारतीय अभियान में कोहली की भूमिका का संकेत भी देती है।
हालांकि क्रिकेट में हर मैच की अपनी परिस्थितियां होती हैं और भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी कोई पारी नहीं देती, लेकिन आज का प्रदर्शन इतना जरूर बताता है कि विराट कोहली अभी भी बड़े मुकाबलों में अपनी बल्लेबाजी से मैच की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं।
विराट के नाम एक और यादगार दिन
विराट कोहली के करियर में रिकॉर्डों की कमी नहीं है। लेकिन कुछ दिन ऐसे होते हैं जब आंकड़े भी खिलाड़ी की महानता का पूरा वर्णन नहीं कर पाते। तिरुवनंतपुरम में रविवार का दिन भी कुछ ऐसा ही रहा।
88 गेंद, नाबाद 139 रन, 10 चौके, 9 छक्के, 55वां वनडे शतक और 15,000 वनडे रन। इन आंकड़ों के साथ भारत की आठ विकेट की शानदार जीत।
यह सिर्फ एक शतकीय पारी नहीं थी। यह अनुभव, फिटनेस, तकनीक, आक्रामकता और मैच को समझने की क्षमता का ऐसा प्रदर्शन था, जिसने एक बार फिर विराट कोहली को क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया।
विराट ने एक बार फिर बता दिया कि जब लक्ष्य सामने हो और टीम को किसी ऐसे बल्लेबाज की जरूरत हो जो दबाव को अपने पक्ष में बदल सके, तो उनका बल्ला अब भी कहानी लिखना जानता है।
आज तिरुवनंतपुरम में स्कोरबोर्ड पर सबसे बड़ा आंकड़ा 139 था, लेकिन विराट की पारी की असली कीमत उस जीत में थी, जो भारत ने 50 गेंद बाकी रहते हासिल की। रिकॉर्ड उनके नाम होते गए, लेकिन अंत में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि रही—भारत की जीत। यही विराट कोहली की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी पहचान है।