कानपुर: जिस हत्याकांड में कुछ दिन पहले तक मृतक दवा कारोबारी की बहू को कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा था, उसी केस ने अब ऐसी करवट ली है कि जांच की पूरी दिशा बदल गई है। कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस ने उनके बेटे सुब्रत मिनोचा को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक, हत्या के आरोपी पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम ने पूछताछ के दौरान अपना बयान बदला और दावा किया कि हत्या की सुपारी उसे सुब्रत ने दी थी। इसके बाद पुलिस ने सुब्रत को अन्य आरोपियों के सामने बैठाकर पूछताछ की और उपलब्ध डिजिटल व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से बयानों का मिलान शुरू किया।
पहले बहू पर शक, अब बेटे की गिरफ्तारी ने बदली कहानी
विनीत मिनोचा की हत्या 5 सितंबर को कानपुर के कल्याणपुर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट में हुई थी। 63 वर्षीय कारोबारी का शव उनके फ्लैट में मिला था। पोस्टमार्टम में शरीर पर 26 चाकू के घाव बताए गए थे। शुरुआती जांच में पुलिस ने उनकी बहू शालू को कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया था और आरोप लगाया था कि उसने पुराने कर्मचारी विशाल गौतम को हत्या के लिए तैयार किया।
लेकिन अब पूछताछ में सामने आए नए बयान ने पुलिस को फिर से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
नौकर के बदले बयान से सुब्रत तक पहुंची पुलिस
पुलिस के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम ने कस्टडी रिमांड के दौरान अपना बयान बदला। पहले उसने शालू पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था, लेकिन अब उसने दावा किया कि सुब्रत ने उसे हत्या के लिए पैसे देने की बात कही थी और पकड़े जाने की स्थिति में अपनी पत्नी शालू का नाम लेने को कहा था।
इसी बयान के बाद पुलिस ने सुब्रत को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि पुलिस केवल एक बयान के आधार पर निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहती। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, विशाल के नए बयान के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
कॉल रिकॉर्ड ने भी बढ़ाई जांच की गंभीरता
जांच में आरोपियों के बीच हुई बातचीत भी पुलिस के रडार पर है। रिपोर्टों के मुताबिक, हत्या से पहले के 21 दिनों में सुब्रत, शालू और विशाल के बीच बड़ी संख्या में कॉल हुए थे। एक रिपोर्ट में तीनों के बीच करीब 330 कॉल का उल्लेख है, जिनमें बड़ी संख्या सुब्रत और विशाल के बीच हुई बातचीत की बताई गई है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन बातचीत का हत्या की साजिश से कोई सीधा संबंध था या नहीं।
यही वह बिंदु है जहां जांच अब सिर्फ आरोपों से आगे बढ़कर डिजिटल एविडेंस पर केंद्रित हो रही है।
हत्या से पहले नया सिम, फिर सुब्रत को कॉल
पुलिस जांच में एक और अहम बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विशाल ने हत्या से कुछ दिन पहले नया सिम कार्ड लिया था और उस नंबर से की गई पहली कॉल सुब्रत को गई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क की जानकारी भी जांच में सामने आई।
पुलिस अब इस संपर्क का टाइमलाइन तैयार कर रही है—किस समय किससे बात हुई, हत्या से पहले और बाद में कितनी बातचीत हुई और क्या इन संपर्कों का घटनाक्रम से कोई संबंध है।
डुप्लीकेट चाबी और खून से सने कपड़े बरामद
जांच के दौरान पुलिस को फ्लैट में प्रवेश से जुड़ी एक डुप्लीकेट चाबी भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा खून से सने कपड़े भी पुलिस ने बरामद किए हैं। पुलिस इन वस्तुओं को वारदात से जोड़कर फोरेंसिक और अन्य साक्ष्यों से मिलाने में जुटी है।
यह बरामदगी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हमलावर फ्लैट तक कैसे पहुंचे और वारदात के बाद इस्तेमाल किए गए सामान को कहां छिपाया गया।
हत्या को लूट जैसा दिखाने की योजना?
जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती योजना ऐसी थी कि विनीत मिनोचा की मौत स्वाभाविक या किसी अन्य कारण से हुई लगे। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हमलावरों ने उन्हें मारने के लिए पहले अलग तरीका अपनाने की योजना बनाई थी, लेकिन घटनास्थल पर परिस्थितियां बदल गईं और चाकू से हमला किया गया।
हालांकि इस पूरी कहानी के अलग-अलग हिस्से आरोपियों के बयानों पर आधारित हैं और पुलिस अभी इनका स्वतंत्र साक्ष्यों से मिलान कर रही है।
बेटे पर कर्ज का एंगल भी जांच में
ताजा जांच में सुब्रत की आर्थिक स्थिति भी पुलिस के फोकस में आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस करीब 15 लाख रुपये के कर्ज से जुड़े एंगल की जांच कर रही है, जबकि दूसरी रिपोर्ट में इससे अधिक कर्ज और सट्टे/कैसीनो से जुड़ी आदतों के आरोप सामने आए हैं। इन दावों में अंतर है, इसलिए पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी एक आंकड़े को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
जांच का मूल सवाल यही है कि क्या आर्थिक दबाव, पारिवारिक विवाद और संपत्ति से जुड़े कथित विवाद ने हत्या की साजिश को जन्म दिया।
संपत्ति का एंगल भी सामने आया
पूछताछ में यह दावा भी सामने आया है कि सुब्रत को आशंका थी कि उसके पिता अपनी संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर सकते हैं। पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है। दूसरी तरफ शालू ने हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया है।
यानी फिलहाल जांच में आर्थिक दबाव, पारिवारिक विवाद, संपत्ति और आरोपियों के आपसी संपर्क—कई पहलू एक साथ जांच के दायरे में हैं।
क्या शालू को क्लीन चिट मिल गई?
यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। जवाब है—अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
पुलिस ने पहले शालू की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद जांच की दिशा बदली है। पुलिस अभी शालू, सुब्रत और अन्य आरोपियों के बयानों को कॉल डिटेल, CCTV, बरामद सामान और दूसरे साक्ष्यों से मिलाने में जुटी है।
इसलिए फिलहाल यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि सुब्रत की गिरफ्तारी ने केस की जांच का केंद्र बदल दिया है, न कि यह कि बाकी सभी आरोपियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है।
अंतिम संस्कार में पिता की अर्थी को दिया था कंधा
इस केस की कहानी का एक भावनात्मक पहलू भी सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिता के अंतिम संस्कार के दौरान सुब्रत अपनी दादी के गले लगकर रोते हुए दिखाई दिया था और उसने पिता की अर्थी को कंधा भी दिया था। अब उसी बेटे की गिरफ्तारी ने इस हत्याकांड को और रहस्यमय बना दिया है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़े सवाल
अब जांच तीन अहम बिंदुओं पर टिक गई है—
पहला, विशाल ने अपना बयान क्यों बदला और उसका नया बयान कितने स्वतंत्र साक्ष्यों से पुष्ट होता है?
दूसरा, सुब्रत और बाकी आरोपियों के बीच हुई बातचीत का हत्या की योजना से वास्तविक संबंध क्या था?
तीसरा, शालू की भूमिका क्या थी और क्या उसके खिलाफ पहले लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है?
इन सवालों के जवाब CCTV, कॉल डिटेल, फोरेंसिक रिपोर्ट, बरामद सामान और आरोपियों के बयानों के आपसी मिलान से निकलेंगे।
जांच की दिशा बदली, कहानी अभी पूरी नहीं
विनीत मिनोचा हत्याकांड में सबसे बड़ा अपडेट फिलहाल सुब्रत की गिरफ्तारी है। शुरुआती जांच में जिस बहू पर शक केंद्रित था, अब पुलिस बेटे की कथित भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में सुब्रत के कथित कबूलनामे का भी उल्लेख है, लेकिन किसी आरोपी का पुलिस पूछताछ में कथित बयान अपने आप में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं होता।
अब असली परीक्षा उन डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की होगी, जिनसे पुलिस यह स्थापित करेगी कि 5 सितंबर की रात वास्तव में क्या हुआ और इस हत्याकांड की साजिश में किसकी क्या भूमिका थी।