जहानाबाद। बिहार के जहानाबाद में डाक के जरिए रंगदारी मांगने का मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। सूर्य वर्चस स्कूल के संचालक मनीष कुमार से 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है। धमकी भरे पत्र में भेजने वाले ने खुद को टीपीसी बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया है। रकम नहीं देने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई है।
डाक से पहुंचा धमकी भरा पत्र
मिली जानकारी के अनुसार, मनीष कुमार को 21 सितंबर को डाक के माध्यम से धमकी भरा पत्र मिला। पत्र मलहचक कुटिया स्थित लोक नगर शाखा के पते पर भेजा गया था।
पत्र में 15 लाख रुपये देने की मांग की गई है। कथित तौर पर इसमें रकम की व्यवस्था होने के बाद स्कूल की छत पर लाल झंडा लगाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद गिरोह के किसी व्यक्ति के वहां पहुंचकर रकम लेने की बात कही गई।
रकम नहीं देने पर गंभीर अंजाम की धमकी
धमकी भरे पत्र में रंगदारी की रकम नहीं देने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाने और हत्या तक की धमकी दी गई है। इस तरह की धमकी मिलने के बाद स्कूल संचालक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से संपर्क किया।
मनीष कुमार ने जहानाबाद के एसपी कोटा किरण कुमार से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
अरिस्टो फार्मा के एमडी के दामाद हैं मनीष कुमार
रिपोर्ट के अनुसार, मनीष कुमार अरिस्टो फार्मा के मैनेजिंग डायरेक्टर उमेश शर्मा उर्फ भोला बाबू के दामाद हैं। इस वजह से भी पुलिस मामले को गंभीरता से देख रही है और धमकी पत्र के पीछे की वास्तविक वजह तथा आरोपितों की पहचान पता लगाने में जुटी है।
एक अन्य कारोबारी से भी मांगी गई 25 लाख की रंगदारी
इसी मामले में एक अन्य व्यक्ति को भी इसी तरह का धमकी भरा पत्र मिलने की जानकारी सामने आई है। स्कूल भवन के मालिक और व्यवसायी प्रवीण कुमार शर्मा से 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है।
इस तरह दोनों मामलों में कुल 40 लाख रुपये की रंगदारी मांगने की बात सामने आई है। पुलिस दोनों पत्रों के बीच संबंध की जांच कर रही है।
दोनों पत्रों में मिली समानताएं
पुलिस की शुरुआती जांच में दोनों धमकी भरे पत्रों में कई समानताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लिखावट, लिफाफे, डाक टिकट और धमकी देने का तरीका एक जैसा बताया जा रहा है।
दोनों पत्रों में प्रेषक के तौर पर बभना निवासी सहदेव सिंह का नाम दर्ज होने की जानकारी है। हालांकि, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि पत्र वास्तव में उसी व्यक्ति ने भेजे हैं या किसी अन्य ने उसका नाम इस्तेमाल किया है।
असली गैंग या किसी ने किया नाम का इस्तेमाल?
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि धमकी के पीछे वास्तव में टीपीसी बिश्नोई गैंग का हाथ है या स्थानीय अपराधियों ने डर पैदा करने के लिए इस नाम का इस्तेमाल किया है।
पुलिस दोनों संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है। धमकी पत्र और लिफाफे की जांच के साथ-साथ पत्र भेजने के स्रोत का भी पता लगाया जा रहा है।
पुलिस कर रही डाकघर और अन्य सुरागों की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने धमकी भरे पत्र और लिफाफे को जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके अलावा संबंधित डाकघर से जानकारी जुटाने और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पत्र कहां से पोस्ट किए गए और इन्हें भेजने वाला व्यक्ति कौन था।
फिलहाल मामले में जांच जारी है। पुलिस के सामने चुनौती यह पता लगाने की है कि 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगने वाले इस पत्र के पीछे कौन है और टीपीसी बिश्नोई गैंग के नाम का इस्तेमाल क्यों किया गया।