Hot Tea Coffee Cancer Risk: चाय या कॉफी पीना भारत में रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। कई लोग इसे इतना गर्म पीना पसंद करते हैं कि कप से उठती भाप के बीच ही पहला घूंट ले लेते हैं। लेकिन एक नई बड़ी स्टडी ने बहुत गर्म पेय पीने की आदत को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, पेय को बहुत गर्म तापमान पर पीने और ओसोफेगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) यानी खाने की नली के एक प्रकार के कैंसर के बीच संबंध पाया गया है।
हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है—स्टडी में यह नहीं कहा गया कि चाय या कॉफी अपने आप कैंसर का कारण बनती हैं। चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि इन्हें कितने गर्म तापमान पर पिया जाता है।
करीब 9.8 लाख लोगों के आंकड़ों का किया गया अध्ययन
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के Oxford Population Health के शोधकर्ताओं ने करीब 9.8 लाख लोगों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें UK Biobank और Million Women Study के प्रतिभागियों को शामिल किया गया था।
लोगों से पूछा गया कि वे गर्म पेय को सामान्य तौर पर किस तापमान पर पीना पसंद करते हैं—बहुत गर्म, गर्म या गुनगुना। इसके बाद लंबे समय तक उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया।
यह शोध International Journal of Cancer में प्रकाशित हुआ है और Cancer Research UK की फंडिंग से किया गया था।
बहुत गर्म पेय वालों में करीब 3 गुना ज्यादा जोखिम
रिसर्च में पाया गया कि जो लोग अपने पेय को गुनगुने तापमान पर पीना पसंद करते थे, उनकी तुलना में गर्म पेय पीने वालों में ओसोफेगल SCC का जोखिम करीब 1.7 गुना था।
वहीं, जो लोग पेय को बहुत गर्म पीना पसंद करते थे, उनमें इस प्रकार के कैंसर का जोखिम लगभग तीन गुना अधिक पाया गया।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि सिर्फ तापमान ही नहीं, बल्कि गर्म पेय पीने की आवृत्ति भी महत्वपूर्ण हो सकती है। दिन में छह या उससे ज्यादा गर्म पेय लेने वालों में, तापमान के प्रभाव को अलग करने के बाद, SCC का जोखिम छह से कम गर्म पेय लेने वालों की तुलना में करीब 71 फीसदी अधिक पाया गया।
आखिर गर्म चाय-कॉफी से खतरा क्यों बढ़ सकता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक बहुत गर्म तरल पदार्थ बार-बार खाने की नली से गुजरने पर वहां की अंदरूनी कोशिकाओं को गर्मी से नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक ऐसी गर्मी के संपर्क में रहने से कोशिकाओं में बदलाव होने की संभावना को कैंसर के जोखिम से जोड़ा गया है।
इसी वजह से चिंता पेय के नाम से ज्यादा उसके तापमान को लेकर है।
क्या चाय और कॉफी पूरी तरह छोड़नी पड़ेगी?
नहीं। इस स्टडी का मतलब यह नहीं है कि लोगों को चाय या कॉफी पीना बंद कर देना चाहिए। Cancer Research UK के मुताबिक आसान सावधानी यह है कि पेय को कुछ देर ठंडा होने दिया जाए और उसे ऐसी स्थिति में पिया जाए जब वह आराम से पीने लायक हो।
यानी कप में चाय या कॉफी आते ही तुरंत घूंट लेने के बजाय कुछ समय इंतजार करना बेहतर आदत हो सकती है।
65 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के पेय को लेकर पहले से भी चेतावनी
बहुत गर्म पेय और खाने की नली के कैंसर के बीच संबंध कोई बिल्कुल नई चिंता नहीं है। International Agency for Research on Cancer (IARC) ने 65°C से ज्यादा तापमान वाले बहुत गर्म पेय को मनुष्यों के लिए “probably carcinogenic” यानी संभावित रूप से कैंसरकारी श्रेणी में रखा है।
इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा पेय पीने वाले हर व्यक्ति को कैंसर होगा, बल्कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर जोखिम संबंध की संभावना मानी गई है।
स्टडी की एक बड़ी सीमा भी समझें
इस रिसर्च में लोगों के पेय का वास्तविक तापमान थर्मामीटर से हर बार नहीं मापा गया था। प्रतिभागियों ने खुद बताया था कि वे अपना पेय बहुत गर्म, गर्म या गुनगुना किस तरह पसंद करते हैं। इसलिए शोधकर्ता खुद भी मानते हैं कि अलग-अलग लोगों की “बहुत गर्म” की परिभाषा अलग हो सकती है।
इसलिए इसे यह कहने के तौर पर नहीं समझना चाहिए कि हर गर्म चाय या कॉफी कैंसर करेगी। यह एक बड़े observational study से मिला संबंध है और इस विषय पर आगे भी शोध की जरूरत है।
सबसे जरूरी बात
अगर आपको चाय या कॉफी बहुत गर्म पीने की आदत है, तो इसे थोड़ा ठंडा होने देना एक आसान सावधानी है। इसके अलावा धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन कम करना खाने की नली के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम माने जाते हैं।