कावासाकी, जापान: क्वांटम कंप्यूटिंग की दुनिया में Fujitsu ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। कंपनी के मुताबिक, उसने दुनिया का पहला काम करने वाला डायमंड-स्पिन क्वांटम कंप्यूटर प्रोटोटाइप तैयार किया है।
इस प्रोटोटाइप में डायमंड के अंदर मौजूद टिन-वैकेंसी यानी SnV सेंटर को फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट के साथ जोड़ा गया है। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में बड़े और ज्यादा शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
-271.6 डिग्री सेल्सियस पर काम करता है प्रोटोटाइप
इस नए कंप्यूटर की सबसे खास बात इसका बेहद कम ऑपरेटिंग तापमान है। Fujitsu के मुताबिक, प्रोटोटाइप करीब -271.6 डिग्री सेल्सियस पर काम करता है। तुलना करें तो सामान्य सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटर करीब -273.13 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर काम करते हैं।

टेस्ट वातावरण में इस प्रोटोटाइप को हाइब्रिड क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए यूजर को डायमंड-स्पिन तकनीक की अलग से विशेषज्ञ जानकारी होना जरूरी नहीं है।
2020 से चल रहा था इस तकनीक पर काम
इस प्रोटोटाइप के पीछे करीब छह साल की रिसर्च है। Fujitsu ने Delft University of Technology और QuTech के साथ मिलकर 2020 में डायमंड-स्पिन क्वांटम कंप्यूटिंग पर संयुक्त शोध शुरू किया था।
अब तैयार किया गया प्रोटोटाइप इसी लंबे रिसर्च प्रोजेक्ट का नतीजा है। कंपनी इसे क्वांटम कंप्यूटर की मॉड्यूलर आर्किटेक्चर की दिशा में एक अहम कदम मान रही है।
मॉड्यूलर सिस्टम में एक बहुत बड़ा क्वांटम कंप्यूटर एक ही चिप पर बनाने के बजाय कई छोटे क्वांटम मॉड्यूल तैयार किए जा सकते हैं। इन मॉड्यूल को ऑप्टिकल कनेक्शन के जरिए जोड़ा जा सकता है। इससे भविष्य में कंप्यूटर की क्षमता को बढ़ाने की संभावना बनती है।
हीरे के अंदर छिपी है असली तकनीक
डायमंड-स्पिन तकनीक में डायमंड क्रिस्टल के अंदर मौजूद खास संरचनाओं को क्वांटम बिट यानी क्यूबिट की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इन संरचनाओं को कलर सेंटर कहा जाता है।
डायमंड की प्राकृतिक खूबियों की वजह से इसके अंदर क्वांटम अवस्था को स्थिर रखने की क्षमता होती है। इससे क्वांटम ऑपरेशन को ज्यादा भरोसेमंद तरीके से करने की संभावना बनती है।
इस तकनीक में रोशनी यानी फोटॉन का भी अहम रोल है। फोटॉन के जरिए अलग-अलग क्वांटम मॉड्यूल को आपस में जोड़ा जा सकता है। यहां तक कि अलग-अलग चिप या अलग-अलग बेहद ठंडे वातावरण में मौजूद स्पिन क्यूबिट के बीच भी ऑप्टिकल कनेक्शन बनाया जा सकता है।
NV नहीं, SnV सेंटर का इस्तेमाल
डायमंड-स्पिन तकनीक में अब तक नाइट्रोजन-वैकेंसी यानी NV सेंटर का काफी इस्तेमाल किया गया है। लेकिन Fujitsu के नए प्रोटोटाइप में टिन-वैकेंसी यानी SnV सेंटर का इस्तेमाल किया गया है।
SnV सेंटर डायमंड की जाली में मौजूद एक खास संरचना है। इसमें एक टिन परमाणु दो खाली स्थानों के बीच मौजूद होता है। Fujitsu के अनुसार, इसकी संरचना बाहरी शोर के प्रति कम संवेदनशील हो सकती है। इसी वजह से इसे स्थिर और ज्यादा चमकीले कलर सेंटर के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावना देखी जा रही है।
डायमंड की मोटाई कई सौ नैनोमीटर तक घटाई
इस कंप्यूटर को तैयार करने के लिए डायमंड से जुड़ी कई तकनीकी चुनौतियों को हल करना पड़ा। Fujitsu ने ऐसी तकनीक विकसित की, जिससे टिन के साथ तैयार किए गए उच्च गुणवत्ता वाले डायमंड सब्सट्रेट को एल्युमिना और सिलिकॉन डाइऑक्साइड सब्सट्रेट के साथ जोड़ा जा सके।
इसके बाद डायमंड की मोटाई को कई सौ माइक्रोमीटर से घटाकर कई सौ नैनोमीटर तक किया गया। इससे इसे क्वांटम कंप्यूटिंग चिप के लिए इस्तेमाल करना संभव हुआ।
फोटोनिक सर्किट से निकलेगा सिंगल फोटॉन
Fujitsu ने नैनोमीटर आकार के डायमंड क्रिस्टल, जिनमें SnV सेंटर मौजूद हैं, को एल्युमिना ऑप्टिकल वेवगाइड के साथ जोड़कर फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट तैयार किया है।
ये वेवगाइड दिखाई देने वाली रोशनी के क्षेत्र में पारदर्शी होते हैं। इनकी मदद से SnV सेंटर से निकलने वाले सिंगल फोटॉन को बाहर निकाला जा सकता है। यह क्वांटम बिट की स्थिति को पढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है।
डायमंड की प्रोसेसिंग से जुड़ी तकनीक में The University of Tokyo के साथ किए गए संयुक्त शोध के परिणामों का भी इस्तेमाल किया गया है।
क्वांटम सर्किट को कंट्रोल सिग्नल में बदलेगा सिस्टम
डायमंड-स्पिन क्वांटम कंप्यूटर को चलाने के लिए सिर्फ चिप तैयार करना काफी नहीं है। क्यूबिट को नियंत्रित करने के लिए लाइट, माइक्रोवेव और रेडियो-फ्रीक्वेंसी वेव का इस्तेमाल करना पड़ता है।
Fujitsu ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो क्वांटम गेट के रूप में लिखे गए क्वांटम सर्किट को इन भौतिक नियंत्रण संकेतों की सीक्वेंस में बदल सकती है। इससे इस सिस्टम को हाइब्रिड क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म से नियंत्रित किया जा सकता है।
पहले के प्रयोगों ने भी बढ़ाई उम्मीद
डायमंड-स्पिन तकनीक पर पहले भी महत्वपूर्ण प्रयोग किए जा चुके हैं। 2025 में किए गए एक शोध में डायमंड के NV सेंटर का इस्तेमाल करके दो-क्यूबिट गेट ऑपरेशन का प्रदर्शन किया गया था। इसमें एरर की संभावना 0.1 फीसदी से कम बताई गई थी।
2026 में हुए एक अन्य संयुक्त शोध में अलग-अलग क्रायोस्टैट में मौजूद NV सेंटर के बीच क्वांटम एंटैंगलमेंट और क्वांटम गेट ऑपरेशन का प्रदर्शन किया गया। इससे अलग-अलग क्वांटम मॉड्यूल को ऑप्टिकल तरीके से जोड़ने की संभावना को और मजबूती मिली।
हालांकि, ये पहले के NV सेंटर वाले प्रयोग हैं और इन्हें नए SnV प्रोटोटाइप की उपलब्धि के साथ सीधे नहीं जोड़ना चाहिए। ये रिसर्च उस तकनीकी आधार को दिखाती हैं, जिस पर डायमंड-स्पिन कंप्यूटिंग को आगे बढ़ाया जा रहा है।
एक मॉड्यूल में दो तरह के स्पिन क्यूबिट
डायमंड-स्पिन क्वांटम कंप्यूटर की बुनियादी इकाई को क्वांटम मॉड्यूल कहा जाता है। इसमें दो तरह के स्पिन क्यूबिट इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें इलेक्ट्रॉन-स्पिन क्यूबिट और कार्बन-13 के न्यूक्लियर-स्पिन क्यूबिट शामिल हैं।
कई क्वांटम मॉड्यूल को ऑप्टिकल कनेक्शन के जरिए आपस में जोड़ा जा सकता है। इस तरह सिस्टम की क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाने का रास्ता तैयार होता है।
2027 में मल्टी-मॉड्यूल प्रोटोटाइप
Fujitsu अब इस तकनीक को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी के मुताबिक, वह 2027 तक मल्टी-मॉड्यूल डायमंड-स्पिन क्वांटम कंप्यूटर का प्रोटोटाइप विकसित करने की योजना बना रही है।
इसके साथ ही कंपनी डायमंड-स्पिन तकनीक को सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटिंग के साथ जोड़ने की तकनीक भी विकसित करेगी। इसका मकसद दोनों तकनीकों की खूबियों का इस्तेमाल करके ज्यादा जटिल और बड़े स्तर की गणना करना है।
2030 तक 250, 2035 तक 1,000 लॉजिकल क्यूबिट
Fujitsu ने अपने क्वांटम कंप्यूटिंग रोडमैप में वित्त वर्ष 2030 तक 250 लॉजिकल क्यूबिट और वित्त वर्ष 2035 तक 1,000 लॉजिकल क्यूबिट हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
कंपनी के CTO विवेक महाजन के मुताबिक, डायमंड-स्पिन तकनीक में अपने दम पर भी बड़े स्तर तक बढ़ने की क्षमता है। इसे सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटर के साथ जोड़ा जाए तो ज्यादा जटिल और बड़े स्तर की गणना करने की क्षमता को आगे बढ़ाया जा सकता है।
2030 तक व्यावहारिक क्वांटम कंप्यूटिंग का लक्ष्य
Fujitsu का लक्ष्य सिर्फ प्रयोगशाला में क्वांटम कंप्यूटर तैयार करना नहीं है। कंपनी 2030 तक व्यावहारिक क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
QuTech के जनरल डायरेक्टर डॉ. कीस एइकेल ने इस प्रोटोटाइप को 2020 से चल रहे सहयोग की बड़ी उपलब्धि बताया है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि डायमंड-स्पिन क्वांटम कंप्यूटिंग को बड़े स्तर पर ले जाना अभी लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है।
इस रिसर्च को जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के Advanced Research Infrastructure for Materials and Nanotechnology in Japan यानी ARIM कार्यक्रम से भी समर्थन मिला है। रिसर्च प्रोजेक्ट में जापान और नीदरलैंड के कई संस्थानों के बीच सहयोग भी शामिल है।
Fujitsu के मुताबिक, आगे हार्डवेयर के साथ-साथ सॉफ्टवेयर और कंट्रोल सिस्टम पर भी काम जारी रहेगा। डायमंड-स्पिन तकनीक, ऑप्टिकल कनेक्टिविटी और मॉड्यूलर डिजाइन को मिलाकर कंपनी बड़े स्तर पर काम करने वाले क्वांटम कंप्यूटर की दिशा में आगे बढ़ रही है।
फिलहाल यह प्रोटोटाइप स्तर की तकनीक है और इसे बड़े व्यावहारिक सिस्टम में बदलने के लिए कई तकनीकी चुनौतियां बाकी हैं। लेकिन अगर यह तकनीक आगे सफल होती है तो डायमंड के अंदर मौजूद बेहद छोटे कलर सेंटर भविष्य के कंप्यूटिंग सिस्टम की बड़ी ताकत बन सकते हैं।