जमुई में प्रेसवार्ता के दौरान सिकंदरा विधायक का पलटवार, आरक्षण समीक्षा के साथ उपवर्गीकरण की उठाई मांग; राजनीतिक परिवारों पर भी साधा निशाना
जमुई। आरक्षण की समीक्षा और उपवर्गीकरण का मुद्दा जमुई की सियासत में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। जमुई सांसद अरुण भारती की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री और हम के संरक्षक जीतन राम मांझी पर की गई टिप्पणी के बाद अब सिकंदरा विधायक प्रफुल्ल मांझी ने पलटवार किया है।
सोमवार को जमुई सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में विधायक ने सांसद अरुण भारती और लोजपा (रामविलास) नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और उपवर्गीकरण को लेकर अपनी राय भी रखी।
आरक्षण की समीक्षा संवैधानिक प्रक्रिया से हो: प्रफुल्ल मांझी
प्रफुल्ल मांझी ने जीतन राम मांझी के आरक्षण संबंधी बयान का समर्थन करते हुए कहा कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार से आरक्षण की समीक्षा के साथ उपवर्गीकरण पर विचार करने की मांग की। विधायक का कहना था कि इससे सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक पिछड़े तथा अब तक आरक्षण के लाभ से अपेक्षाकृत वंचित समुदायों को अवसर मिल सकता है।
राजनीतिक परिवारों पर लगाए आरोप
प्रेसवार्ता में विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक परिवारों ने आरक्षण और राजनीतिक अवसरों का फायदा अपने परिवार तक सीमित रखा।
उन्होंने दिवंगत रामविलास पासवान का जिक्र करते हुए उन्हें दलित समाज का बड़ा नेता बताया। प्रफुल्ल मांझी ने कहा कि वर्ष 2005 तक वह उनका समर्थन करते रहे, लेकिन बाद की राजनीतिक परिस्थितियों में उनका नजरिया बदल गया।
हालांकि, इस दौरान लगाए गए व्यक्तिगत और राजनीतिक आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
जीतन राम मांझी के कामों का किया जिक्र
प्रफुल्ल मांझी ने अपने बयान में जीतन राम मांझी के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भुइयां, मुसहर समेत वंचित समुदायों के लिए काम किया है।
विधायक ने टोला सेवकों की समस्याओं को भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन कर्मियों के वेतन भुगतान से जुड़ी दिक्कतों का समाधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की कानूनी कार्रवाई के कारण टोला सेवकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अरुण भारती को राजनीतिक अनुभव पर घेरा
प्रेसवार्ता के दौरान सिकंदरा विधायक ने सांसद अरुण भारती को राजनीतिक रूप से अनुभवहीन बताया। इसके साथ ही उन्होंने सांसद के परिवार को लेकर भी कई सवाल उठाए और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
विधायक ने जीतन राम मांझी और उनके परिवार के सार्वजनिक जीवन को पारदर्शी बताते हुए कहा कि उनके नेता ने लगातार वंचित तबकों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
जमुई में फिर गरमाया आरक्षण का मुद्दा
प्रफुल्ल मांझी के बयान के बाद जमुई की राजनीति में आरक्षण और उपवर्गीकरण का मुद्दा एक बार फिर गर्म होता दिखाई दे रहा है। खास बात यह है कि यह बहस एनडीए से जुड़े नेताओं के बीच बयानबाजी के बाद सामने आई है।
अब देखना होगा कि सांसद अरुण भारती या लोजपा (रामविलास) नेतृत्व की ओर से विधायक के आरोपों और सवालों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल जमुई में आरक्षण की समीक्षा और उपवर्गीकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।