मुजफ्फरपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का गलत इस्तेमाल अब लोगों की निजी जिंदगी के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। मुजफ्फरपुर में एक महिला डॉक्टर ने अपने ही एमबीबीएस के सहपाठी पर ऐसा ही गंभीर आरोप लगाया है।
महिला का कहना है कि साथी डॉक्टर ने पहले उसकी शादी रुकवाने की कोशिश की। जब शादी नहीं रोक पाया तो AI की मदद से उसकी तस्वीरों को आपत्तिजनक रूप में एडिट किया और उन्हें पति व रिश्तेदारों तक भेज दिया।
महिला डॉक्टर ने इस मामले में साइबर थाने में लिखित शिकायत दी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अभी लगाए गए आरोपों की जांच जारी है, इसलिए आरोपी पर लगे आरोपों को पुलिस जांच के नतीजे आने तक आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
दोनों ने साथ की थी MBBS की पढ़ाई
मामला मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। महिला डॉक्टर वर्तमान में इसी इलाके के एक अपार्टमेंट में रहती हैं। शिकायत में उन्होंने पटना के कंकड़बाग इलाके के रहने वाले एक डॉक्टर का नाम लिया है।
महिला और आरोपी दोनों ने MBBS की पढ़ाई एक साथ की थी। इसी दौरान दोनों के बीच परिचय हुआ। बाद में महिला डॉक्टर की शादी तय हुई तो कथित तौर पर आरोपी ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।
महिला का आरोप है कि आरोपी किसी भी हालत में उनकी शादी नहीं होने देना चाहता था। वह उन्हें और उनके परिवार को परेशान करने लगा और कथित तौर पर धमकी देता था कि अगर शादी हो भी गई तो वह उनका घर नहीं बसने देगा।
परिवारों ने बैठकर मामला सुलझाने की कोशिश की
विवाद बढ़ने के बाद दोनों परिवारों और करीबी रिश्तेदारों की मौजूदगी में बैठक हुई। शिकायत के मुताबिक, इस बैठक में आरोपी डॉक्टर और उसके पिता ने अपनी गलती मानी और महिला से माफी मांगी थी।
परिवारों की ओर से मामला शांत कराने की कोशिश की गई। आरोपी ने आगे ऐसी हरकत नहीं करने का भरोसा भी दिया। इसके बाद कुछ समय तक मामला शांत रहा।
फिर महिला डॉक्टर की शादी 21 जून 2026 को हो गई। शादी के बाद महिला को लगा कि अब पुराना विवाद खत्म हो चुका है। लेकिन शिकायत के अनुसार, इसके बाद कथित तौर पर फिर से परेशानी शुरू हो गई।
शादी के बाद पति को फोन करने का आरोप
महिला डॉक्टर का आरोप है कि शादी के बाद आरोपी डॉक्टर उनके पति को फोन करने लगा। वह कथित तौर पर महिला के बारे में गलत, अपमानजनक और भ्रामक बातें बताता था।
इसके बाद उसने कथित तौर पर महिला की सामान्य तस्वीरों के साथ AI की मदद से छेड़छाड़ की। तस्वीरों को आपत्तिजनक रूप देने का आरोप है। महिला का कहना है कि इन तस्वीरों को उनके पति और रिश्तेदारों तक भेजा गया।
आरोप सिर्फ यहीं तक नहीं है। महिला ने पुलिस को बताया कि उनकी पेशेवर छवि खराब करने की भी कोशिश की गई। कथित तौर पर उनके कार्यस्थल से जुड़े लोगों को भी गलत संदेश भेजे गए।
स्क्रीनशॉट और संदेश पुलिस को सौंपे
महिला डॉक्टर ने अपनी शिकायत के साथ कथित तौर पर आरोपी के भेजे गए संदेशों और तस्वीरों के स्क्रीनशॉट भी पुलिस को दिए हैं। अब पुलिस इन डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है।
जांच में मोबाइल फोन, मैसेज, सोशल मीडिया अकाउंट और तस्वीरों के डिजिटल रिकॉर्ड अहम हो सकते हैं। तकनीकी जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि तस्वीरों के साथ किस तरह छेड़छाड़ की गई और उन्हें किन-किन लोगों तक भेजा गया।
AI से बदली तस्वीर और असली फोटो में फर्क
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू AI का इस्तेमाल है। किसी व्यक्ति की सामान्य तस्वीर लेकर उसे इस तरह बदल दिया जाए कि वह आपत्तिजनक या अश्लील दिखाई दे, तो देखने वाले के लिए असली और नकली तस्वीर में फर्क करना मुश्किल हो सकता है।
यही वजह है कि ऐसे मामलों में सिर्फ तस्वीर वायरल होना ही किसी घटना के सच होने का सबूत नहीं माना जा सकता। डिजिटल जांच से यह पता लगाना जरूरी होता है कि तस्वीर असली है या उसके साथ तकनीकी छेड़छाड़ हुई है।
शादी के बाद भी पीछा नहीं छोड़ा, अब पुलिस जांच
महिला डॉक्टर का आरोप है कि शादी के बाद भी आरोपी ने उन्हें और उनके पति को परेशान करना जारी रखा। शिकायत के बाद मामला अब पुलिस के पास पहुंच चुका है।
फिलहाल पुलिस डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। आरोपी की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या जवाब दिया गया है, यह भी जांच का हिस्सा होगा।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि AI जैसी तकनीक का गलत इस्तेमाल किसी की निजी जिंदगी और प्रतिष्ठा को कितनी आसानी से नुकसान पहुंचा सकता है। किसी की तस्वीर को बिना अनुमति बदलकर उसे आपत्तिजनक रूप देना और फिर दूसरों तक पहुंचाना सिर्फ ऑनलाइन मजाक नहीं है। ऐसे मामलों में पीड़ित की शिकायत और डिजिटल सबूतों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।