IRSME-1990 बैच के अधिकारी की नई जिम्मेदारी, रोलिंग स्टॉक से संरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर तक लंबा अनुभव; दिल्ली मंडल में 100% विद्युतीकरण और बेहतर प्रदर्शन का रहा अनुभव
पटना/हाजीपुर। भारतीय रेल के एक बड़े और बेहद व्यस्त नेटवर्क की कमान अब ऐसे अधिकारी के हाथ में है, जिनका करियर रेलवे के तकनीकी ढांचे से शुरू होकर बड़े प्रशासनिक पदों तक पहुंचा है। डिम्पी गर्ग ने पूर्व मध्य रेलवे के नए महाप्रबंधक के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है।
IRSME के 1990 बैच के अधिकारी गर्ग इससे पहले उत्तर रेलवे में प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (PCME) के पद पर कार्यरत थे। रेलवे के आधिकारिक निदेशिका में भी उन्हें उत्तर रेलवे के PCME के रूप में दर्ज किया गया है।
तीन दशक से अधिक लंबे करियर में गर्ग ने रेलवे के उन क्षेत्रों में काम किया है, जिनका सीधा संबंध ट्रेन की सुरक्षा, परिचालन और रेलवे की तकनीकी क्षमता से है। रोलिंग स्टॉक, यांत्रिक व्यवस्था, संरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, परिचालन, योजना और नीति-निर्धारण का अनुभव अब पूर्व मध्य रेलवे के काम आएगा।
लेकिन डिम्पी गर्ग की पहचान केवल तकनीकी अधिकारी की नहीं है। दिल्ली मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के रूप में उनका कार्यकाल यह दिखाता है कि तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ बड़े यात्री और परिचालन नेटवर्क को संभालने का प्रशासनिक अनुभव भी उनके पास है। रेलवे के रिकॉर्ड में 2022-23 के दौरान उन्हें दिल्ली मंडल का DRM दर्ज किया गया था।
दिल्ली मंडल में 100% विद्युतीकरण की उपलब्धि
डिम्पी गर्ग के दिल्ली मंडल के कार्यकाल से जुड़ी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण शामिल है। 2021-22 के वित्तीय वर्ष में दिल्ली मंडल उत्तर रेलवे का पहला ऐसा मंडल बना, जिसने 100% विद्युतीकरण हासिल किया। उसी दौर में मंडल ने महाप्रबंधक स्तर के Overall Performance Shield समेत 12 अन्य शील्ड भी हासिल की थीं। रेलवे सप्ताह समारोह में तत्कालीन DRM डिम्पी गर्ग ने मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों को रेखांकित किया था।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि विद्युतीकरण केवल डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन से बदलने तक सीमित नहीं है। इससे रेलवे की ऊर्जा दक्षता, परिचालन क्षमता और लंबी अवधि की लागत पर भी असर पड़ता है। दिल्ली जैसे अत्यधिक व्यस्त रेल नेटवर्क में यह काम तकनीकी और परिचालन दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जाता है।
उपलब्धि के पीछे टीम को श्रेय
गर्ग के नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता उनके कार्यकाल के दौरान सामने आई—बड़ी उपलब्धियों का श्रेय केवल अधिकारी को नहीं, बल्कि पूरी टीम को देना।
2022 के रेलवे सप्ताह समारोह में दिल्ली मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया था। उस अवसर पर मंडल ने महाप्रबंधक की ओर से Overall Performance in all fields Shield के साथ 12 अन्य शील्ड भी हासिल की थीं।
इससे यह संकेत मिलता है कि उनका प्रशासनिक नजरिया केवल परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों के प्रदर्शन और टीमवर्क को भी महत्व दिया गया।
दिल्ली मंडल में उनके कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी सूचनाओं को एक जगह उपलब्ध कराने की पहल भी दिखाई देती है। दिसंबर 2022 में जारी Handbook on Benefits to Railway Employees में DRM के रूप में डिम्पी गर्ग का संदेश दर्ज है। इस पुस्तिका का उद्देश्य कर्मचारियों और उनके परिवारों को रेलवे की विभिन्न सुविधाओं और लाभों की जानकारी उपलब्ध कराना था।
छठ के दौरान दिल्ली से बिहार की ओर बढ़ती भीड़ को संभालने का अनुभव
डिम्पी गर्ग के लिए पूर्व मध्य रेलवे की नई जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू बिहार और झारखंड से जुड़ी यात्री भीड़ भी है। इसका अनुभव उन्हें दिल्ली मंडल में काम करते हुए मिल चुका है।
2022 में दीपावली और छठ के दौरान दिल्ली से पूर्वी भारत की ओर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए दिल्ली मंडल ने 159 स्पेशल ट्रेन ट्रिप चलाने की योजना बनाई थी, जिनमें करीब 1,130 कोच शामिल थे। तत्कालीन DRM डिम्पी गर्ग ने भीड़ के पुराने रिकॉर्ड और यात्रियों के फीडबैक के आधार पर स्पेशल ट्रेनों की योजना बनाए जाने की जानकारी दी थी।
नई दिल्ली और आनंद विहार जैसे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन के लिए मिनी कंट्रोल रूम, अतिरिक्त रेलवे कर्मचारी, RPF, RPSF, GRP और अन्य सहायता दल लगाए गए थे। नई दिल्ली स्टेशन पर अस्थायी प्रतीक्षा क्षेत्रों की क्षमता करीब 1,001 यात्रियों तक रखी गई थी। पानी, मोबाइल शौचालय, टिकट काउंटर, सूचना स्क्रीन और मेडिकल सुविधाओं जैसी व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
पूर्व मध्य रेलवे में यह अनुभव खास मायने रख सकता है, क्योंकि बिहार और झारखंड से जुड़े स्टेशनों पर पर्व-त्योहारों के दौरान यात्रियों का दबाव अचानक कई गुना बढ़ जाता है।
यात्री सुविधा को तकनीक से जोड़ने की पहल
दिल्ली मंडल में उनके कार्यकाल के दौरान यात्री अनुभव बेहतर करने की दिशा में कुछ अलग प्रयोग भी किए गए।
2022 में दिल्ली मंडल की शताब्दी और वंदे भारत ट्रेनों में रेडियो आधारित मनोरंजन सेवा शुरू करने की योजना बनाई गई थी। इसका उद्देश्य यात्रियों को यात्रा के दौरान मनोरंजन के साथ उन शहरों और क्षेत्रों की जानकारी देना था, जहां से ट्रेन गुजर रही होती है। इस पहल को डिम्पी गर्ग के DRM कार्यकाल से जोड़ा गया था।
यह पहल दिखाती है कि उनके प्रशासनिक कार्यकाल में यात्री सुविधा को केवल स्टेशन की मूलभूत सुविधाओं तक सीमित रखने के बजाय यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया।
सुरक्षा से जुड़ा लंबा तकनीकी अनुभव
डिम्पी गर्ग की सबसे महत्वपूर्ण पेशेवर ताकत उनका यांत्रिक और संरक्षा से जुड़ा अनुभव है। रेलवे बोर्ड के दस्तावेजों में उन्हें Executive Director/Safety/Mechanical के रूप में भी दर्ज किया गया है। बाद में वे उत्तर रेलवे में PCME के पद तक पहुंचे।
2024 के उत्तर रेलवे के एक सुरक्षा संबंधी दस्तावेज में उनके डिजिटल हस्ताक्षर भी दर्ज हैं, जिसमें भारतीय रेलवे के दुर्घटना प्रोटोकॉल को लेकर निर्देश जारी किए गए थे। यह उनके सुरक्षा प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ स्तर के दायित्वों का प्रमाण है।
रेलवे में संरक्षा अब पहले से कहीं ज्यादा तकनीक आधारित हो चुकी है। सिग्नलिंग, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, रोलिंग स्टॉक की निगरानी, ट्रैक और ट्रेन सुरक्षा प्रणालियां लगातार आधुनिक हो रही हैं। ऐसे में यांत्रिक और सुरक्षा दोनों क्षेत्रों का अनुभव रखने वाले अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
दिल्ली मंडल से अब पूर्व मध्य रेलवे तक
डिम्पी गर्ग ने दिल्ली मंडल के DRM के रूप में एक ऐसे नेटवर्क का नेतृत्व किया, जहां देश के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में शामिल नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, आनंद विहार और हजरत निजामुद्दीन जैसे स्टेशन आते हैं। यहां यात्री दबाव, वीआईपी मूवमेंट, त्योहारों की भीड़ और परिचालन की जटिलता हमेशा चुनौती बनी रहती है।
2022 में दिल्ली मंडल में विकास कार्यों और परियोजनाओं पर जनप्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में भी गर्ग ने मंडल की विकास गतिविधियों की प्रस्तुति दी थी। इसमें स्टेशन सुविधाओं, नई ट्रेनों, अतिरिक्त ठहराव और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।
यानी बड़े नेटवर्क में यात्री जरूरतों और आधारभूत संरचना के बीच संतुलन बनाने का अनुभव भी उनके पास है।
अब पूर्व मध्य रेलवे की असली परीक्षा
पूर्व मध्य रेलवे की जिम्मेदारी दिल्ली मंडल से अलग तरह की चुनौती लेकर आती है। यह जोन पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण रेल मार्गों को जोड़ता है और यात्री तथा माल परिचालन दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
इस जोन में बिहार के साथ झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तक फैला रेल नेटवर्क है। कोयला और अन्य माल ढुलाई के साथ-साथ बड़ी संख्या में लंबी दूरी की यात्री ट्रेनें यहां से गुजरती हैं।
ऐसे में नए महाप्रबंधक के सामने कई मोर्चे एक साथ होंगे—रेल संरक्षा, क्षमता विस्तार, समयपालन, स्टेशन आधुनिकीकरण, सिग्नलिंग व्यवस्था, रोलिंग स्टॉक, माल ढुलाई और यात्री सुविधाएं।
पूर्व मध्य रेलवे में आधुनिक सिग्नलिंग और इंटरलॉकिंग सिस्टम का विस्तार भी महत्वपूर्ण विषय है। आने वाले समय में कवच जैसी स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा तकनीक के विस्तार के साथ इन प्रणालियों का बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा।
तकनीकी अधिकारी के सामने प्रशासनिक चुनौती
डिम्पी गर्ग के करियर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि उन्होंने रेलवे को केवल एक कोण से नहीं देखा। उनका शुरुआती और मूल प्रशिक्षण यांत्रिक सेवा का रहा, लेकिन करियर आगे बढ़ने के साथ उन्हें सुरक्षा, प्रशासन, परिचालन, योजना और बड़े नेटवर्क के प्रबंधन की जिम्मेदारियां भी मिलीं।
अब पूर्व मध्य रेलवे में यही अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
हालांकि किसी महाप्रबंधक की सफलता केवल व्यक्तिगत अनुभव से तय नहीं होती। रेलवे एक विशाल संगठन है, जिसमें हजारों अधिकारी और कर्मचारी मिलकर काम करते हैं। इसलिए नई जिम्मेदारी में उनके नेतृत्व की असली परीक्षा यह होगी कि वे अलग-अलग विभागों को एक साझा लक्ष्य के साथ कितनी प्रभावी तरीके से जोड़ पाते हैं।
बिहार के रेल यात्रियों की निगाहें भी रहेंगी
पूर्व मध्य रेलवे की कमान संभालने के साथ डिम्पी गर्ग के सामने बिहार के लाखों रेल यात्रियों की उम्मीदें भी होंगी।
पर्व-त्योहार के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों की जरूरत, स्टेशनों पर भीड़, ट्रेन परिचालन की समयबद्धता, साफ-सफाई, सुरक्षा, यात्री सुविधाएं और नई परियोजनाओं को जमीन पर उतारना—ये ऐसे मुद्दे हैं जिनका असर सीधे आम यात्री पर पड़ता है।
डिम्पी गर्ग के पास बड़े शहर के व्यस्त रेलवे नेटवर्क को संभालने का अनुभव है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली में हासिल उस अनुभव को वे पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, धनबाद, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और पूर्व मध्य रेलवे के अन्य महत्वपूर्ण स्टेशनों और रेल मार्गों की जरूरतों के अनुरूप किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
32 साल का अनुभव, अब एक नए जोन की जिम्मेदारी
डिम्पी गर्ग की नई जिम्मेदारी को केवल एक प्रशासनिक तबादले के रूप में देखना मुश्किल है। उनके करियर में तकनीकी रेलवे सेवा से लेकर सुरक्षा, बड़े मंडल के प्रशासन और उत्तर रेलवे के शीर्ष यांत्रिक पद तक का सफर शामिल है।
दिल्ली मंडल में उनके कार्यकाल के दौरान 100% विद्युतीकरण जैसी उपलब्धि, प्रदर्शन के लिए कई शील्ड, त्योहारों की भीड़ का प्रबंधन, कर्मचारी कल्याण से जुड़ी पहल और यात्री सुविधाओं में नए प्रयोग उनके प्रशासनिक अनुभव के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं।
अब यह अनुभव पूर्व मध्य रेलवे की पटरी पर उतरने जा रहा है।
चुनौती साफ है—रेल को सुरक्षित रखना, क्षमता बढ़ाना, परिचालन को अधिक भरोसेमंद बनाना और यात्रियों के सफर को बेहतर करना।
डिम्पी गर्ग के सामने अब सिर्फ एक रेल जोन नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के लाखों यात्रियों और बड़े माल ढुलाई नेटवर्क की जिम्मेदारी है। आने वाले महीनों में उनके फैसले यह तय करेंगे कि 32 वर्षों का उनका रेलवे अनुभव पूर्व मध्य रेलवे की कार्यप्रणाली में कितनी नई गति और कितनी नई दिशा जोड़ पाता है।