बीएमआईएमएस पावापुरी, सदर अस्पताल GNM स्कूल और गौतम इंस्टीट्यूट के पाठ्यक्रम कार्रवाई की जद में
बिहारशरीफ। नालंदा जिले में नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे सैकड़ों छात्र-छात्राओं के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। भारतीय नर्सिंग काउंसिल (INC) ने जिले के तीन प्रमुख नर्सिंग संस्थानों के पाठ्यक्रमों की राष्ट्रीय मान्यता समाप्त कर दी है। कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।
आईएनसी एक्ट, 1947 की धारा 14 के तहत की गई इस कार्रवाई की जद में पावापुरी स्थित भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (BMIMS) भी शामिल है। संस्थान में संचालित बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की राष्ट्रीय मान्यता वापस ली गई है।
इसके अलावा बिहारशरीफ स्थित सदर अस्पताल के जीएनएम स्कूल ऑफ नर्सिंग तथा चंडी-हिलसा रोड के सैयद बहरी स्थित गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग के एएनएम और जीएनएम पाठ्यक्रमों की मान्यता भी रद्द किए जाने की बात सामने आई है।
पूरे बिहार के 40 संस्थान कार्रवाई की जद में
बताया जा रहा है कि आईएनसी की कार्रवाई केवल नालंदा तक सीमित नहीं है। राज्य के करीब 40 नर्सिंग कॉलेजों के 45 पाठ्यक्रमों की राष्ट्रीय मान्यता वापस ली गई है। इनमें पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) और भागलपुर मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग स्कूल भी शामिल बताए जा रहे हैं।
कार्रवाई के बाद उन छात्रों की चिंता बढ़ गई है, जो नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिहार से बाहर नौकरी करने या राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं में करियर बनाने की तैयारी कर रहे थे।
मानकों में कमी का आरोप
जानकारी के अनुसार, काउंसिल की जांच में कुछ संस्थानों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई। कुछ निजी संस्थानों के बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की योग्यता से संबंधित कमियां भी जांच में सामने आने की बात कही गई है। काउंसिल ने अलग-अलग मामलों में पिछली प्रभावी तारीखों से मान्यता समाप्त करने का निर्णय लिया है।
छात्रों के सामने क्या संकट?
दूसरे राज्यों में रजिस्ट्रेशन: राष्ट्रीय मान्यता से जुड़े इस फैसले का असर छात्रों के दूसरे राज्यों में नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और नौकरी के अवसरों पर पड़ सकता है।
केंद्रीय संस्थानों में नौकरी: एम्स, रेलवे और अन्य केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों में नर्सिंग पदों के लिए आवश्यक मान्यता एवं रजिस्ट्रेशन को लेकर छात्रों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।
विदेश में अवसर: विदेश में नर्सिंग प्रैक्टिस या उच्च शिक्षा के लिए भी मान्यता और पंजीकरण महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रभावित छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि, किस बैच के छात्रों पर यह निर्णय किस सीमा तक लागू होगा और पहले से नामांकित अथवा उत्तीर्ण छात्रों की डिग्री की वैधता क्या होगी, इसे लेकर छात्रों में असमंजस है। इस संबंध में आईएनसी, बिहार नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल और संबंधित संस्थानों की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।