बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। जयप्रकाश विश्वविद्यालय (JPU), छपरा से जुड़े चार डिग्री कॉलेज की संबद्धता रद्द कर दी गई है। इन कॉलेजों को संबद्धता देने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने यह कार्रवाई की है।
मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय और कॉलेजों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चारों डिग्री कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का नामांकन (एडमिशन) एवं पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) नजदीकी महाविद्यालयों से किया जाएगा।
चार डिग्री कॉलेज पर हुई कार्रवाई
जिन चार कॉलेजों की संबद्धता रद्द की गई है, उनमें तीन कॉलेज सारण जिले में हैं, जबकि एक कॉलेज सीवान जिले का बताया गया है। इन कॉलेजों को जयप्रकाश विश्वविद्यालय से संबद्धता मिली हुई थी। संबद्धता रद्द होने के बाद अब इन संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
इनमें आर. डी. एम. डिग्री कॉलेज राठौर टोला (छपरा), डॉ. भूषण प्रसाद यादव डिग्री कॉलेज महमदा (सारण), को-आपरेटिव डिग्री कॉलेज सकड्डी कोढ़ (सारण) और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर डिग्री कॉलेज बड़हरिया (सीवान) शामिल हैं।
संबद्धता देने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालय से संबद्धता देने के लिए कई स्तरों पर प्रक्रिया पूरी करनी होती है। कॉलेज के संसाधन, भवन, जमीन, शिक्षकों और अन्य जरूरी मानकों की जांच के साथ विश्वविद्यालय की निर्धारित समितियों से भी प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद ही संबद्धता को आगे बढ़ाया जाता है।
इस वजह से संबद्धता वापस
इन डिग्री कॉलेजों का एफलिएशन वापस लिए जाने के कारण के बारे में बताया गया कि इनके द्वारा सीनेट-सिंडीकेट के विधिवत अनुमोदन के बिना ही अनुशंसा (प्रस्ताव) उच्च शिक्षा विभाग को की गयी थी। इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि संबंधित कॉलेजों को संबद्धता देने की प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के सीनेट और सिंडिकेट की जरूरी मंजूरी नहीं ली गई। इसी आधार पर सरकार ने संबद्धता को लेकर कार्रवाई की है।
इसका खुलासा उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया है। चारों कॉलेजों का एफलिएशन वापस लेने की सूचना उच्च शिक्षा विभाग ने जयप्रकाश विश्वविद्यालय को दी है।
मामला केवल चार कॉलेजों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इससे विश्वविद्यालयों में निजी या संबद्ध कॉलेजों को मान्यता देने की प्रक्रिया और उसकी निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों को संबद्धता देते समय नियमों का पालन कितना हुआ, इसकी जांच को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
विभाग के उप सचिव शिशिर कुमार मिश्र के हस्ताक्षर से विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव को दिये गये पत्र में कहा गया है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच समिति की जांच रिपोर्ट एवं विभागीय निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट हुआ है कि संबंधित कॉलेजों के संबंधन हेतु सीनेट-सिंडीकेट के विधिवत अनुमोदन के बिना अनुशंसा-प्रस्ताव विभाग को प्रेषित किया गया था।
शिक्षा व्यवस्था में निगरानी बढ़ाने की जरूरत
बिहार में डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़ाने और उच्च शिक्षा को गांव-कस्बों तक पहुंचाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में नए कॉलेजों को संबद्धता देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद जरूरी है। संबद्धता से जुड़े नियमों का पालन होने से न सिर्फ कॉलेजों की व्यवस्था बेहतर रहती है, बल्कि विद्यार्थियों को भी अपनी पढ़ाई और डिग्री को लेकर भरोसा बना रहता है।
चार कॉलेजों की संबद्धता रद्द किए जाने का मामला इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विश्वविद्यालयों में संबद्धता देने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी और जांच व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत सामने आती है। साथ ही भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर सभी जरूरी अनुमोदनों और प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।