रांची: झारखंड सरकार ने राज्य की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और जनहितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य के सभी पात्र उपभोक्ताओं को 200 यूनिट निःशुल्क बिजली का लाभ समय पर मिले और पूरे राज्य में 24 घंटे निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली केवल एक बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास की रीढ़ है। इसलिए उत्पादन, संचरण और वितरण व्यवस्था को नई तकनीकों के जरिए मजबूत बनाना समय की जरूरत है। उन्होंने बिजली कटौती और उपभोक्ताओं की शिकायतों के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों तक भी शहरी क्षेत्रों जैसी विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ट्रांसफार्मर जलने की स्थिति में अधिकतम 24 घंटे के भीतर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाए, ताकि आम लोगों को लंबे समय तक बिजली संकट का सामना न करना पड़े।
बैठक में राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने झारखंड के जलाशयों और जलप्रपातों की संभावनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन कर जलविद्युत उत्पादन बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। विशेष रूप से हुंडरू और जोन्हा जलप्रपात सहित अन्य स्थलों की क्षमता का आकलन कर आधुनिक तकनीक के जरिए कम जल में अधिक बिजली उत्पादन की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए।
ऊर्जा अवसंरचना को आधुनिक बनाने के तहत रांची में तीन नए स्मार्ट ग्रिड स्थापित किए जाएंगे। ये स्मार्ट ग्रिड कुसई कॉलोनी, बरियातू और इटकी में बनाए जाएंगे। इसके अलावा कई नए विद्युत उपकेंद्र भी विकसित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, स्मार्ट ग्रिड तकनीक लागू होने से बिजली वितरण अधिक भरोसेमंद होगा, ऊर्जा हानि कम होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों की पहचान पारदर्शी तरीके से हो और योजना का लाभ किसी भी पात्र परिवार तक पहुंचने से न छूटे। साथ ही लोगों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा, ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ता इस योजना का लाभ उठा सकें।
बैठक में सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना के आधुनिकीकरण और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने पुरानी और नई मशीनों की कार्यक्षमता का तुलनात्मक अध्ययन कर आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया।
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने फ्लोटिंग सोलर और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाए जाएं और सरकारी व निजी भवनों की छतों पर सोलर सिस्टम को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही बंजर भूमि पर सोलर फार्मिंग को प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढ़ाने की योजना तैयार करने तथा किसानों को सब्सिडी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने को कहा।
ऊर्जा विभाग में रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने प्रथम चरण में 35 प्रतिशत रिक्त पदों को जल्द भरने और भर्ती प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष लाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होने से बिजली आपूर्ति, रखरखाव और शिकायत निवारण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी।
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ड्यूल पावर लाइन व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, स्मार्ट मीटरिंग अभियान, ऑनलाइन शिकायत प्रणाली और जन समस्या केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।
समीक्षा बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए, ताकि राज्य के हर नागरिक तक बेहतर और भरोसेमंद बिजली सेवाएं पहुंच सकें।