नई दिल्ली: बिहार की पारंपरिक मिठाई ठेकुआ अब सिर्फ छठ पर्व तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभर में एक सफल बिजनेस मॉडल बनकर उभरी है। अभिनेता आर. माधवन द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक प्रेरणादायक कहानी इन दिनों खूब चर्चा में है। यह कहानी बिहार की वीणा देवी और उनके बेटे समीर की है, जिन्होंने घर की रसोई से शुरुआत कर ठेकुआ को एक बड़े ब्रांड का रूप दे दिया। आज उनका MomsMade ब्रांड करीब ₹75 करोड़ के वैल्यूएशन तक पहुंच चुका है और सालाना लगभग ₹15 करोड़ का कारोबार कर रहा है।
घर की रसोई से शुरू हुआ सफर
वीणा देवी बिहार में करीब 15 वर्षों तक शिक्षिका रहीं। बाद में वे अपने बेटे समीर के साथ बेंगलुरु चली गईं। नए शहर में उन्होंने अपनी पारंपरिक रेसिपी और वर्षों के अनुभव को व्यवसाय का रूप देने का फैसला किया। शुरुआत बेहद साधारण थी। घर की रसोई में केवल चार चूल्हों पर ठेकुआ तैयार किए जाते थे, जबकि समीर ने पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ऑनलाइन मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाली।
धीरे-धीरे ग्राहकों को घर जैसा स्वाद पसंद आने लगा और ऑर्डर बढ़ते चले गए। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की मदद से यह पारंपरिक बिहारी व्यंजन देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंच गया।

स्वास्थ्य और स्वाद का अनोखा मेल
MomsMade की सबसे बड़ी खासियत इसकी गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद है। ब्रांड दावा करता है कि उसके ठेकुए मैदा, रिफाइंड चीनी और पाम ऑयल के बिना तैयार किए जाते हैं। इनमें साबुत गेहूं का आटा, गुड़ और देसी घी जैसे पारंपरिक और अपेक्षाकृत प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है।
यही वजह है कि यह उत्पाद उन लोगों के बीच भी लोकप्रिय हुआ जो पारंपरिक स्वाद के साथ बेहतर गुणवत्ता वाले स्नैक्स की तलाश में रहते हैं। ठेकुआ के अलावा ब्रांड निमकी, चना दाल और अन्य पारंपरिक स्नैक्स भी ग्राहकों तक पहुंचा रहा है।
आज रोजाना मिल रहे हैं 1,000 से ज्यादा ऑर्डर

जो सफर कुछ सीमित ऑर्डरों से शुरू हुआ था, वह आज बड़ी सफलता की कहानी बन चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MomsMade को वर्तमान में रोजाना 1,000 से अधिक ऑर्डर प्राप्त होते हैं। कंपनी का सालाना कारोबार करीब ₹15 करोड़ बताया जा रहा है, जबकि उसका वैल्यूएशन लगभग ₹75 करोड़ तक पहुंच चुका है।
इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि पारंपरिक उत्पादों को सही गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग के साथ ग्राहकों तक पहुंचाया जाए, तो वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
महिलाओं को भी मिला रोजगार
इस कारोबार की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल से करीब 50 महिलाओं को रोजगार भी मिला है। इससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला और पारंपरिक खाद्य उत्पादों के माध्यम से रोजगार के नए रास्ते खुले।

R. माधवन ने की सराहना
अभिनेता आर. माधवन ने इस प्रेरणादायक सफलता की कहानी को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसकी प्रशंसा की। उनके पोस्ट के बाद यह कहानी तेजी से वायरल हो गई और देशभर में लोगों ने मां-बेटे की इस उपलब्धि की सराहना की। कई लोगों ने इसे भारतीय पारंपरिक व्यंजनों और घरेलू उद्यमिता का शानदार उदाहरण बताया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
वीणा देवी और समीर की यह सफलता दिखाती है कि बड़े कारोबार की शुरुआत हमेशा बड़े निवेश से नहीं होती। सही सोच, गुणवत्ता पर भरोसा, डिजिटल माध्यमों का उपयोग और लगातार मेहनत किसी भी छोटे विचार को बड़ी सफलता में बदल सकते हैं।

बिहार का पारंपरिक ठेकुआ आज केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि भारतीय उद्यमिता, स्थानीय स्वाद और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुका है। यह कहानी उन हजारों युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने का सपना देखते हैं।यह लेख SEO को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित करने के लिए उपयुक्त है।
