पटना: बिहार में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव, अन्य गिरफ्तार विधायकों, छात्र नेताओं और आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों की तत्काल रिहाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सभी को रिहा नहीं किया और उनके खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो विपक्ष पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन शुरू करेगा।
तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उनका आरोप है कि बिहार सरकार विरोध की आवाज़ को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे जनता में आक्रोश बढ़ रहा है।
क्या है तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी का मामला?
25 जुलाई को बिहार बंद और NEET पेपर लीक मामले को लेकर पटना में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, धक्का-मुक्की और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाई गई और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की गई।

इसी मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुसार की गई है।
हालांकि तेज प्रताप यादव और उनके समर्थकों ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। उनका आरोप है कि विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए सरकार पुलिस का दुरुपयोग कर रही है।
तेजस्वी यादव ने क्या कहा?
तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार को केवल तेज प्रताप यादव ही नहीं, बल्कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी छात्र, छात्र नेताओं और विपक्षी नेताओं को भी तुरंत रिहा करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं और उन्हें न्याय मिले।

उन्होंने कहा कि छात्र अपने भविष्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज़ उठा रहे थे। ऐसे में उन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करना उचित नहीं है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें डराने और दबाने का प्रयास कर रही है।
राजद नेता ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो विपक्ष राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन करेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता सरकार की कार्रवाई से नाराज़ है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है।
सरकार और पुलिस का पक्ष
राज्य सरकार और पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक आधार पर नहीं की गई है। प्रशासन के अनुसार जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज है और पूरी प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में चल रही है। सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी को भी हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

बिहार की राजनीति में बढ़ा सियासी तापमान
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी और तेजस्वी यादव के बयान के बाद बिहार की राजनीति और अधिक गरमा गई है। विपक्ष इस पूरे मामले को लोकतंत्र, छात्रों के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई को उचित बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करता है तो इसका असर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है। यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
आगे क्या?

फिलहाल सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि गिरफ्तार नेताओं और छात्रों की रिहाई होती है या मामलों की समीक्षा की जाती है तो राजनीतिक तनाव कम हो सकता है। वहीं यदि सरकार अपने रुख पर कायम रहती है, तो विपक्ष के आंदोलन की संभावना तेज हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा यह टकराव बातचीत से सुलझता है या आने वाले दिनों में राज्य एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का गवाह बनता है।
