29 अक्टूबर 2015 को चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने दशकों से लागू एक-बच्चा नीति में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की। नई व्यवस्था के तहत सभी विवाहित दम्पतियों को दो बच्चे रखने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया। यह घोषणा चीन की जनसंख्या नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, क्योंकि देश घटती जन्मदर, तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और भविष्य में कार्यशील आयु के लोगों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा था।
एक-बच्चा नीति क्यों लागू की गई?
चीन ने 1970 के दशक के अंत और 1980 के दशक की शुरुआत में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए सख्त परिवार नियोजन उपाय अपनाए। नीति का उद्देश्य तेज जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाना और संसाधनों, आवास, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव कम करना बताया गया। हालांकि इसका क्रियान्वयन समय, क्षेत्र और परिवारों की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रहा; कुछ समुदायों और परिवारों को अपवाद भी मिले।
नीति के सामाजिक और जनसांख्यिकीय प्रभाव
लंबे समय तक कम जन्मदर रहने से चीन की आयु-संरचना में बदलाव आया। कई परिवारों में एक ही संतान होने के कारण बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी सीमित संख्या में वयस्क बच्चों पर आ गई। साथ ही, पुत्र-प्राथमिकता और लिंग-चयन जैसी सामाजिक समस्याओं ने कुछ क्षेत्रों में पुरुष-महिला अनुपात को प्रभावित किया। विशेषज्ञों ने यह भी चिंता जताई कि भविष्य में श्रमबल घटने से अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर दबाव बढ़ सकता है।
29 अक्टूबर 2015 की घोषणा
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की पांचवीं पूर्ण बैठक के बाद जारी घोषणा में सभी दम्पतियों को दो बच्चे रखने की अनुमति देने का निर्णय सामने आया। यह बदलाव उस पहले के चरण के बाद आया था जिसमें कुछ दम्पतियों को, विशेष परिस्थितियों में, दूसरा बच्चा रखने की अनुमति दी गई थी। 2015 की घोषणा ने नीति को देशव्यापी स्तर पर बदलने की दिशा तय की; नई व्यवस्था 2016 में लागू हुई। इसलिए इसे एक-बच्चा नीति के अंत की घोषणा के रूप में याद किया जाता है, न कि उसी दिन सभी नियमों के तत्काल बदल जाने के रूप में।

क्या दो-बच्चा नीति से समस्या हल हुई?
नीति में ढील के बावजूद जन्मदर में अपेक्षित और स्थायी उछाल नहीं आया। शहरी जीवन की ऊंची लागत, बच्चों की शिक्षा और देखभाल का खर्च, काम और परिवार के बीच संतुलन तथा विवाह और मातृत्व की बदलती प्राथमिकताएँ इसके प्रमुख कारणों में शामिल रहे। बाद में चीन ने 2021 में तीन-बच्चा नीति की अनुमति दी और परिवारों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले कदम भी उठाए। इससे स्पष्ट हुआ कि जनसंख्या संबंधी रुझानों को केवल कानूनी सीमा बदलकर पलटना आसान नहीं है।
वैश्विक जनसंख्या नीति के लिए सबक
चीन का अनुभव दिखाता है कि जनसंख्या नीति के दूरगामी परिणाम होते हैं और उनके प्रभाव कई दशकों तक बने रह सकते हैं। जन्मदर, लैंगिक संतुलन, वृद्धावस्था, श्रमबल और परिवारों की आर्थिक स्थिति एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं। नीति-निर्माण में व्यक्तिगत अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवारों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
इतिहास में 29 अक्टूबर 2015 का महत्व
एक-बच्चा नीति को समाप्त करने की घोषणा चीन की जनसंख्या रणनीति में निर्णायक बदलाव का संकेत थी। इसने उस दौर को चिह्नित किया जब सरकार का ध्यान केवल जनसंख्या वृद्धि रोकने से हटकर घटती जन्मदर और वृद्ध होती आबादी की चुनौतियों की ओर भी गया। यह घटना जनसंख्या नीति, परिवार और आर्थिक भविष्य के संबंध पर वैश्विक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
