नालंदा/बिहारशरीफ। कभी हास्य की फुहार ने श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर किया, तो कभी वीर रस की ओजस्वी पंक्तियों ने सभागार में देशभक्ति का जोश भर दिया। कहीं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं ने लोगों को भीतर तक सोचने के लिए विवश किया तो कहीं शब्दों की मिठास ने साहित्य के प्रति अनुराग जगाया। बिहारशरीफ का टाउन हॉल रविवार को कुछ ऐसा ही साहित्यिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था, जहां अलग-अलग क्षेत्रों से आए कवियों की आवाज में कविता केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज, संवेदना और संस्कृति से संवाद करती नजर आई।
नवोत्साह साहित्य संगम की नालंदा जिला इकाई की ओर से आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से देर तक श्रोताओं को बांधे रखा। कविता की अलग-अलग विधाओं और रसों से सजे इस आयोजन में साहित्य का ऐसा रंग उभरा, जिसमें हास्य-व्यंग्य से लेकर वीर रस और राष्ट्रप्रेम तक की अनुभूतियां एक साथ दिखाई दीं।
दीप प्रज्वलन से शुरू हुआ साहित्य का उत्सव
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की। इसके बाद कवयित्री प्रीति पाण्डेय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। वंदना के साथ ही सभागार में साहित्यिक वातावरण और गहरा गया। आयोजन में शामिल अतिथियों और आमंत्रित कवियों का पुष्पगुच्छ व अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नवोत्साह साहित्य संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश कुमार पांडेय ने की। मुख्य अतिथि के रूप में बिहारशरीफ जेल के जेल सुपरिंटेंडेंट अभिषेक पाण्डेय और बाल संरक्षण पदाधिकारी शिशिर पाण्डेय मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में शिक्षाविद् एवं अर्थशास्त्री डॉ. बच्चन कुमार पाण्डेय, जिला पंचायत संसाधन केंद्र के नोडल पदाधिकारी सह जिला संरक्षक चंदन कुमार तथा बरनौसा पंचायत की मुखिया सह जिला संरक्षिका सदया कुमारी शामिल रहीं।
मुख्य अतिथि अभिषेक पाण्डेय ने साहित्यिक आयोजनों को समाज में सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने वाला माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और साहित्य से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक सोच का वातावरण भी तैयार करते हैं।
कविता ने कभी गुदगुदाया, कभी सोचने पर मजबूर किया
कवि सम्मेलन का सबसे आकर्षक पक्ष रहा रचनाओं की विविधता। मंच पर जब हास्य-व्यंग्य का दौर आया तो सभागार ठहाकों से गूंज उठा। कवियों की चुटीली पंक्तियों और व्यंग्यात्मक अंदाज पर श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे। वहीं वीर रस की रचनाओं ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। ओज और राष्ट्रप्रेम से भरी कविताओं के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
सामाजिक विषयों पर केंद्रित कविताओं ने आयोजन को एक अलग गंभीरता भी दी। इन रचनाओं में समाज की बदलती तस्वीर, मानवीय संवेदनाएं और वर्तमान समय की चुनौतियों की झलक देखने को मिली। इस दौरान श्रोताओं का ध्यान केवल मंच पर प्रस्तुत कविता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई रचनाएं उन्हें अपने आसपास के सामाजिक जीवन पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती रहीं।
देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कवियों ने सजाया मंच
कवि सम्मेलन में दमदार बनारसी, डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ल ‘वत्सल’, डॉ. पंकज झा, मीना बंधन, सागर आनंद, शंकर भगवान, गौतम शरगम, प्रीतम झा, साकेत कुमार ध्रुव और श्रुति श्रीवास्तव समेत कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
हर कवि का अपना अंदाज और अपनी प्रस्तुति थी। किसी ने शब्दों के माध्यम से हास्य का संसार रचा तो किसी ने देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाया। यही विविधता पूरे आयोजन की विशेषता बनी रही। अलग-अलग भाव और विषयों की कविताओं ने कार्यक्रम को एकरस होने से बचाया और देर तक श्रोताओं की दिलचस्पी बनाए रखी।
मंच संचालन ने बांधे रखा आयोजन का प्रवाह
कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन जिलाध्यक्ष डॉ. प्रणय कुमार ने किया। सम्मान सत्र की जिम्मेदारी प्रान्तीय मीडिया प्रभारी नितेश कपूर ने संभाली। वहीं कवि सम्मेलन का संचालन ओंकार कश्यप ने किया।
संचालन की सहजता ने मंच और श्रोताओं के बीच संवाद को बनाए रखा। कवियों की प्रस्तुतियों के बीच मंच संचालन के माध्यम से कार्यक्रम का प्रवाह लगातार बना रहा। यही कारण रहा कि देर तक चलने के बावजूद श्रोताओं की रुचि कार्यक्रम में बनी रही।
साहित्यकारों और सहयोगियों का हुआ सम्मान
आयोजन के दौरान मंच पर मौजूद कवियों और साहित्यकारों के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले लोगों को भी सम्मानित किया गया। उन्हें स्मृति-चिह्न, अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट किए गए।
सम्मान का यह क्षण आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इससे साहित्य और साहित्यकारों के प्रति समाज में सम्मान की भावना को भी बल मिला। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने साहित्यिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
साहित्य समाज को दिशा देने का माध्यम : अविनाश कुमार पांडेय
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश कुमार पांडेय ने कहा कि साहित्य सिर्फ शब्दों का संयोजन नहीं है। यह समाज की संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देने और लोगों को अपने समय से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने साहित्यिक आयोजनों के जरिए समाज में सकारात्मक चेतना और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
उनके अनुसार, साहित्य समाज को जागरूक करने के साथ-साथ लोगों के बीच संवेदनशीलता और संवाद की भावना विकसित करता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में संजीव कुमार पाठक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने आयोजन में शामिल कवियों, अतिथियों, साहित्यकारों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का विधिवत समापन हुआ।
बिहारशरीफ का टाउन हॉल देर तक उन शब्दों की गूंज को अपने भीतर समेटे रहा, जिन्होंने कभी हंसाया, कभी उत्साहित किया और कभी समाज के आईने में खुद को देखने का अवसर दिया। आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि कविता आज भी लोगों को जोड़ने, संवेदनाओं को जगाने और सामाजिक संवाद को जीवंत रखने की अपनी ताकत बनाए हुए है। नालंदा की धरती पर सजा यह साहित्यिक मंच केवल एक कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि शब्द, संस्कृति और सामाजिक चेतना के मिलन का अवसर बनकर सामने आया।