अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति पर सवाल; जाफर का दावा- इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे विराट, लेकिन संन्यास के हालात को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था
विराट कोहली ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। उनके इस फैसले ने क्रिकेट जगत को चौंका दिया, क्योंकि वह भारत के इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर ने उनके संन्यास से जुड़े घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। जाफर का मानना है कि विराट के साथ जिस तरह से हालात संभाले गए, उससे वह नाखुश रहे होंगे। उन्होंने अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति के फैसलों और खिलाड़ियों से संवाद करने के तरीके पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, जाफर ने यह भी स्पष्ट किया कि विराट की नाराजगी की असली वजह तब तक निश्चित रूप से नहीं जानी जा सकती, जब तक कोहली खुद इस बारे में कुछ नहीं बताते। इसलिए यह कहना कि उन्हें संन्यास लेने के लिए मजबूर किया गया था, अभी एक दावा है, स्थापित तथ्य नहीं।
इंग्लैंड दौरे की तैयारी के बीच अचानक संन्यास क्यों?
विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट में करीब 14 साल तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके संन्यास की घोषणा से कुछ दिन पहले, 7 मई 2025 को रोहित शर्मा ने भी टेस्ट क्रिकेट से विदाई ले ली थी। इसके बाद विराट के फैसले ने भारतीय टीम के भविष्य और वरिष्ठ खिलाड़ियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज कर दी।

वसीम जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस विषय पर बात करते हुए कहा कि विराट जैसे खिलाड़ी में अभी और टेस्ट क्रिकेट खेलने की क्षमता थी। उनका मानना है कि विराट इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे और ऐसे में उनके संन्यास से जुड़े घटनाक्रम को अधिक संवेदनशीलता से संभाला जा सकता था।
जाफर के मुताबिक, विराट जैसे लोकप्रिय खिलाड़ी की अहमियत सिर्फ उनके रनों तक सीमित नहीं है। उनकी मौजूदगी से दर्शक मैदान तक खिंचे चले आते हैं। इसी वजह से उन्हें लगता है कि विराट का टेस्ट करियर कुछ और समय तक जारी रह सकता था।
अजीत अगरकर की चयन समिति पर क्यों उठे सवाल?
इस पूरे मामले में चर्चा का केंद्र अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति की भूमिका है। जाफर ने संकेत दिया कि कुछ फैसलों और उन्हें लागू करने के तरीके को लेकर बेहतर संवाद हो सकता था। उन्होंने यह भी माना कि भारतीय क्रिकेट में चयनकर्ताओं ने कई साहसिक फैसले लिए, जिनमें से कुछ सफल रहे, जबकि कुछ फैसलों से खिलाड़ी और प्रशंसक निराश हुए।
हालांकि, जाफर ने चयन समिति के कामकाज को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि समिति ने कई अच्छे फैसले भी लिए हैं। उनकी मुख्य आपत्ति फैसले लेने के तरीके से ज्यादा इस बात पर थी कि कुछ मामलों को अधिक कूटनीतिक और बेहतर ढंग से संभाला जा सकता था।

जाफर ने टेस्ट क्रिकेट में भारत के प्रदर्शन पर भी अलग नजरिया रखा। उनके अनुसार, सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है, जबकि टेस्ट में टीम को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि टेस्ट टीम के मैदान पर प्रदर्शन की जिम्मेदारी केवल चयनकर्ताओं की नहीं होती; टीम संयोजन और मैदान पर फैसलों में कप्तान तथा कोच की भी अहम भूमिका होती है।
खराब फॉर्म भी थी विराट के टेस्ट करियर की चुनौती
विराट के संन्यास के समय उनकी टेस्ट फॉर्म पर भी सवाल उठ रहे थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उनकी पिछली सात टेस्ट पारियों में कुल 85 रन बने थे और सर्वोच्च स्कोर 36 रन रहा था। पिछली 13 टेस्ट पारियों में वह केवल एक बार अर्धशतक लगा सके थे।
हालांकि, खराब फॉर्म अपने आप में संन्यास की वजह साबित नहीं होती। विराट ने इससे पहले भी अपने करियर में कठिन दौर का सामना किया था। उनके संन्यास के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इस पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए उनकी अपनी बात अहम होगी।
10 हजार टेस्ट रन से 770 रन दूर थे कोहली
विराट कोहली ने अपने टेस्ट करियर में 123 मैच खेले और 9,230 रन बनाए। इसमें 30 शतक शामिल हैं। वह टेस्ट क्रिकेट में भारत के चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में विदा हुए। 10,000 रन का आंकड़ा छूने के लिए उन्हें 770 रन और बनाने थे।

उनके संन्यास के बाद यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या वह कुछ और समय तक टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। लेकिन वसीम जाफर की टिप्पणी को विराट के फैसले के पीछे की अंतिम वजह नहीं माना जा सकता। फिलहाल, इस बयान ने चयन समिति के व्यवहार, वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ संवाद और भारतीय टेस्ट क्रिकेट में फैसले लेने के तरीके पर नई बहस छेड़ दी है।
