भागलपुर के Vikramshila Setu के पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। 30 सितंबर की मध्यरात्रि से पुल पर आवाजाही बंद किए जाने के बाद गुरुवार सुबह बेली ब्रिज हटाने का काम शुरू कर दिया गया।
GREF की टीम ने नवगछिया छोर से कार्रवाई शुरू करते हुए करीब सात घंटे में 60 फीट लंबे पहले बेली ब्रिज को खोल दिया। अब बाकी तीन अस्थायी पुलों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
सात घंटे में हटाया गया 60 फीट का बेली ब्रिज
हाउसिंग कॉलोनी मोड़ के पास बैरिकेडिंग के बाद पुल पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया था। इसके बाद जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) की टीम ने गुरुवार सुबह करीब पांच बजे नवगछिया की तरफ से बेली ब्रिज को हटाने का काम शुरू किया।

कैप्टन सूरज लड और असिस्टेंट इंजीनियर प्रनोदित मजूमदार की निगरानी में करीब 40 सदस्यीय टीम ने 60 फीट लंबे बेली ब्रिज को लगभग सात घंटे की मेहनत के बाद अलग कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस ब्रिज में सिंगल पैनल होने के कारण इसे हटाने में अपेक्षाकृत कम समय लगा।
90 और 100 फीट वाले ब्रिज के बाद हटेगा 170 फीट का हिस्सा
चार बेली ब्रिज को एक साथ हटाने के बजाय उन्हें एक-एक कर डिस्मेंटल किया जा रहा है। 60 फीट वाले ब्रिज के बाद 90 फीट और 100 फीट लंबे बेली ब्रिज को हटाने की प्रक्रिया होगी। इन दोनों में तीन-तीन पैनल लगे हैं, इसलिए प्रत्येक को खोलने में कम से कम दो दिन लगने का अनुमान है।

सबसे आखिर में क्षतिग्रस्त हिस्से पर बना 170 फीट लंबा बेली ब्रिज हटाया जाएगा। इसमें ऊपर और नीचे डबल पैनल लगे हैं और इसे नीचे की तरफ से भी खोलना पड़ेगा। इसी वजह से इसे हटाने में करीब तीन से चार दिन लग सकते हैं।
पूरे चारों बेली ब्रिज को हटाने में करीब 10 दिन लगने की संभावना जताई गई है। काम के लिए कुल 65 सदस्यीय टीम लगाई गई है, जिसमें 25 कैजुअल पेड लेबर भी शामिल हैं।
एक साथ सभी ब्रिज हटाना क्यों संभव नहीं?
तकनीकी टीम के मुताबिक, सभी बेली ब्रिज को एक साथ हटाने पर क्रेन, पोकलेन, हाइवा और दूसरी भारी मशीनों को कार्यस्थल तक पहुंचाने में दिक्कत आती। इसलिए पहले एक हिस्से को खाली किया जा रहा है और उसके बाद क्रमवार आगे बढ़ा जाएगा।
यह पूरी प्रक्रिया पुल के स्थायी पुनर्स्थापन के लिए जरूरी शुरुआती चरण है।
बेली ब्रिज हटने के बाद चार स्पैन काटे जाएंगे
चारों बेली ब्रिज हटाने के बाद पुल के मूल स्ट्रक्चर की तकनीकी जांच की जाएगी। इसके बाद हेली कटर से चार स्पैन काटने का काम शुरू होगा। इस चरण को पूरा करने के लिए करीब 10 दिन का लक्ष्य रखा गया है।
इसके बाद नए बेयरिंग लगाए जाएंगे और स्टील गर्डर सेट किए जाएंगे। फिर डेक स्लैब की ढलाई होगी। डेक स्लैब को सेट होने में कम से कम 21 दिन लगने की बात सामने आई है।
भारी मशीनों के लिए दिए जा रहे अतिरिक्त सपोर्ट
पुनर्स्थापन कार्य के दौरान क्रेन, हाइवा और पोकलेन जैसी भारी मशीनों को पुल पर ले जाना होगा। इसके वजन को देखते हुए चार स्थानों पर लोहे के अतिरिक्त सपोर्ट तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से तीन सपोर्ट तैयार हो चुके हैं, जबकि चौथे पर काम चल रहा है।
पुल के छह स्पैन की बेयरिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने और बैठ जाने की जानकारी भी तकनीकी कर्मियों की ओर से दी गई है। इसके अलावा गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी भी काम की रफ्तार के लिए चुनौती बनी हुई है।
तीन महीने का लक्ष्य, लेकिन चार महीने तक खिंच सकता है काम
पुनर्स्थापन कार्य को करीब तीन महीने में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, मौके पर काम कर रहे कर्मियों के अनुसार यह समयसीमा मौसम और तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
सर्दियों में कोहरे के कारण खासकर रात के समय कटिंग और अन्य तकनीकी कार्यों में परेशानी आ सकती है। ऐसे में काम चार महीने तक भी खिंचने की संभावना जताई गई है।
विक्रमशिला सेतु को स्थायी रूप से बहाल करने के लिए बेली ब्रिज हटाने की प्रक्रिया 1 अक्टूबर से शुरू होने की पहले ही तैयारी की गई थी। पुल के पुनर्स्थापन के दौरान वैकल्पिक आवागमन व्यवस्था भी लागू की गई है।