नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में युवा बल्लेबाज Vaibhav Sooryavanshi का नाम इन दिनों तेजी से चर्चा में है। महज 15 साल की उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव को लेकर पूर्व भारतीय विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने बड़ी बात कही है।
सहवाग ने वैभव की बल्लेबाजी और सोच में खुद की झलक देखने की बात कही और माना कि युवा बल्लेबाज को भारतीय टीम में ज्यादा मौके मिलने चाहिए।
पहली गेंद से बड़ा शॉट खेलने की सोच ने खींचा सहवाग का ध्यान
वीरेंद्र सहवाग अपनी बेखौफ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते रहे हैं। उनका अंदाज हमेशा से गेंदबाज पर शुरुआत से दबाव बनाने वाला रहा है। अब जब वैभव सूर्यवंशी भी इसी तरह आक्रामक क्रिकेट खेलते नजर आ रहे हैं, तो सहवाग ने दोनों की सोच में समानता बताई है।
सहवाग के मुताबिक, वैभव भी पहली गेंद से ही गेंदबाज पर हमला करने की मानसिकता रखते हैं। उन्होंने कहा कि अब असली सवाल यह है कि वैभव को भारतीय टीम में कितने मौके मिलते हैं और वह उन अवसरों का किस तरह फायदा उठाते हैं।

उम्र नहीं, प्रदर्शन होना चाहिए सबसे बड़ा पैमाना
वैभव की कम उम्र अक्सर चर्चा का विषय रहती है, लेकिन सहवाग का मानना है कि एक बार खिलाड़ी आईपीएल और भारतीय टीम के स्तर तक पहुंच जाए, तब उसकी उम्र से ज्यादा उसका प्रदर्शन मायने रखता है।
सहवाग ने उम्र की तुलना करते हुए विराट कोहली और वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण दिया। उनका तर्क है कि उम्र के आधार पर खिलाड़ी को आंकने के बजाय यह देखना चाहिए कि वह मैदान पर कैसा प्रदर्शन कर रहा है। आयु वर्ग के क्रिकेट में उम्र की अपनी भूमिका होती है, लेकिन सीनियर स्तर पर प्रदर्शन ही खिलाड़ी की असली पहचान बनता है।
टीम इंडिया में जगह के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहले ही काफी सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचने का मौका मिला। हालांकि, टीम की ओपनिंग लाइनअप में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे अनुभवी विकल्प मौजूद होने के कारण उन्हें हर मुकाबले में प्लेइंग-11 में जगह मिलना आसान नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वैभव भारत के लिए अब तक 8 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 246 रन बना चुके हैं और उनका स्ट्राइक रेट 186.36 रहा है। ये आंकड़े बताते हैं कि बेहद कम उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तेज गति से रन बनाने की क्षमता दिखाई है।

सहवाग की सलाह में छिपा लंबी पारी का संकेत
सहवाग की टिप्पणी सिर्फ वैभव की मौजूदा बल्लेबाजी की तारीफ तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा संदेश भी है—युवा प्रतिभा को अवसर के साथ निरंतरता और अनुभव की जरूरत होती है।
वैभव के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी आक्रामक शैली को बरकरार रखते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की होगी। टीम में प्रतिस्पर्धा मजबूत है और हर अवसर में प्रभाव छोड़ना उनके लिए बेहद अहम रहेगा।
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर रॉबिन सिंह ने भी वैभव की प्रतिभा की तारीफ की है, हालांकि उन्होंने युवा बल्लेबाज को धैर्य रखने की सलाह दी। उनका कहना है कि अगर टीम में दूसरे खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और वैभव को कुछ समय बेंच पर बैठना पड़ता है, तो इसमें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
वैभव के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं, लेकिन मौका बड़ा है
वैभव सूर्यवंशी के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना जितना बड़ी उपलब्धि है, उसे लंबे समय तक बनाए रखना उससे भी बड़ी चुनौती होगी। सहवाग की तारीफ निश्चित रूप से उनके आत्मविश्वास को बढ़ा सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंतिम फैसला मैदान पर बल्ले से होने वाला प्रदर्शन ही करेगा।

अगर वैभव लगातार मिले मौकों को बड़े स्कोर और प्रभावी पारियों में बदलते हैं, तो आने वाले वर्षों में वह भारतीय टी20 क्रिकेट के महत्वपूर्ण बल्लेबाजों में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, सहवाग की नजर में वैभव की सबसे खास बात उनकी उम्र नहीं, बल्कि पहली गेंद से आक्रमण करने वाली मानसिकता है।
