अमेरिका ने ब्रिटेन स्थित RAF Fairford एयरबेस से अपने B-1 बमवर्षक विमानों को वापस अमेरिका भेज दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब इस एयरबेस के आसपास कथित आतंकी साजिश को लेकर ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों की जांच चल रही है।
पिछले सप्ताह एयरबेस के पास पांच लोगों की गिरफ्तारी और बाद में एक ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाले व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
RAF Fairford से क्यों हटाए गए अमेरिकी बमवर्षक?
ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर में स्थित RAF Fairford अमेरिका के लिए यूरोप के सबसे महत्वपूर्ण एयरबेस में से एक माना जाता है। यह बेस भारी बमवर्षक विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त कुछ प्रमुख यूरोपीय ठिकानों में शामिल है। हाल के महीनों में यहां तैनात अमेरिकी B-1 बमवर्षकों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में भी किया गया था।
अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने पुष्टि की है कि RAF Fairford में तैनात सभी अमेरिकी बमवर्षक अब अमेरिका स्थित अपने होम बेस पर लौट गए हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए विमानों की वास्तविक समय में आवाजाही के बारे में पहले जानकारी देने से परहेज किया था।

पेंटागन ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की बमवर्षक क्षमता खत्म नहीं हुई है। उसके मुताबिक B-1, B-2 और B-52 जैसे विमानों को अमेरिका से भी जरूरत के मुताबिक लंबी दूरी के सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
एयरबेस के पास गिरफ्तारियों से जुड़ा मामला
अमेरिकी विमानों की वापसी को उस घटना के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें 27 सितंबर को RAF Fairford के पास पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। ब्रिटिश पुलिस के अनुसार, संदिग्धों को तीन सफेद वैन से जुड़े घटनाक्रम के बाद पकड़ा गया था। जांच के दौरान वाहनों में पेट्रोल या ज्वलनशील पदार्थ मिला, लेकिन पुलिस को कोई विस्फोटक उपकरण नहीं मिला। बाद में इन पांचों को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
इसके बाद 1 अक्टूबर को लंदन में एक 25 वर्षीय ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाले व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया। उस पर कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधि की तैयारी से जुड़ा संदेह जताया गया। हालांकि उसे भी बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। ब्रिटिश आतंकवाद निरोधी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जटिल है और अलग-अलग संभावनाओं की जांच की जा रही है।
क्या इस साजिश के पीछे ईरान था?
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू है। ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से ईरान की संभावित भूमिका को लेकर संदेह जताया गया है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप से साबित तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा है कि जांच में ईरान की भूमिका होने के “मजबूत संकेत” मिले हैं। वहीं ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया है और किसी भी कथित साजिश में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है।
रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जुलाई के अंत में इस एयरबेस को एक वैध सैन्य लक्ष्य बताया था। ऐसे में RAF Fairford की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी और ब्रिटिश अधिकारियों की चिंता को व्यापक अमेरिका-ईरान तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, जांच अभी जारी है और कथित साजिश तथा ईरान के बीच सीधा संबंध अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है। यही वजह है कि इस मामले में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान में महत्वपूर्ण रहा है Fairford
RAF Fairford का अमेरिकी सैन्य अभियानों से पुराना संबंध है। मध्य पूर्व में अमेरिका के विभिन्न सैन्य अभियानों के दौरान भी इस बेस का इस्तेमाल किया जाता रहा है। मौजूदा ईरान संघर्ष के दौरान भी यहां अमेरिकी बमवर्षकों की मौजूदगी महत्वपूर्ण रही है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने अमेरिका को Fairford से ईरान के खिलाफ केवल सीमित रक्षात्मक अभियानों के लिए इस्तेमाल की अनुमति दी थी। इसका उद्देश्य उन ईरानी मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाना था, जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को खतरा बताया गया था। ब्रिटेन ने अमेरिकी सैन्य अभियानों को लेकर अपनी अलग सीमाएं रखी हैं।
इस व्यवस्था के कारण अमेरिका और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक सहयोग के बावजूद ईरान को लेकर दोनों देशों की सैन्य नीति में कुछ अंतर भी सामने आए हैं।
अमेरिका के लिए क्या मायने रखता है विमानों का वापस जाना?
RAF Fairford से बमवर्षकों को हटाने का सबसे बड़ा असर यह हो सकता है कि यूरोप से ईरान के खिलाफ तत्काल अमेरिकी हवाई कार्रवाई की क्षमता कुछ समय के लिए कम हो। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रिटेन से बमवर्षक अभियान चलाने पर विमानों को लक्ष्य क्षेत्र तक पहुंचने में अपेक्षाकृत कम दूरी तय करनी पड़ती है।
अब इन विमानों को अमेरिका से या दूसरे संभावित सैन्य ठिकानों से संचालित किया जा सकता है। रॉयटर्स ने रक्षा विशेषज्ञ के हवाले से बताया कि विमानों को Diego Garcia या खाड़ी क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर स्थानांतरित किए जाने की संभावना भी परिस्थितियों, उपलब्धता और सहयोगी देशों के साथ समझौतों पर निर्भर कर सकती है।

हालांकि पेंटागन ने यह संकेत दिया है कि अमेरिकी बमवर्षक बल अभी भी वैश्विक स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है। इसलिए RAF Fairford से विमानों की वापसी को अमेरिकी सैन्य क्षमता में व्यापक कमी के रूप में देखना सही नहीं होगा।
NATO पर भी नहीं पड़ेगा बड़ा असर
अमेरिकी बमवर्षकों की वापसी के बीच NATO की ओर से भी संकेत दिया गया है कि इस कदम से गठबंधन की सामूहिक रक्षा क्षमता प्रभावित नहीं होगी। एक वरिष्ठ NATO सैन्य अधिकारी ने कहा कि गठबंधन की रक्षात्मक क्षमता उसके सदस्य देशों की संयुक्त सैन्य शक्ति और संसाधनों पर आधारित है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि RAF Fairford से अमेरिकी विमानों की वापसी केवल एहतियाती सुरक्षा कदम है या अमेरिका को किसी नए और गंभीर खतरे की जानकारी मिली है। अमेरिकी और ब्रिटिश अधिकारियों ने इस बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
ऐसे में इस पूरे मामले को केवल ईरान से जोड़कर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जांच जारी है और गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों तथा संभावित विदेशी कनेक्शन को लेकर आगे आने वाली आधिकारिक जानकारी ही तस्वीर को स्पष्ट करेगी।

