10 दिन में 5 बार संदिग्ध फ्लैग होने पर नंबर की जांच से लेकर सेवा बंद करने तक की कार्रवाई, फर्जी और अनचाही कॉल पर शिकंजा कसने की तैयारी
अगर आपके फोन पर रोजाना बैंक, लोन, इंश्योरेंस, क्रेडिट कार्ड, प्रॉपर्टी या किसी दूसरे कारोबार के नाम पर अनचाही कॉल आती हैं, तो ट्राई के नए नियम आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने स्पैम और अनचाही व्यावसायिक कॉल यानी Unsolicited Commercial Communication (UCC) पर नियंत्रण के लिए नए एंटी-स्पैम प्रावधान जारी किए हैं।
नए नियमों का मकसद सिर्फ स्पैम कॉल की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना भी है कि कौन-से नंबर लगातार संदिग्ध कॉल कर रहे हैं और उनके खिलाफ किस तरह कार्रवाई की जाए। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करेंगी।
नए नियमों में ग्राहकों की शिकायतों से लेकर टेलीमार्केटर्स की निगरानी और अपील के अधिकार तक कई प्रावधान शामिल हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये 7 बदलाव क्या हैं और आपके लिए इनका क्या मतलब है।
1. AI और मशीन लर्निंग पहचानेंगे संदिग्ध स्पैम कॉल
अब स्पैम कॉल की पहचान सिर्फ ग्राहक की शिकायत के आधार पर नहीं होगी। टेलीकॉम कंपनियां AI और मशीन लर्निंग सिस्टम की मदद से संदिग्ध कॉलिंग पैटर्न की पहचान करेंगी।
अगर किसी कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी यानी CLI को 10 दिनों के भीतर 5 या उससे ज्यादा बार फ्लैग किया जाता है, तो उस नंबर पर आगे की जांच हो सकती है।
ऐसी स्थिति में संबंधित नंबर के लिए KYC वेरिफिकेशन, फिजिकल वेरिफिकेशन और जरूरत पड़ने पर टेलीकॉम सेवा बंद करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
यानी आसान भाषा में कहें तो अगर कोई नंबर लगातार संदिग्ध तरीके से कॉल कर रहा है, तो सिस्टम उसे पहचानकर जांच के दायरे में ला सकता है।
2. ऑटोमेटेड और रोबोकॉल पर भी निगरानी
कई बार ग्राहक के फोन पर ऐसी कॉल आती है जिसमें दूसरी तरफ कोई व्यक्ति नहीं बल्कि पहले से रिकॉर्ड की गई आवाज सुनाई देती है। कुछ कॉल ऑटो-डायलर या AI आधारित वॉयस सिस्टम के जरिए भी की जाती हैं।
इन्हें A2P यानी Application-to-Person कॉल की श्रेणी में रखा जाता है।
नए नियमों के तहत ऑटो-डायलर, रोबोकॉल, पहले से रिकॉर्ड की गई आवाज या AI-generated voice का इस्तेमाल करने वाली ऐसी व्यावसायिक कॉल के बारे में पहले से घोषणा करना जरूरी होगा।
अगर ऐसी कॉल के बारे में जरूरी जानकारी नहीं दी गई है, तो उसे अनचाही व्यावसायिक संचार यानी UCC या स्पैम माना जा सकता है।
3. A2P कॉल पर लगेगा अधिकतम 5 पैसे प्रति मिनट तक शुल्क
नए नियमों में A2P कॉल को लेकर शुल्क का भी प्रावधान किया गया है।
ऐसी कॉल पर अधिकतम 5 पैसे प्रति मिनट तक टर्मिनेशन शुल्क लगाया जा सकता है। टर्मिनेशन शुल्क का मतलब उस नेटवर्क से जुड़ा शुल्क है जहां कॉल समाप्त होती है।
हालांकि सभी A2P कॉल इस शुल्क के दायरे में नहीं होंगी। अधिकृत नंबर सीरीज और TRAI द्वारा अधिकृत कॉल को इससे बाहर रखा गया है।
4. कम शिकायतों पर भी शुरू हो सकती है कार्रवाई
स्पैम कॉल के खिलाफ कार्रवाई के लिए अब बड़ी संख्या में शिकायतें आने का इंतजार जरूरी नहीं होगा।
अगर किसी CLI के खिलाफ 10 दिनों के भीतर 3 या उससे अधिक अलग-अलग शिकायतें मिलती हैं और AI/ML सिस्टम भी उस नंबर को संदिग्ध मानता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
इसका उद्देश्य ऐसे नंबरों की जल्दी पहचान करना है जिनसे लगातार लोगों को परेशान करने वाली या संदिग्ध व्यावसायिक कॉल की जा रही हैं।
5. शिकायत का समाधान पसंद नहीं आया तो अपील कर सकेंगे ग्राहक
अगर किसी ग्राहक ने UCC यानी अनचाही व्यावसायिक संचार को लेकर शिकायत की और वह शिकायत के निपटारे से संतुष्ट नहीं है, तो उसके पास आगे अपील करने का अधिकार भी रहेगा।
ग्राहक शिकायत के फैसले के खिलाफ 15 दिनों के भीतर अपील कर सकता है।
इसके लिए ग्राहक DND ऐप, अपने टेलीकॉम ऑपरेटर के ऐप या पोर्टल और 1909 का इस्तेमाल कर सकता है।
यानी शिकायत करने के बाद मामला अपने आप खत्म नहीं होगा। अगर ग्राहक को लगता है कि उसकी शिकायत का सही समाधान नहीं हुआ है, तो वह निर्धारित समय सीमा के अंदर दोबारा मामला उठा सकता है।
6. हेडर या कंटेंट टेम्पलेट के गलत इस्तेमाल पर कड़ी कार्रवाई
व्यावसायिक मैसेज भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाले हेडर और कंटेंट टेम्पलेट का दुरुपयोग भी नए नियमों के दायरे में आएगा।
अगर किसी हेडर या कंटेंट टेम्पलेट के गलत इस्तेमाल की जानकारी मिलती है, तो संबंधित हेडर या टेम्पलेट को 6 घंटे के भीतर निलंबित करना होगा।
इतना ही नहीं, अगर कोई टेलीमार्केटर नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके सभी टेलीकॉम संसाधनों को एक साल तक बंद किया जा सकता है और उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
इससे फर्जी पहचान या गलत टेम्पलेट के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों तक व्यावसायिक संदेश पहुंचाने पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।
7. हर बिजनेस कॉल को एक साथ स्पैम नहीं माना जा सकेगा
नए नियमों में वैध व्यावसायिक कॉल को भी बिना वजह स्पैम घोषित करने से रोकने का प्रावधान है।
कॉल मैनेजमेंट ऐप 140xx, 1600xx और 1601xx जैसी अधिकृत व्यावसायिक नंबर सीरीज से आने वाली कॉल को एक साथ स्पैम के रूप में मार्क या ब्लॉक नहीं कर सकेंगे।
इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक किसी खास कॉल को ब्लॉक नहीं कर सकता। अगर किसी व्यक्ति को कोई विशेष नंबर परेशान कर रहा है, तो वह अपने फोन में उस नंबर को व्यक्तिगत रूप से ब्लॉक कर सकता है।
क्या है इन नए नियमों का सीधा मतलब?
सरल शब्दों में देखें तो नए नियमों में स्पैम कॉल को रोकने के लिए तकनीक, शिकायत और निगरानी—तीनों को जोड़ा गया है।
AI और मशीन लर्निंग संदिग्ध नंबरों की पहचान करने में मदद करेंगे। ग्राहकों की शिकायतें कार्रवाई का आधार बन सकती हैं। वहीं बार-बार नियम तोड़ने वाले टेलीमार्केटर्स पर KYC जांच, फिजिकल वेरिफिकेशन, सेवा बंद करने और ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है।
दूसरी तरफ, जरूरी और वैध व्यावसायिक कॉल को भी सिर्फ इसलिए पूरी तरह ब्लॉक नहीं किया जा सकेगा क्योंकि वह बिजनेस नंबर से आई है।
यानी नए एंटी-स्पैम नियमों का उद्देश्य एक तरफ अनचाही और संदिग्ध कॉल पर कार्रवाई करना है, तो दूसरी तरफ वैध व्यावसायिक संचार और ग्राहक की सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना भी है।