न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारत की रोमांचक जीत के नायक रहे तिलक वर्मा ने खुलासा किया है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक के भरोसे भरे संदेश ने मुश्किल हालात में उन्हें धैर्य बनाए रखने की ताकत दी। क्राइस्टचर्च में 181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए, लेकिन तिलक ने नाबाद अर्धशतक लगाकर टीम को चार विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
गंभीर और कोटक ने क्या कहा था?
मैच के बाद तिलक ने बताया कि मुकाबले से पहले उनकी गंभीर और कोटक से बातचीत हुई थी। दोनों ने उनसे कहा कि टीम और पूरा देश उन पर भरोसा करता है और यदि वह अंत तक क्रीज पर टिके रहे, तो भारत मैच जीत सकता है। तिलक के मुताबिक, मुश्किल समय में यही बात उनके मन में रही और उन्होंने जल्दबाजी करने के बजाय पारी को आखिरी ओवरों तक ले जाने पर ध्यान दिया।
तिलक ने कहा कि वह खुद पर गर्व महसूस कर रहे हैं, क्योंकि टीम प्रबंधन ने जिस जिम्मेदारी के लिए उन पर भरोसा जताया था, वह उसे निभाने में सफल रहे। उन्हें इस प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
70 रन पर पांच विकेट गंवाकर मुश्किल में था भारत
181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम एक समय 70 रन पर पांच विकेट गंवा चुकी थी। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने मध्यक्रम पर दबाव बनाया और कप्तान मिचेल सैंटनर ने अहम विकेट लेकर भारत की मुश्किलें बढ़ाईं। इस स्थिति में तिलक ने जोखिम भरे शॉट खेलने के बजाय स्ट्राइक रोटेट करने, खाली जगहों में गेंद खेलने और साझेदारी बनाने को प्राथमिकता दी।

तिलक ने नमन धीर के साथ मिलकर पारी को संभाला। दोनों ने छठे विकेट के लिए 42 रन जोड़े। नमन ने 17 गेंदों पर 31 रन बनाकर तेजी से रन जुटाए, जिससे भारत की उम्मीदें बनी रहीं। उनके आउट होने के बाद भी तिलक ने संयम नहीं खोया।
नीतीश कुमार रेड्डी के साथ निर्णायक साझेदारी
अंतिम ओवरों में तिलक को नीतीश कुमार रेड्डी का साथ मिला। दोनों ने नाबाद 69 रन की साझेदारी कर मुकाबले का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। तिलक ने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए, जबकि नीतीश ने 13 गेंदों पर नाबाद 26 रन की तेज पारी खेली। भारत ने 19.5 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया और पांच मैचों की श्रृंखला में 2-0 की बढ़त बना ली।
स्पिन के खिलाफ समझदारी और तेज गेंदबाजों पर हमला
तिलक ने बताया कि धीमी पिच पर स्पिनरों के खिलाफ योजना थी कि गेंद को गैप में खेलकर तेजी से रन लिए जाएं और जरूरत पड़ने पर दो रन पूरे किए जाएं। बड़े शॉट खेलने के लिए उन्होंने तेज गेंदबाजों की गति का इंतजार किया। उनके अनुसार, स्पिन के खिलाफ दौड़कर लिए गए अतिरिक्त रन बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए। यह तरीका दबाव में विकेट बचाने और रन गति बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने में मददगार रहा।
युवा खिलाड़ियों पर भरोसे का परिणाम
तिलक की पारी ने दिखाया कि कठिन लक्ष्य का पीछा करते समय सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता, साझेदारी और मानसिक स्थिरता भी निर्णायक होती है। गंभीर और कोटक का संदेश तिलक के लिए भरोसे का आधार बना, जबकि नमन धीर और नीतीश रेड्डी ने भी अहम योगदान दिया। भारत की वापसी वाली यह जीत टीम के युवा खिलाड़ियों की जिम्मेदारी निभाने की क्षमता को रेखांकित करती है।

श्रृंखला में 2-0 की बढ़त के बावजूद भारतीय टीम के लिए आगे भी इसी तरह का संयम और साझेदारी बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। तिलक का प्रदर्शन टीम प्रबंधन के भरोसे और खिलाड़ी के आत्मविश्वास के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण बना।
